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अतुल को सुसाइड के लिए उकसाने वालों को सजा कब: भाई बोले- एक साल से अस्थियां घर में रखीं, कहा था गटर में बहा देना

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अतुल को सुसाइड के लिए उकसाने वालों को सजा कब:  भाई बोले- एक साल से अस्थियां घर में रखीं, कहा था गटर में बहा देना

अतुल को सुसाइड के लिए उकसाने वालों को सजा कब: भाई बोले- एक साल से अस्थियां घर में रखीं, कहा था गटर में बहा देना

‘मेरा अस्थि विसर्जन तब तक नहीं होना चाहिए, जब तक कि दोषियों को सजा न मिल जाए। अगर इतने सबूत होने के बाद भी कोर्ट दोषियों को बरी कर देता है, तो मेरी अस्थियों को कोर्ट के बाहर किसी गटर में बहा देना चाहिए, ताकि मैं ये जान जाऊं कि इस देश में किसी जिंदगी

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ये बेंगलुरु के AI इंजीनियर अतुल सुभाष की आखिरी इच्छा थी। 34 साल के अतुल ने 9 दिसंबर, 2024 को 24 पेज का सुसाइड लेटर लिखा, 1 घंटे 20 मिनट का वीडियो बनाया और घर में ही फांसी लगा ली। उन्होंने पत्नी निकिता सिंघानिया और उनकी फैमिली पर परेशान करने, पैसे वसूलने का आरोप लगाया था।

एक साल हो गया, अतुल सुभाष की अस्थियां अब भी घर में रखी हैं। निकिता सिंघानिया, उनकी मां निशा और भाई अनुराग जमानत पर बाहर हैं। निकिता पहले दिल्ली में काम करती थीं, अब हरियाणा की टेक कंपनी में नौकरी कर रही हैं। अतुल ने जौनपुर फैमिली कोर्ट की एक महिला जज पर भी आरोप लगाया था। उनका ट्रांसफर और प्रमोशन हो चुका है। हालांकि, अतुल के केस की चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद केस में पहली सुनवाई नहीं हुई है।

मरने से पहले अतुल ने वीडियो बनाकर अपनी पूरी परेशानी बताई थी। इसमें दहेज के आरोप, पत्नी की गलत आदतें, कोर्ट में हुए खराब व्यवहार और आखिरी इच्छा तक का जिक्र किया था।

एक साल बाद 4 सवाल बाकी… 1. अतुल सुभाष केस में सबूत होने के बावजूद आरोपियों को जमानत कैसे मिली? 2. जिस चार्जशीट को 90 दिन में पेश किया जाना था, उसे दाखिल होने में 11 महीने क्यों लगे? 3. मामले की सुनवाई क्यों शुरू नहीं हो पा रही है? 4. अतुल के बेटे की कस्टडी किसे मिलेगी?

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इन सवालों के जवाब जानने के लिए हमने अतुल-निकिता की फैमिली और उनके वकीलों से बात की।

‘सुसाइड, सबूत के बावजूद कोर्ट ने कहा- एक साल बाद सुनवाई करेंगे’ अतुल के छोटे भाई विकास मोदी दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं। माता-पिता बिहार में हैं। अतुल के सुसाइड केस पर विकास कहते हैं, ‘भैया की मौत 9 दिसंबर 2024 को हुई थी। पुलिस उसके आरोपियों को एक हफ्ते तक पकड़ नहीं पाई। 15 दिसंबर को निकिता और उसके घरवालों को गिरफ्तार किया गया। 4 जनवरी को उन्हें जमानत मिल गई। बेंगलुरु से लेकर यूपी तक इस केस की जांच चलती रही, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।’

‘नियम के मुताबिक, 90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस केस में 11 महीने बाद 6 नवंबर, 2025 को दायर की गई। अगले दिन सबसे अजीब बात हुई। बेंगलुरु की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने केस की पहली सुनवाई की तारीख सीधे 20 नवंबर, 2026 रख दी। यानी अतुल के मौत के करीब दो साल बाद।’

ये बेंगलुरु की मजिस्ट्रेट कोर्ट का डॉक्युमेंट है। इसमें केस की पहली सुनवाई की तारीख 20 नवंबर, 2026 लिखी है।

‘ये बहुत बड़ा गैप था। हमने विरोध किया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस फैसले पर हैरानी जताई। विवाद बढ़ा तो बेंगलुरु कोर्ट ने सुनवाई की नई तारीख मार्च, 2026 तय कर दी। ये भी काफी लंबा वक्त था। हमने सोशल मीडिया पर विरोध जारी रखा। इसके बाद कोर्ट ने 5 दिसंबर, 2025 को पहली सुनवाई की तारीख तय कर दी।’

विकास आगे कहते हैं, ‘अतुल के लिए मम्मी-पापा और मैंने बिहार से बेंगलुरु और फिर जौनपुर तक लड़ाई लड़ी। 5 दिसंबर को हम कोर्ट पहुंचे, तो पता चला कि निकिता और उसका परिवार पेशी पर नहीं आया है। इसलिए सुनवाई नहीं हो पाएगी।’

‘अतुल ने अपने सुसाइड वीडियो में कहा था कि निकिता कोर्ट आती थी, तो उसे अपने बेटे को देखने तक नहीं देती थी। मेरे मरने के बाद निकिता बच्चे को मोहरा बनाकर ये केस लड़ेगी। आखिरकार, अतुल की बात सच साबित हुई। निकिता के वकील ने कोर्ट को बताया कि बच्चे का एग्जाम है, इसलिए वो सुनवाई में नहीं आ सकती। कोर्ट ने उसकी मांग मानते हुए सुनवाई टाल दी।’

अतुल के बेटे की उम्र अब 5 साल हो गई है। उसकी परमानेंट कस्टडी के लिए परिवार ने याचिका लगाई है।

विकास आगे कहते हैं, ‘मैंने सवाल उठाया कि अगर आरोपी नंबर 1 नहीं आ सकती, तो आरोपी नंबर दो (निशा सिंघानिया) और आरोपी नंबर तीन (अनुराग सिंघानिया) क्यों हाजिर नहीं हुए। आरोपी पक्ष के वकील के पास इसका जवाब नहीं था। बावजूद इसके केस की सुनवाई जनवरी 2026 तक टाल दी गई है।’

केस की तारीखें बढ़ने से परेशान विकास मोदी कहते हैं, ‘मेरा भाई सुसाइड नोट में एक-एक सबूत और वीडियो देकर गया है। उन चीजों की जांच क्यों नहीं हुई। अगर जांच हुई भी है, तो उसे क्यों गुपचुप तरीके से बंद कर दिया गया। सच लोगों के सामने क्यों नहीं लाया गया।’

विकास आगे कहते हैं, ‘लोग जानते हैं कि अतुल सुभाष ने सुसाइड कर ली, लेकिन वो अब भी हमारे साथ हैं। उनकी अस्थियां आज भी घर के मंदिर के पास एक कलश में बंद हैं। एक साल से इंसाफ का इंतजार कर रही हैं। मैं, पापा-मम्मी कोशिश कर रहे हैं कि अतुल को जल्द इंसाफ मिले। ऐसा नहीं होता है तो हम अतुल की अस्थियों के साथ खुद को खत्म कर लेंगे।’

अतुल के घर में पूजा वाली जगह उनकी अस्थियां रखी हैं। अतुल की आखिरी इच्छा के मुताबिक, अभी परिवार ने इनका विसर्जन नहीं किया है।

अतुल के सुसाइड नोट की अहम बातें… अतुल ने सुसाइड नोट की शुरुआत ‘जस्टिस इज ड्यू’ यानी ‘इंसाफ बाकी है’ से की थी। अतुल अपने बारे में लिखते हैं कि मेरी पत्नी ने मेरे खिलाफ 9 केस दर्ज करवाए। 2022 में हत्या की कोशिश और अननेचुरल सेक्स का भी एक मामला है। हालांकि बाद में उसने ये केस वापस ले लिया था। बाकी केस में दहेज प्रताड़ना, तलाक और मेंटेनेंस के मामले हैं, जो जिला कोर्ट और हाईकोर्ट में चल रहे हैं।

अतुल ने जौनपुर कोर्ट के प्रिंसिपल फैमिली जज, पत्नी निकिता सिंघानिया, साले अनुराग सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया और पत्नी के चाचा सुशील सिंघानिया पर गंभीर आरोप लगाए थे। जौनपुर कोर्ट में काम करने वाले पेशकार माधव पर भी घूस लेने का आरोप लगाया। नोट में उन्होंने सुनवाई के दौरान बातचीत का ब्योरा भी लिखा है। अतुल बताते हैं कि कैसे कोर्ट में ही उनकी पत्नी ने उन्हें खुदकुशी के लिए उकसाया था।

अतुल ने एक पेज पर अपनी आखिरी इच्छाएं लिखी थीं। इसमें लिखा था कि पत्नी को मेरी डेडबॉडी के पास न आने दिया जाए।

पत्नी ने 3 करोड़ मांगे, कहा- तुम आत्महत्या क्यों नहीं कर लेते अतुल के मुताबिक, मेरी पत्नी ने केस सेटल करने के लिए पहले 1 करोड़ रुपए मांगे थे। बाद में 3 करोड़ रुपए मांगने लगी। 3 करोड़ रुपए की डिमांड के बारे में उन्होंने जौनपुर की फैमिली कोर्ट की जज को बताया तो उन्होंने भी पत्नी का साथ दिया।

अतुल ने कहा कि मैंने जज को बताया कि NCRB की रिपोर्ट बताती है कि देश में बहुत सारे पुरुष झूठे केस की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं, तो पत्नी ने बीच में कहा कि तुम भी आत्महत्या क्यों नहीं कर लेते हो। इस बात पर जज हंस पड़ी और कहा कि ये केस झूठे ही होते हैं, तुम परिवार के बारे में सोचो और केस को सेटल करो। मैं केस सेटल करने के 5 लाख रुपए लूंगी।

निकिता ने अतुल पर दहेज और घरेलू हिंसा जैसे 9 केस दर्ज करवाए अतुल की मौत के बाद बेंगलुरु की मराठाहल्ली पुलिस इस केस की जांच कर रही थी। पुलिस ने अतुल के घर से सुसाइड नोट, लैपटॉप, मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेज जब्त किए। इन्हीं के आधार पर निकिता सहित उनकी मां और भाई से पूछताछ की गई। जांच के दौरान करीब 3 हफ्ते तक निकिता और उनका परिवार बेंगलुरु पुलिस की कस्टडी में रहा। 4 जनवरी 2025 को सभी आरोपियों को जमानत मिल गई।

निकिता ने जौनपुर फैमिली कोर्ट में अतुल के खिलाफ 9 केस दर्ज करवाए थे। इनमें हत्या की कोशिश, दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और अवैध संबंधों जैसे आरोप लगाए गए थे। इन मामलों की सुनवाई जौनपुर कोर्ट में चल रही थी। इसी दौरान अतुल ने बेंगलुरु में सुसाइड कर लिया।

हमने केस पर बात करने के लिए निकिता को फोन किया। उनका फोन बंद आया। निकिता से बात होने पर खबर में अपडेट किया जाएगा। इसके बाद हमने निकिता के वकील रह चुके विवेक कुमार से बात की। विवेक बताते हैं, ‘अब अतुल और निकिता के पक्षों ने इस केस में अपने पुराने वकीलों को बदल दिया है। नए वकील दिल्ली के हैं।’

अतुल ने जिस जज पर करप्शन का आरोप लगाया, उनका ट्रांसफर हुआ अतुल ने सुसाइड नोट में तब की जौनपुर फैमिली कोर्ट की प्रिंसिपल जज और उनके पेशकार माधव पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा था कि कोर्ट में तारीख और फैसले के लिए रिश्वत देना आम है। माधव हर व्यक्ति से 50 रुपए वसूलता है। कई लोगों को 500 से 1000 रुपए तक देना पड़ता है।

अतुल ने ये भी आरोप लगाया कि महिला जज ने 21 मार्च 2024 को उनसे 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी थी। माधव ने 2022 में उनसे 3 लाख रुपए की मांग की थी, ताकि आदेश उनके पक्ष में आए। अतुल ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया। इसलिए फैमिली कोर्ट उनके खिलाफ हो गई।

हमने महिला जज के बारे में पता किया। पता चला कि उनका अक्टूबर में प्रमोशन हो गया। जौनपुर के बाद उनकी पोस्टिंग बतौर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंबेडकर नगर हो गई। इस समय वह हरदोई की जिला जज हैं।

अतुल के वकील बोले- बच्चे की कस्टडी के लिए केस फाइल किया अतुल सुभाष का केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट रूपेश सिंह कहते हैं, ‘निकिता के खिलाफ अतुल की फैमिली ने बेंगलुरु कोर्ट में धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज करवाया है। उसमें अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होनी है।’

रूपेश आगे कहते हैं, ‘इन बातों से ये साबित होता है कि एक साल बाद अब ये केस अब हमारे पक्ष में मुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन पर हमने अतुल के बच्चे की कस्टडी के लिए नया केस फाइल किया है। हमें भरोसा है कि फैसला हमारे पक्ष में जाएगा।’

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