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बांस के सूप पर मिथिला पेंटिंग बनाते समस्तीपुर के कुंदन: लंदन, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से आया डिमांड, एक की कीमत 2000 रुपए – Samastipur News

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बांस के सूप पर मिथिला पेंटिंग बनाते समस्तीपुर के कुंदन:  लंदन, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से आया डिमांड, एक की कीमत 2000 रुपए – Samastipur News

बांस के सूप पर मिथिला पेंटिंग बनाते समस्तीपुर के कुंदन: लंदन, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से आया डिमांड, एक की कीमत 2000 रुपए – Samastipur News

बांस के सुप पर पेंटिंग बनाते हैं यूथ मोटीवेटर कुंदन कुमार।

समस्तीपुर में यूथ आईकॉन कुंदन कुमार आस्था का महापर्व छठ मे अर्घ्य देने के लिए बांस के सूप पर मिथिला पेंटिंग उकेर रहे हैं। जब उन्होंने पिछले दिनों बांस के सूप पर मिथिला पेंटिंग बनाकर अपने सोशल साइट पर पोस्ट किया, इसके बाद इन्हें ताबड़तोड़ ऑर्डर आने लग

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ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड सिंगापुर और लंदन से भारतीय मूल के लोगों ने सूप का डिमांड किया है। सिडनी से भारतीय मूल के लोगों ने 16 सूप का डिमांड किया। शहर की एक डॉक्टर के सहयोग से ऑस्ट्रेलिया सूप पहुंच चुका है। कुंदन बताते हैं कि बांस के सूप पर पहली बार वह मिथिला पेंटिंग बना रहे हैं।

इसके लिए वह मात्र 2 हजार रुपए ले रहे हैं। जबकि विदेश में सूप भेजने के लिए करीब 8 से 10 हजार खर्च आ रहा है। विदेश से ऑर्डर करने वाले लोग खर्च खुद वहन कर रहे हैं।

बांस के सूप पर बना मिथिला पेंटिंग

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बांस को वंश का प्रतीक माना जाता है

कुंदन बताते हैं की महापर्व छठ में बांस से बने सूप का धार्मिक महत्व है। बांस को लोग वंश बढ़ाने का प्रतीक भी मानते हैं। जिस कारण आधुनिकता के बीच जहां बाजार में तांबा और पीतल के सूप उपलब्ध हैं। वहीं लोग कम से कम एक सूप तो बांस का चढ़ते ही हैं।

उन्होंने मिथिला पेंटिंग को विस्तार देने के उद्देश्य से सूप पर मिथिला पेंटिंग बनाकर एक शुरुआत की। लेकिन जिस तरह से भारत के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के द्वारा आर्डर दिए जाने लगे। उन्हें इस कारोबार में अच्छे स्कोप दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार उन्होंने लेट से शुरुआत की थी।

लेकिन जिस तरह से विदेशों में इसकी मांग बढ़ी है अगली बार वह पहले से इसकी शुरुआत करेंगे आने वाले 1 साल के दौरान इस क्षेत्र में नए युवाओं को भी जोड़कर उन्हें रोजगार परख बनाएंगे ताकि उन्हें भी रोजगार मिल सके।

बांस के सूप पर मिथिला पेंटिंग करते कुंदन।

मगरदही पेंटिंग को विश्व पटल पर लाने की योजना

कुंदन बताते हैं कि मिथिला पेंटिंग को लोग मधुबनी पेंटिंग के नाम से भी जानते हैं। उनकी भाभी योजना है कि वह मगरदही मोहल्ला में रहते हैं। वह मोहल्ले के अधिकतर घरों की महिला और युवाओं को यह कला सीखा कर उन्हें रोजगार परख बनाना चाहते हैं , ताकि लोग मिथिला पेंटिंग को मगरदही पेंटिंग के रूप में भी जानने लगें।

8 सालों में कुंदन को मिले 100 से ज्यादा अवॉर्ड

कुंदन ने बताया कि ‘मैं बचपन से ही मिथिला पेंटिंग बना रहा हूं। पिछले 8 सालों में मुझे 100 से ज्यादा अवॉर्ड मिल चुके हैं। इनमें सरकारी, गैर सरकारी, राज्य स्तर और नेशनल स्तर पर मिला सम्मान शामिल है। ‘बताया कि ‘मेरी पेटिंग को विदेशी स्तर पर भी पहचान मिली है और इसमें सोशल मीडिया का बड़ा रोल है।

मेरी मिथिला पेंटिंग लंदन, अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड तक गई है। इसके अलावा भी अन्य जगहों से मेरी पेटिंग की डिमांड आती है।’ ‘हाल ही मेरी बनाई गई एक पेटिंग नेशनल म्यूजियम के लिए सिलेक्ट हुई । नेशनल म्यूजियम की ओर से मेरी पूरी बायोग्राफी के साथ पेंटिंग को वहां लगाया गया।’ जो पेंटिंग 30 हजार रुपए में बिकी है।

कलर ब्लाइंडनेस के शिकार हैं कुंदन

कुंदन सब देख सकते हैं, लेकिन उन्होंने कभी इंद्रधनुष नहीं देखा। न नीला आसमान देखा और न उन्होंने सिंदूरी रंग में डूबी कभी कोई शाम देखी। कुंदन ने दुनिया को सिर्फ दो ही रंगों में देखा है। ब्लैक और वाइट। यानी उनकी दुनिया काले और सफेद रंग की ही है। उन्हें कलर ब्लाइंडनेस है।

कुंदन बताते हैं कि ‘कलर ब्लाइंडनेस की समस्या के बारे में उनके मां-पिताजी को बहुत बाद में पता चला। कुंदन बताते हैं, वह लाल, हरा, गुलाबी, भूरा, कत्थई, मरून, नीला आदि रंग को ठीक से नहीं देख पाते। कलर ब्लाइंडनेस जैसी कोई बीमारी भी होती है, यह मेरे मां-पिताजी शुरू में नहीं जानते थे।’

सूप पर बनाया गया मिथिला पेंटिंग।

संस्कृति मंत्रालय ने पेंटिंग पर किया ट्वीट

कुंदन ने बताया कि उनकी पेंटिंग्स कई मंचों पर सराहा गया है। टोक्यो ओलिंपिक्स और भारतीय एथलीटों को समर्पित उनकी पेंटिंग ने सबका दिल जीता था। संस्कृति मंत्रालय ने उनकी इस पेंटिंग को ट्वीट भी किया था। समस्तीपुर के मगरदही रहने वाले कुंदन ने बताया, ‘ऐसा नहीं है कि एक बार में ही वह परफेक्ट चित्र बना लेते हैं, गलतियां होती हैं।

कई बार गलत रंगों का इस्तेमाल हो जाता है। रंगों के सही शेड नहीं पकड़ पाता। लेकिन मेरी गलतियां सुधारने के लिए मेरे पास मेरी पत्नी और बहन हैं। वे मुझे बताते हैं कि मैं सही जा रहा हूं या नहीं।’

बचपन से ही पेंटिंग करना पसंद था

कुंदन ने एमबीए किया है। कुछ दिनों तक नागपुर में नौकरी भी की है। करीब 8 साल पहले नौकरी छोड़कर वह गांव लौटे और तब से मिथिला पेंटिंग कर रहे हैं। कुंदन बताते हैं कि एमबीए करने के बाद मैं नागपुर में नौकरी कर रहा था। मैंने इसी दौरान एक पेंटिंग प्रतियोगिता में भाग लिया और मेरी पेंटिंग को लोगों ने बहुत पसंद किया। बस तभी से मेरा मनोबल बहुत बढ़ गया।

कुंदन बताते हैं कि मुझे बचपन से ही पेंटिंग करना पसंद था। फिर पारिवारिक परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वापस घर लौटना पड़ा और आज वह यहीं रहकर कई लोगों को पेंटिंग सीखा रहे हैं। मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में नए ऐसे लोग जो इसे करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए उन्होंने कहा है कि हर क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है, बस उसमें पूरी तरह से अपने आप को झोंकने की जरूरत है, मंजिल मिल ही जाती है।

कुंदन के नाम गोल्डेन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज

कुंदन बताते हैं कि ‘मेरी एक मिथिला पेंटिंग जो कोविड वैक्सिनेशन पर बेस्ड थी, उसे स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय व इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्री जीबेश कुमार, कई अन्य मंत्रालय, मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, एंबेसी ऑफ इंडिया इन चाइना की ओर से लगातार शेयर कर लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया गया था।’

कोरोना में बनाई गई इस पेटिंग के लिए कुंदन का नाम गोल्डेन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था।

कुंदन को मिले अवॉर्ड की लिस्ट

भारत श्री, रविंद्रनाथ टैगोर सम्मान, लियोनार्डो दा विंची अवॉर्ड, स्टार इंटरनेशनल, तिलका मांझी सम्मान, सिद्धू कान्हू सम्मान, बिहार शौर्य सम्मान, अरूण सम्मान, बिहार गौरव, यूथ आइकॉन, भारत लीडरशिप अवॉर्ड, कलाम यूथ लीडरशिप अवॉर्ड, समस्तीपुर रत्न, यंग इंडिया चेंज मेकर-पीपुल्स च्वॉइस अवॉर्ड, कला और संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड ने ऑनरेरी डॉक्टरेट की मानक उपाधि से कुंदन को सम्मानित किया जा चुका है। उद्योग सम्मान 2025 से भी इन्हें बिहार सरकार ने सम्मानित किया है। स्पेस से लॉटरी सुनीता विलियम की मछली रूपी मिथिला पेंटिंग बनाकर इन्होंने काफी शोहरत पाया था।

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