मिशन कर्मयोगी के तहत संभल में कल्कि संवाद: स्वामी कृष्णानंद बोले- मनुष्य को निस्वार्थ भाव से समाज के कल्याण के लिए करना चाहिए काम – Sambhal News h3>
फिरोज अली | संभल12 मिनट पहले
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संभल में भारत सरकार की मिशन कर्मयोगी योजना के तहत कल्कि संवाद का चौथा सत्र आयोजित किया गया। मंगलवार को शिव मंदिर, बरेली सराय में एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कर्मयोगी स्वामी कृष्णानंद झा ने गीता ज्ञान के माध्यम से जीवन और अध्यात्म के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
स्वामी कृष्णानंद झा ने कहा कि ईश्वर का विराट स्वरूप संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। उन्होंने बताया कि यही तत्व ग्रहों, पृथ्वी, देश, समाज, परिवार और प्रत्येक व्यक्ति के भीतर भी मौजूद है। स्वामी झा के अनुसार, जब मनुष्य को यह अनुभव होता है कि हर जगह ईश्वर ही है, तब उसके भीतर से ईर्ष्या, द्वेष और भेदभाव जैसे नकारात्मक भाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
उन्होंने जीवन को वृक्ष की तरह परोपकारी बनाने की प्रेरणा दी। स्वामी झा ने समझाया कि जिस प्रकार वृक्ष स्वयं धूप सहकर दूसरों को छाया प्रदान करता है और अपने फल का उपभोग स्वयं नहीं करता, उसी प्रकार मनुष्य को भी निस्वार्थ भाव से समाज के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।
मुख्य वक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि ईश्वर ने मानव रूप प्रदान करते समय किसी जाति, वर्ण या किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया। इसलिए, समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव करना ईश्वरीय सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने सभी कर्मों को ईश्वर को समर्पित भाव से करने की सलाह दी, जिससे जीवन में सहजता, शांति और संतुलन बना रहता है।
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कार्यक्रम का संयोजन अमित पवार ने किया। जबकि अध्यक्षता टीकाराम भगत ने की और संचालन बब्लू सिंह ने संभाला। इस सत्र के दौरान, श्रोताओं द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर स्वामी झा ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के माध्यम से दिए। उपस्थित लोगों ने इस सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया।
इस अवसर पर नीलू भगत, मन्नी लाल, लेखराज, सीताराम भगत, हरिओम, रवि मुनीम, सजन सुरेश, राम अवतार, रोशन लाल, विजय सिंह सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में, सभी उपस्थित जनों ने समाज में सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
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फिरोज अली | संभल12 मिनट पहले
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संभल में भारत सरकार की मिशन कर्मयोगी योजना के तहत कल्कि संवाद का चौथा सत्र आयोजित किया गया। मंगलवार को शिव मंदिर, बरेली सराय में एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कर्मयोगी स्वामी कृष्णानंद झा ने गीता ज्ञान के माध्यम से जीवन और अध्यात्म के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
स्वामी कृष्णानंद झा ने कहा कि ईश्वर का विराट स्वरूप संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। उन्होंने बताया कि यही तत्व ग्रहों, पृथ्वी, देश, समाज, परिवार और प्रत्येक व्यक्ति के भीतर भी मौजूद है। स्वामी झा के अनुसार, जब मनुष्य को यह अनुभव होता है कि हर जगह ईश्वर ही है, तब उसके भीतर से ईर्ष्या, द्वेष और भेदभाव जैसे नकारात्मक भाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
उन्होंने जीवन को वृक्ष की तरह परोपकारी बनाने की प्रेरणा दी। स्वामी झा ने समझाया कि जिस प्रकार वृक्ष स्वयं धूप सहकर दूसरों को छाया प्रदान करता है और अपने फल का उपभोग स्वयं नहीं करता, उसी प्रकार मनुष्य को भी निस्वार्थ भाव से समाज के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।
मुख्य वक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि ईश्वर ने मानव रूप प्रदान करते समय किसी जाति, वर्ण या किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया। इसलिए, समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव करना ईश्वरीय सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने सभी कर्मों को ईश्वर को समर्पित भाव से करने की सलाह दी, जिससे जीवन में सहजता, शांति और संतुलन बना रहता है।
कार्यक्रम का संयोजन अमित पवार ने किया। जबकि अध्यक्षता टीकाराम भगत ने की और संचालन बब्लू सिंह ने संभाला। इस सत्र के दौरान, श्रोताओं द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर स्वामी झा ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के माध्यम से दिए। उपस्थित लोगों ने इस सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया।
इस अवसर पर नीलू भगत, मन्नी लाल, लेखराज, सीताराम भगत, हरिओम, रवि मुनीम, सजन सुरेश, राम अवतार, रोशन लाल, विजय सिंह सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में, सभी उपस्थित जनों ने समाज में सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।




