सिविल अस्पताल में 3 महीने में 6 प्रसूताओं की मौत: बालाघाट में कलेक्टर ने जताई चिंता; डॉक्टरों को जिम्मेदारी से काम करने के सख्त निर्देश – Balaghat (Madhya Pradesh) News h3>
बालाघाट जिले के सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के बावजूद, प्रसूता महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं की मौतों ने चिकित्सीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में मातृ-शिशु मृत्यु दर की समीक्षा के दौरान यह चिंताजनक तथ्य सामने आया कि पिछले तीन महीनों में छ
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9 जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालबर्रा में ग्राम टेंगनीकला की प्रियंका पति राकेश, 16 जुलाई को जिला अस्पताल बालाघाट में लिंगा की यशवंती पति लक्ष्मण कावरे और बैहर के ग्राम नवलपुर की मंगलो पति गोलुराम धुर्वे की मौत हुई। इसके अलावा, 10 अगस्त को कोकना की दुर्गावती पति तारेश, 16 अगस्त को अर्जुननाला कटंगी की सरिता पति छमनलाल कुमरे और 4 सितंबर को बालाघाट मयूर नगर की येमेश्वरी पति ललित बसेरा की भी सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी।
कलेक्टर ने महिलाओं की मौतों पर चिंता जताई
कलेक्टर मीणा ने इन मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि प्रसव के दौरान इन माताओं की मौत हुई थी, वहीं जिला चिकित्सालय बालाघाट और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताया और कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर मीणा ने सभी चिकित्सकों को निर्देश दिए कि जिला अस्पताल में भर्ती किसी भी प्रसूता महिला को निजी अस्पताल जाने की नौबत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निजी अस्पताल में उपचार के दौरान गर्भवती महिला की मौत होती है, तो संबंधित अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि गर्भवती माताओं को निजी अस्पतालों में जाने के लिए मजबूर न होना पड़े।
कलेक्टर ने डॉक्टरों को जिम्मेदारी से काम करने को कहा
कलेक्टर ने डॉक्टरों से सेवाभाव और जिम्मेदारी के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि काम का दबाव हर क्षेत्र में होता है, लेकिन सभी अपनी इच्छा से लोकसेवा देने के लिए इस क्षेत्र में आए हैं। उन्होंने चिकित्सकों को मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करने और उनके उपचार में अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करने को कहा, ताकि जिला चिकित्सालय की आमजन में एक अच्छी छवि बन सके।
उन्होंने निर्देश दिए कि गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल लाने 108 संजीवनी एम्बुलेंस के लिए कॉल करें। संजीवनी-108 एम्बुलेंस के सपुरवाईजर को सख्त निर्देश दिये गए कि आशा कार्यकर्ता का कॉल मिलते ही तत्काल एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराए। यदि समय पर एम्बुलेंस की सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर मीणा ने सिविल सर्जन को निर्देशित किया कि अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के साथ गलत व्यवहार करने वाले और रुपयों की मांग करने वाले स्टॉफ को तत्काल बाहर करें और उनके स्थान पर अन्य लोगो को नियुक्त करें।
