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माइनर की पटरी कटी, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न: बाराबंकी के सिरौली गौसपुर में सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप, दर्जनों किसान परेशान – Barabanki News

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माइनर की पटरी कटी, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न:  बाराबंकी के सिरौली गौसपुर में सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप, दर्जनों किसान परेशान – Barabanki News

माइनर की पटरी कटी, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न: बाराबंकी के सिरौली गौसपुर में सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप, दर्जनों किसान परेशान – Barabanki News

सरफराज वारसी | बाराबंकी24 मिनट पहले

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बाराबंकी के सिरौलीगौसपुर क्षेत्र में पीठापुर माइनर की पटरी दो स्थानों से कट गई। इसके कारण सैकड़ों बीघा गेहूं और सरसों की फसल जलमग्न हो गई। खेतों में अचानक पानी भरने से किसानों में हड़कंप मच गया, जिसके बाद वे अपनी फसल बचाने के लिए पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालने में जुट गए।

यह घटना शुक्रवार सुबह सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के पीठापुर माइनर पर हुई। सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे और उन्होंने अपनी फसल को पानी में डूबा देखा, तो वे परेशान हो उठे। दर्जनों किसान खेतों में भरे पानी को देखकर चिंतित थे।

किसानों ने तुरंत माइनर की टूटी पटरी को अपने स्तर पर बांधने का प्रयास किया। उन्होंने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। किसानों के अनुसार, नहर विभाग द्वारा कराई गई आधी-अधूरी सफाई के कारण माइनर में पानी का बहाव बाधित हुआ, जिससे दबाव बढ़ा और पटरी टूट गई।

पीठापुर माइनर से जुड़े किसान सुरेंद्र कुमार, प्रेमचंद्र, सहदेव कुमार, जगतनारायण, जयनारायण और सदाशिव सहित अन्य किसानों ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया। उन्होंने डीजल मंगवाकर पंपिंग सेट लगाए और खेतों से पानी निकालने का काम शुरू किया।

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किसान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि पीठापुर माइनर दर्जनों गांवों को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है। उनकी शिकायत है कि माइनर की सफाई केवल सड़क किनारे की गई, जबकि बीच का हिस्सा छोड़ दिया गया। जब माइनर में पानी छोड़ा गया, तो वह आगे नहीं बढ़ पाया, जिससे दबाव बढ़ा और पटरी टूट गई। इसी वजह से उनकी गेहूं और सरसों की फसल जलमग्न हो गई।

किसानों को आशंका है कि खेतों में लंबे समय तक पानी भरे रहने से फसल में रोग लग सकता है और पौधे पीले पड़ सकते हैं। किसान सदाशिव ने बताया कि सफाई कार्य के दौरान उन्होंने पूरी नहर की समुचित सफाई कराने की मांग की थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के ‘किसानों की बात खेत पर सुनी जाएगी’ के दावे इस मामले में खोखले साबित हुए हैं।

किसानों ने सिंचाई विभाग से तत्काल मौके पर पहुंचकर माइनर की मरम्मत कराने और फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।

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