इंडिगो ने उधारी के जहाज से भरी थी पहली उड़ान: अब देश की 60% से ज्यादा फ्लाइट्स पर कब्जा; क्या मौजूदा संकट से उबर पाएगी h3>
पिछले 4 दिनों में इंडिगो एयरलाइन की 1700 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं। हजारों देरी से चल रही हैं। देशभर के एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल है। इंडिगो रोजाना करीब 2,200 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है और भारतीय एविएशन मार्केट में इसकी 60 फीसदी से भी ज्यादा की
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इंडिगो के मेगा एंपायर बनने की पूरी कहानी और फिलहाल संकट में क्यों घिरी है कंपनी; जानेंगे NEWS4SOCIALएक्सप्लेनर में…
1984 का साल था। दिल्ली के रहने वाले राहुल भाटिया कनाडा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर भारत लौटे। वह कनाडा की नॉर्टेल कंपनी के साथ मिलकर भारत में टेलिकॉम बिजनेस शुरू करना चाहते थे। इसी सपने के साथ वह भारत लौटे थे। उस दौर में भारत सरकार विदेशी टेक्नोलॉजी के पक्ष में नहीं थी इसलिए उनका यह सपना अधूरा ही रह गया।
राहुल एक मिडिल क्लास फैमिली से थे। उनके पिता ‘दिल्ली एक्सप्रेस’ नाम से एक एयरलाइन टिकट बुकिंग एजेंसी चलाते थे। इस एजेंसी को उनके पिता ने 1964 में 9 पार्टनर के साथ मिलकर शुरू किया था। दिल्ली एक्सप्रेस में कुछ पार्टनर की धोखाधड़ी और पिता की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए राहुल की एंट्री फैमिली बिजनेस में हुई।
इसी बीच 1992 में भारत सरकार ने एयरलाइंस के लिए प्राइवेट लाइसेंस देने की शुरुआत की। इस वजह से कई प्राइवेट कंपनियां एविएशन इंडस्ट्री में आ रही थीं। राहुल इस इंडस्ट्री में आना तो चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी हड़बड़ी नहीं थी। राहुल ने वक्त लिया, बेहतर रणनीति बनाई और उसके बाद एविएशन मार्केट में कदम रखा। एयरलाइन बिजनेस के लिए उन्हें एक पार्टनर की जरूरत थी, जो बने NRI राकेश गंगवाल।
दो दोस्तों ने मिलकर शुरू की अपनी एयरलाइन कंपनी राहुल की राकेश से पहली मुलाकात काम के सिलसिले में ही हुई थी। राकेश अमेरिका में यूनाइटेड एयरलाइंस से जुड़े थे। राहुल की कंपनी इंटरग्लोब ग्रुप, इसी यूनाइटेड एयरलाइंस की भारत में जनरल सेल्स एजेंट थी। काम के चलते राहुल और राकेश के बीच दोस्ती बढ़ती गई। एक दिन राहुल ने राकेश से अपनी एयरलाइन कंपनी खोलने की बात की और दोनों इसका प्लान बनाने में जुट गए।
राकेश गंगवाल दशकों से एयरलाइंस में काम कर रहे थे। उन्होंने IIT कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और व्हार्टन से MBA की पढ़ाई की थी। 1994 में राकेश एयर फ्रांस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट बने, जिसके चार साल बाद 1998 में उन्हें US एयरवेज का प्रेसिडेंट और CEO बनाया गया।
इंडिगो की शुरुआत से पहले राकेश गंगवाल वर्ल्डस्पैन टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन और CEO थे। यह कंपनी इंडस्ट्री को ट्रैवल टेक्नोलॉजी और इन्फॉर्मेशन सर्विस देती थी। (यूएस एयरलाइंस में काम करने के दौरान अवॉर्ड्स के साथ दायीं ओर खड़े राकेश गंगवाल)
2004 में हुई इंडिगो की मार्केट में एंट्री काफी मशक्कत के बाद राहुल और राकेश को 2004 में इंडिगो एयरलाइन के लिए लाइसेंस मिला। इसी साल दोनों ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड की नींव रखी। इस कंपनी में दोनों की हिस्सेदारी बराबर की थी।
दिलचस्प यह है कि इंडिगो ने उस वक्त मार्केट में एंट्री ली, जब फ्यूल की कीमत में उछाल और रुपए में भारी गिरावट थी। इस समय भारतीय एयरलाइन इंडस्ट्री बुरे दौर से गुजर रही थी। किंगफिशर और स्पाइसजेट जैसी कंपनी घाटे में चल रही थीं।
इंडिगो ने उधार लिए 5 लाख करोड़ के 100 जहाज
2005 में पेरिस में एक एयर शो हुआ। जिसमें इंडिगो ने एक साथ 5 लाख 43 हजार करोड़ (6.5 बिलियन डॉलर) के 100 एयरबस A320 एयरक्राफ्ट का ऑर्डर देकर सबको चौंका दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राकेश और राहुल ने सिर्फ 100 करोड़ लगाकर कंपनी शुरू की थी। ऐसे में हैरानी जायज थी, आखिर इतने कम इन्वेस्टमेंट में 100 जहाज कैसे लिया जा सकता है।
पता चला कि इसके पीछे राकेश गंगवाल का हाथ था। राकेश पिछले तीन दशक से एविएशन फील्ड में काम कर रहे थे। इस वजह से एयरबस कंपनी में उनकी अच्छी जान-पहचान थी। एयरबस कंपनी उनके नाम पर उधार में जहाज देने को राजी हो गई। इंडिगो ने 4% डाउन पेमेंट पर 100 जहाज उठाए, उन्हें इसके साथ 40% का डिस्काउंट भी मिला।
पहला जहाज उड़ाने में दो साल का वक्त लगा कंपनी को अपना पहला जहाज उड़ाने में 2 साल का वक्त लग गया। 28 जुलाई 2006 को इंडिगो को अपना पहला एयरबस मिला। जिसके एक हफ्ते बाद 4 अगस्त 2006 को दिल्ली से गुवाहाटी के लिए इंडिगो की पहली फ्लाइट ने उड़ान भरी। यहां से भारतीय एविएशन इंडस्ट्री की तस्वीर बदलनी शुरू हो गई।
पहली उड़ान भरने के लगभग चार साल में ही इंडिगो ने एअर इंडिया को पीछे छोड़ते हुए 17.3% मार्केट शेयर के साथ तीसरा स्थान हासिल कर लिया।
इंडिगो ने कॉस्ट कटिंग के लिए फ्री खाना हटाया इंडिगो ने पूरी तरह से मिडिल क्लास पर फोकस किया। कंपनी ने अपने जहाज में सिर्फ इकोनॉमी क्लास की सीटें लगाईं। हर फ्लाइट में 180 लोगों के बैठने की जगह बनाई गई। कॉस्ट कटिंग के लिए सफर के दौरान फ्री का खाना हटा दिया गया।
कंपनी ने अपने स्टाफ को भी अलग तरह से ट्रेन किया। सभी को खास इंस्ट्रक्शन दिया गया कि 25 मिनट के अंदर जहाज फिर से उड़ने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। ग्राउंड स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी गई कि वह 6 मिनट के अंदर सभी पैसेंजर को जहाज से उतार दे। पैसेंजर के लगेज को 10 मिनट के अंदर लोड और अनलोड कर दिया जाए। ।
राकेश गंगवाल ने इंडिगो को पान की दुकान बताकर इस्तीफा दे दिया इंडिगो के लगातार बढ़ते कद को देखते हुए राकेश गंगवाल इसे तेजी से आगे बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने फरवरी 2018 में बताया था कि वित्त वर्ष 2019 में इंडिगो अपनी क्षमता में 52% का इजाफा करेगी। यानी 155 एयरक्राफ्ट वाली कंपनी अब अपने बेड़े में 95 एयरक्राफ्ट और बढ़ाने जा रही है।
इसको लेकर कंपनी के तत्कालीन प्रेसिडेंट आदित्य घोष ने सीधे विरोध किया था। राहुल भी जल्दबाजी न दिखाते हुए सावधानी के साथ आगे बढ़ना चाहते थे। इस कारण धीरे-धीरे दोनों के बीच असहमति बढ़ती गई।
राकेश इंडिगो के कॉर्पोरेट गवर्नेंस से नाराज थे। उन्होंने इंडिगो की तुलना पान की दुकान से कर दी।
इसके जवाब में राहुल ने कहा था, ‘राकेश ऐसा एक भी मामला पेश नहीं कर पाए हैं जिससे इंडिगो को नुकसान का पता चलता हो। सच तो यह है कि मेरी पान की दुकान अच्छी चल रही है।’
लंबे चले विवाद के बाद 2022 में राकेश गंगवाल ने एयरलाइन के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।
दोनों के बीच दरार इस कदर बढ़ गई कि राकेश ने भारत के प्रधानमंत्री ऑफिस (PMO) और सेबी को लेटर लिखकर राहुल पर इंडिगो के जरिए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप तक लगा दिया।
आज हर दिन इंडिगो की 2200 से ज्यादा उड़ानें इंडिगो रोजाना 2200 से ज्यादा फ्लाइट ऑपरेट कर रही है। देश के 90 से ज्यादा डोमेस्टिक और 40 से ज्यादा इंटरनेशनल उड़ाने हैं। कंपनी के बेड़े में 417 जहाज हैं। भारत में इंडिगो का 61.4% मार्केट शेयर है। यानी हर 10 में से 6 भारतीय इंडिगो फ्लाइट से सफर कर रहा है। कंपनी का दावा है कि वह हर 6 साल में अपने जहाज को रिटायर करती है।
पिछले 3-4 दिनों से इंडिगो में मची अफरातफरी
पिछले 4 दिनों में इंडिगो ने 1700 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द कीं और हजारों देरी से चल रही हैं…
- 2 दिसंबर को सबसे पहले दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के एयरपोर्ट्स पर इंडिगो की 50-70 घरेलू फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। इस दौरान इंडिगो का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस सिर्फ 35% रह गया, जो अन्य एयरलाइन जैसे स्पाइसजेट के 82% से बहुत कम था।
- 3 दिसंबर को भी बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद से उड़ने वाली फ्लाइट्स के कैंसिलेशन शुरू हो गए। फ्लाइट्स में देरी के चलते लोग काउंटरों पर घंटों लाइन में लगे रहे। पुणे और गोवा जैसे छोटे एयरपोर्ट्स का भी यही हाल होने लगा। ऑन-टाइम परफॉर्मेंस गिरकर 19.7% रह गई।
- यात्री सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर रहे थे। लोगों का कहना था कि स्टाफ की कमी से फ्लाइट रद्द की जा रही हैं। इसके बावजूद फ्लाइट्स का किराया बढ़ाया जा रहा था। दिल्ली से मुंबई तक की फ्लाइट्स का किराया 10 हजार से बढ़कर 40 हजार तक दिखने लगा।
- एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि इंडिगो रिसोर्सेज की ठीक से प्लानिंग नहीं कर रही है।
- 4 दिसंबर को इंडिगो का काम लगभग ठप हो गया। करीब 800 फ्लाइट रद्द कर दी गईं। दिल्ली में रात 12 बजे तक की सभी डोमेस्टिक फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गईं। भोपाल, पुणे और गोरखपुर जैसे शहरों में भी यात्री फंसे हुए थे। किसी को शादी में जाना था, तो कोई छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ घंटों से लाइन में लगा था। ऑन-टाइम परफॉर्मेंस गिरकर 8.5% हो गई।
- 5 दिसंबर को हालात बदतर हुए और इंडिगो को 1 हजार से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी। यात्री 24-24 घंटे से फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्री पानी, खाना और जरूरी सामानों के लिए स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों से बहस करते और झगड़ा करते देखे गए।
- इंडिगो का कहना है कि फ्लाइट ऑपरेशन नॉर्मल होने में 15 दिसंबर तक का समय लगेगा। इधर दूसरी एयरलाइन के किराए में उछाल देखने को मिला है। यात्रियों को ऑप्शनल फ्लाइट्स की तलाश में सामान्य से 10 गुना कीमत तक पर टिकट खरीदने पड़ रहे हैं।
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ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर है NSW स्पोर्ट्स एयरक्राफ्ट क्लब। यहां हर वीकेंड पर पायलट्स हवा में कलाबाजियां करने की प्रैक्टिस करने जाते हैं।
30 नवंबर की दोपहर 4 प्लेन हवा में उड़ान भरते हैं। कलाबाजियां करने के बाद सभी प्लेन जैसे ही रनवे पर लौटने के लिए अलग होते हैं, तभी एक प्लेन दूसरे प्लेन के फ्यूलसेज से टकराता है और क्रैश कर जाता है।
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