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ब्लैकबोर्ड- तंग आकर घाघरा-चोली आग में फेंक दी: लोग लड़की समझकर पीछा करने लगते थे; तब बताना पड़ता कि ‘भाई, मैं मर्द हूं’

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ब्लैकबोर्ड- तंग आकर घाघरा-चोली आग में फेंक दी:  लोग लड़की समझकर पीछा करने लगते थे; तब बताना पड़ता कि ‘भाई, मैं मर्द हूं’

ब्लैकबोर्ड- तंग आकर घाघरा-चोली आग में फेंक दी: लोग लड़की समझकर पीछा करने लगते थे; तब बताना पड़ता कि ‘भाई, मैं मर्द हूं’

‘मेरे भीतर एक औरत थी। शुरुआत से ही। दुनिया क्या कहेगी, लोग क्या कहेंगे, यह सब सोचकर मैं चुप रह जाती थी। फिर एक दिन मैंने तय कर लिया कि अपने भीतर की औरत को सजाना है, संवारना है और दुनिया के सामने निखारना है। मैंने महिलाओं से घाघरा-चोली मांगे और फेयर ए

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फिर एक शादी प्रोग्राम में मैंने गिद्दा डांस किया। औरत बनकर। पंजाब में ये डांस बहुत मशहूर है। महिलाएं घेरा बनाकर नृत्य करती है। जैसे पुरुष भांगड़ा करते हैं, वैसे ही महिलाएं गिद्दा डांस करती हैं। मैंने तो बस मजाक-मजाक में डांस किया था, लेकिन लोगों ने इतनी तालियां बजाई कि ये काम मेरे जीवन में रच-बस गया। आज मैं इस डांस पर अनगिनत किताबें लिख सकता हूं।

मेरी सजावट, श्रृंगार और डांस देखकर कई लोग तो समझ ही नहीं पाते थे कि मैं मर्द हूं या औरत। डांस खत्म होने के बाद कई लड़के मेरे पीछे लग जाते थे। उन्हें लगता था कि कोई महिला डांसर है। मुझे उन्हें चीख-चीखकर समझाना पड़ता था कि भाई मैं महिला नहीं पुरुष हूं। कुछ लोग तो ऐसे थे जब उन्हें पता चला कि मैं महिला नहीं पुरुष हूं, तो मुझे मारने दौड़ पड़े। कहने लगे कि मर्द होकर हिजड़ों वाला काम करता है। छक्का है तू।’

ब्लैकबोर्ड में इस बार कहानी गिद्दा डांस करने वाले पुरुष डांसरों की, जिन्हें लोगों के तरह-तरह के ताने मिलते हैं, लेकिन नूर ज़ोरा जैसे डांसरों ने साबित किया कि हुनर की महिला-पुरुष वाली कोई हद नहीं होती।

पंजाब के गिद्दा डांस को फिर से पॉपुलर बनाने वाले नूर ज़ोरा। वह अभी एक प्राइमरी स्कूल में सरकारी टीचर भी हैं।

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पंजाब में महिलाओं के डांस गिद्दा को दोबारा से लोकप्रिय करने जोरावर सिंह उर्फ नूर जोरा अभी एक प्राइमरी स्कूल में सरकारी टीचर हैं। वो कहते हैं कि मुझे गिद्दा करते-करते 30 साल हो गए हैं। दरअसल, कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है। मेरी लाइफ कुछ ऐसी ही रही है। बहुत कुछ छूटा, लेकिन हासिल जो है, वो है- नूर जोरा।

अपने घर से बात शुरू करता हूं। मेरे घर में कभी कोई गिद्दा नहीं करता था। हां, पापा जरूर गीत लिखते और गाते थे। शायद मेरी आवाज में जो मिठास है, वो उन्हीं के कारण है। मेरे परिवार ने गिद्दा डांस के लिए हमेशा साथ दिया। भगवान को भी शुक्रिया कहूंगा कि उसने मुझे कला दी और मैंने इसे लगन से किया। सच तो यह है कि वो बहुतों को कला का इनपुट देता है, लेकिन हर कोई आउटपुट नहीं दे पाता।

पहली बार जब गिद्दा किया, तब नहीं सोचा था कि इसमें इतना आगा बढ़ूंगा। दरअसल, गांव में दोस्त की शादी थी। सभी को कुछ-न-कुछ काम दिया गया था। किसी को बिस्तर इकट्ठा करने का काम, किसी को सजावट का, लेकिन उस दिन मैंने कुछ भी करने से मना कर दिया और कहा कि आप लोगों को आज एक अलग चीज करके दिखाऊंगा।

प्लान सीक्रेट रखा। 2-3 दोस्तों को साथ लिया। गांव की औरतों से घाघरा-चोली और दुपट्टा लिया। अपने घर पर फेयर एंड लवली क्रीम से मेकअप किया। इसके बाद जाकर उस शादी में गिद्दा किया। ‘लोगों ने खूब तालियां बजाईं। उस दिन तो बस मजाक-मजाक में गिद्दा कर लिया था, लेकिन उसके बाद जो सफर शुरू हुआ, उस पर किताब लिखी जा सकती है।

सच ये है कि मेरे अंदर एक औरत थी, उसे तराशा, ग्लैमराइज, चैनेलाइज किया और लोगों के आगे रख दिया। उसके बाद लोगों ने मुझे गले लगा लिया, लेकिन पहले ही दिन से लोगों ने मुझे नहीं अपनाया। मेकअप करके जब डांस करता तो चार लोग तारीफ करते, तो उन्हीं में से कुछ लोग ये भी कहते- ‘ये क्या कर रहा है? दाढ़ी, मूंछ मुंडवाकर औरत बन गया है?’

यही नहीं, इस दौरान जिन लोगों गिद्दा डांस सिखाया, उन्हीं लोगों ने बड़ा धोखा दिया। वे मेरा प्रोग्राम डिस्टर्ब करने लगे। कार्यक्रम में आकर शोर मचाते और लोगों को मेरे खिलाफ भड़काते। एक बार तो इतना परेशान हुआ कि लगा कि सिर फोड़ लूं। उस दिन मैंने अपनी घाघरा-चोली और विग आग में फेंक दी थी।

उसके बदा उन लोगों ने तय किया कि वे मुझे गिद्दा ग्रुप से निकाल देंगे। उन्हें डर था कि नूर ज़ोरा कहीं उनकी जगह न ले ले, लेकिन मैंने ठान लिया था कि जब तक नौकरी नहीं मिलती, गिद्दा करना नहीं छोड़ूंगा। आखिर प्राइमरी स्कूल में सरकारी टीचर के लिए मेरा सिलेक्शन हो गया। लेकिन अभी नौकरी ज्वाइन करने में एक महीने बाकी थे। तभी उन लोगों ने वखरा नाम से नया गिद्दा डांस ग्रुप बना लिया। लेकिन मैंने भी उन्हें चैलेंज दिया था कि चलो देखते हैं। मैं आज भी गिद्दा करता हूं। लोग मुझे जानते और पहचानते हैं। लेकिन उन लोगों की चर्चा कोई नहीं करता।

एक बार मुझे किसी ने गिद्दा देखने के लिए एक कार्यक्रम में बुलाया। वहां लड़कियों के बीच बैठकर गिद्दा देख रहा था। अचानक एक शख्स आया और मेरा हाथ पकड़कर वहां से बाहर कर दिया। उसने झुंझलाकर कहा, ‘लड़कियों के बीच तू क्या कर रहा है?’ दुखी होकर वापस लौट आया था।

इसी तरह एक कॉलेज में लड़कियों को गिद्दा सिखाने जाता था। मेरे एक दोस्त ने बोला- तुम उनमें से किसी को मेरी फ्रेंड बनवा दो। उस दिन मेरी आंखें नम हो गई थीं।

किसी ने एक बार मुझसे कहा कि जो मर्द हाथों में चूड़ियां पहन ले, वो लोगों के बीच बात करने के लायक नहीं रहता। उस दिन दिल को बहुत चोट पहुंची थी।

स्कूल में जिन बच्चों को पढ़ाता हूं, जब उनके मां-बाप को पता चला कि मैं गिद्दा करता हूं तो उन्होंने मुझसे हैरानी से पूछा, ‘मास्टर जी, ये सब क्या करते हैं आप?’

दरअसल, इस समाज में किसी लड़के के लिए लड़की बनकर काम करना आसान नहीं, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी- मेरा नूर वैसे ही चमकता गया, जैसे लोहे को पीट-पीटकर उसकी चमक निखरती है। इन्हीं परेशानियों से लड़कर आज नूर जोरा हूं।

नूर कहते हैं- दिसंबर 2014 में सोशल मीडिया पर लोकरंग नाम का एक पेज बनाया और उस पर एक वीडियो डाला। वीडियो को बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला। उसके बाद दुनियाभर के लोगों के फोन आने लगे। सोशल मीडिया पर मुझे गिद्दा करते देख लड़कियों में भी रश्क हुआ। उन्हें लगा कि अगर एक लड़का गिद्दा कर सकता है, तो हम क्यों नहीं। फिर गिद्दा, जिसका प्रचलन कम होने लगा था, अचानक चर्चित होने लगा। आखिर मैं एक जरिया बना हूं, जिसकी वजह से खत्म होता गिद्दा बच गया।

नूर ज़ोरा के घर में एक तस्वीर। वो कहते हैं कि मैंने शादी खो दी है। अक्सर जब शादी की बात चलती, तो मुझे रिजेक्ट कर दिया जाता। कुछ लड़कियां तो मुझे खुद भी पसंद नहीं आईं।

हमने कभी गिद्दा के नाम पर गंदगी नहीं परोसी। पहले दिन से ही क्लियर था कि गिद्दा करने के लिए हमेशा घरेलू महिलाओं की वेशभूषा अपनाऊंगा। उसे ही अपनाया। कभी कोई चीटिंग नहीं की। दरअसल, गिद्दा मेरे लिए एक पूजा की तरह है।

मेरी वेशभूषा पर कई बार लड़के कन्फ्यूज हो गए। वे हमें तंग करने की कोशिश करते। हमारे गले पड़ जाते, तो बोलना पड़ता- ‘भाई हम मर्द हैं, औरत नहीं। हमारे अटायर यानी वेश-भूषा पर मत जाओ।’

अपने पहले ऑस्ट्रेलिया ट्रिप के बारे में नूर बताते हैं कि जुलाई में टूर था, लेकिन मां फरवरी में हमें छोड़कर जा चुकी थीं। उसके बाद भाई बीमार चल रहा था, लेकिन मेरे ऑस्ट्रेलिया जाने को लेकर बहुत खुश था। 1 जुलाई को हम ऑस्ट्रेलिया पहुंचे। वहां 8 जुलाई को मेरा पहला प्रोग्राम था, लेकिन 4 जुलाई को ही मेरे भाई की भी मौत हो गई। उस दिन न रो सकता था और न किसी को रुला सकता था। चाहकर भी उसका अंतिम दर्शन नहीं कर पाया।

डेढ़ महीने बाद ऑस्ट्रेलिया का टूर खत्म करके वापस आया, तो घर में कोई खुशी नहीं थी।

नूर कहते हैं कि पहले परिवार में बहन, बड़ा भाई, मां-बाप थे, लेकिन अब खुशी बांटने वाला कोई नहीं बचा था। बस भाभी और भतीजे हैं। उदास होकर वो बताते हैं कि जब आप कामयाब होते हैं और परिवार मौजूद होता है तो खुशी चौगुनी हो जाती है।

लेकिन हां, कुछ हासिल करने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है। मेरे साथ भी यही हुआ है। मैंने शादी का मौका खो दिया है। अक्सर जब भी किसी से मेरी शादी की बात चलती, तो मुझे रिजेक्ट कर दिया जाता। कुछ लड़कियां शादी को तैयार हुईं तो मुझे पसंद नहीं आईं।

एक कार्यक्रम में जाने के लिए सज-धजकर तैयार नूर ज़ोरा। इस रूप में इन्हें भांप पाना मुश्किल है कि वो पुरुष हैं। वो कहते हैं कि उनके परिवार में उनकी बहन, बड़ा भाई, मां-बाप थे, लेकिन अब इनमें से कोई उनकी खुशी बांटने के लिए नहीं बचा है।

नूर की तरह ही पंजाब के नाभा के रहने वाले 30 साल के क्रिस्टल भी पिछले 16 साल से गिद्दा कर रहे हैं। वो भी नूर ज़ोरा की टीम में हैं। क्रिस्टल कहते हैं कि कॉलेज के समय से ही गिद्दा करता आ रहा हूं। शुरुआत में तो घर वालों से छिप-छिपाकर गिद्दा करता था, लेकिन धीरे-धीरे सबको पता चल गया।

जब सबको पता चला तो सबसे पहले रिश्तेदार नाराज हुए। उन्होंने मुझे और घर वालों को ताने देने शुरू कर दिए और आखिर में दूरी बना ली। दरअसल, एक लड़का होकर लड़कियों के डांस फॉर्म को अपनाना बड़ा मुश्किल काम है। लोगों के ताने सुनने पड़ते हैं, परिवार के लोग भी सवाल-जवाब करते हैं।

शुरुआत में क्रिस्टल घर वालों से छिप-छिपाकर गिद्दा डांस करते थे, लेकिन धीरे-धीरे सबको पता चल गया। इसके बाद रिश्तेदारों के ताने सुनने को मिले। फिर उन्होंने सबसे दूरियां बना लीं।

एक बार की बात बताता हूं। एक शो में गिद्दा करने गया था। वहां मेरे एक कजिन ने मुझे देख लिया और पीछा करते-करते मेरे चेंजिंग रूम तक आ गया। उसे देखकर हैरान रह गया था। उसने पूछा- ‘भैया आप ये क्या कर रहे हो? उसके बाद उसके मम्मी-पापा भी आ गए। वो भी मुझे देखकर चौंक गए। वहां तो उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन मेरे घर वालों को जाकर सब बता दिया।

घर लौटने पर मेरी मां ने मुझे बहुत डांटा। उन्होंने कहा- रिश्तेदारों ने तुम्हें डांस करते देखा है। ये अच्छा काम नहीं है। लड़का होकर लड़कियों वाला डांस क्यों करते हो? तुम्हें इतना पढ़ाने-लिखाने का क्या फायदा? ये काम छोड़ दो, कुछ और कर लो?

लेकिन उस दिन मां से साफ कह दिया था, ‘कुछ गलत नहीं कर रहा हूं। न नशा करता हूं, न चोरी, बस मेहनत करके कुछ पैसे कमा रहा हूं। जिस दिन मेरे रिश्तेदार मुझे रोज के हिसाब से एक हजार रुपए, यानी महीने के 30 हजार दे देंगे, उस दिन से इसे करना बंद कर दूंगा। अब मुझसे पढ़ाई-लिखाई नहीं होगी। अब से यही करूंगा।’

यही नहीं, मेरे कुछ दोस्तों को भी मेरा गिद्दा करना पसंद नहीं था। एक बार एक कार्यक्रम में उनसे मेरी बहस हो गई। उन्होंने कहा- तू ‘खुसरा’ और ‘छक्का’ है। वे मेरे घर गए और बताया कि मैं टोल प्लाजा और सड़क पर ‘छक्का’ बनकर नाचता हूं। पैसे कमाता हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे दोस्त ऐसी हरकत करेंगे। उस दिन उनसे हमेशा के लिए दोस्ती खत्म कर ली।

उसके बाद जब घर आया तो मेरी मम्मी ने मुझसे पूछा कि तू ये सब क्यों कर रहा है? उन्हें बड़ी मुश्किल से समझा पाया कि सिर्फ गिद्दा करता हूं और कुछ नहीं। सोशल मीडिया पर उन्हें अपने वीडियोज दिखाए, फिर उन्हें भरोसा हुआ। उस दिन मेरे दादाजी ने मेरा साथ दिया। उन्होंने घर में सभी से कह दिया कि कोई भी अब से मुझे कुछ नहीं कहेगा। मैं जो करना चाहूं, करूं। उसके बाद से घर वालों ने मेरा साथ देना शुरू कर दिया। मेरे दादाजी तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनकी बहुत याद आती है।

एक बार जालंधर के पास हम एक शो करने गए थे। शो खत्म होने के बाद हम वापस लौट रहे थे। रास्ते में एक ढाबे पर रुके। देखा तो हमारे पीछे कुछ लोग आए थे। वे गाड़ी से हमारा पीछा कर रहे थे। उसके बाद जब हम आगे जाकर अपने एक साथी को छोड़ने के लिए रुके, तो वे वहां तक पीछा करते हुए पहुंचे।

उनमें से एक लड़का हमारे पास आया और बोला कि हम आपसे बात करना चाहते हैं। मैंने कहा- बताइए क्या हुआ? वो मेरी आवाज सुनकर हैरान रह गया। उसने कहा कि ओह, मुझे लगा कि आप औरत हो। आप तो मर्द हैं। इस तरह कई बार लोग हमें देखकर महिला-पुरुष का फर्क नहीं कर पाते।

क्रिस्टल बताते हैं कि वे एक बार जालंधर के पास शो करने गए। शो के बाद टीम के साथियों के साथ वापस घर आ रहे थे, तो कुछ लोगों ने महिला समझकर गाड़ी से पीछा किया था।

अब गिद्दा की बात करूं तो आप 5-6 साल पीछे जाकर देखिए। इसका क्रेज नहीं बचा था। बस यह घरों तक सीमित रह गया था। सोशल मीडिया पर भी ये कम नजर आता था। हमारे साथी नूर जी ने सोशल मीडिया पर इसे पॉपुलर बना दिया है। अब तो हमें देखकर लड़कियां भी इसके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने लगी हैं।

यही नहीं, पहले डीजे पर गिद्दा कम होता था, अब तो डीजे बजता है तो उस समय भी गिद्दा खूब होने लगा है। दरअसल, घर से लेकर सोशल मीडिया तक गिद्दा को पहुंचाने में नूर जी का बड़ा योगदान है। हमें इस बात की खुशी है कि हमारा कल्चर प्रमोट हो रहा है।

हां, लेकिन सोशल मीडिया पर भी लोग हमारे वीडियो पर अक्सर गंदे कमेंट्स करते हैं। ‘जनाना’, छक्का, हिजड़ा कहते हैं, लेकिन अब हम इन बातों से ऊपर उठ चुके हैं।

हां, शादी को लेकर मुझे अक्सर ताने मिलते हैं। लोग कहते हैं- तूने तो अपना जेंडर ही बदलवा लिया है, अब शादी कैसे करेगा? तू गे तो नहीं है? उन्हें समझाता हूं कि भाई लड़का हूं। गिद्दा करता हूं, इसलिए लड़कियों जैसा बनाना पड़ता है। लंबे बाल, लंबे नाखून रखने पड़ते हैं। सजना-धजना पड़ता है। बावजूद इसके लोग हमें समझते नहीं।

सोचता हूं पता नहीं, जिससे मेरी शादी होगी, वो मेरे काम को किस तरह लेगी। लोग महिला-पुरुष के अलावा कुछ और नहीं समझना चाहते। कॉलेज गया तो वहां अपने जैसे दोस्त मिले, तो मेरे अंदर कॉन्फिडेंस आया। हुनर बाहर निकलकर आया।

50 साल के बिंदर पटियाला के रहने वाले हैं। वो भी गिद्दा डांस करते हैं। वो बताते हैं दरअसल, मेरे परिवार में मेरी पांच बहनें, चार भाई हैं। शुरुआत में घर में बहुत गरीबी थी। पापा आटे की चक्की पर काम करते थे और मां खेतों में मजदूरी। घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चलता था। गरीबी के कारण पढ़ाई नहीं कर सका। घर में सबसे छोटा होने के बावजूद बचपन से ही कमाना शुरू कर दिया। मां के साथ खेतों और लोगों के घरों में काम करता था। उसके साथ ही गिद्दा करता था।

पटियाला के रहने वाले 50 साल के बिंदर। वो बताते हैं कि शुरू में लोग लेडीज, जनाना बुलाते। कहते- इसके लक्षण ठीक नहीं हैं। गांव में किसी की शादी, त्योहार हो, गिद्दा करता तो अक्सर ‘छक्का’ और ‘हिजड़ा’ सुनने को मिलता, लेकिन वही लोग अब सैल्यूट करते हैं।

वो बताते हैं कि शुरुआत में बहुत दिक्कतें आईं। मेरे पिंड गांव के लोग बहुत बुरा कमेंट करते थे। वे लेडीज, जनाना बुलाते थे। कहते थे- इसके लक्षण ठीक नहीं हैं। गांव में किसी की शादी, त्योहार पर गिद्दा करता तो अक्सर ‘छक्का’ और ‘हिजड़ा’ कहा जाता। वे नहीं समझते कि डांस परमात्मा की देन होती है।

जब मेरी शादी हुई तो गिद्दा की बात पत्नी से छुपाई। उससे बताता कि वेटर का काम करता हूं, इसलिए क्लीन शेव रहना पड़ता है। लेकिन जब गिद्दा के लिए पहने जाने वाले कपड़ों से भरा बैग घर लाता, तो वो पूछती- ये सब क्या है? उस पर कहता कि शादियों में पंजाबी खाने के स्टॉल लगते हैं। उन पर औरत बनकर खाना परोसता हूं, लेकिन एक दिन घर पर सबको सच पता चल गया। उन्हें किसी ने बता दिया कि मैं नाचने का काम करता हूं। उसके बाद सभी ने गिद्दा करने से मना कर दिया। पत्नी और मां ने गिद्दा छोड़ने को कहा।

उस समय सोच रहा कि आखिर फिर क्या करूं? घर में गरीबी के कारण कई बार खाने को कुछ नहीं होता। उस समय लगता कि जहर खा लूं। भगवान से कहता कि जब कमाने का कोई जरिया नहीं दिया है, तो पैदा क्यों किया? फिलहाल, मैंने गिद्दा करना नहीं छोड़ा।

उसके बाद जब मेरी बेटी हुई तो मुझ पर फिर से गिद्दा न करने का दबाव बढ़ा। उस समय पत्नी कहती कि अब बेटी हो गई है, छोड़ दो गिद्दा करना। लोग बेटी से कहेंगे कि इसका बाप नाचता है। उस वक्त बहुत दुख होता था, लेकिन आज मेरी बेटियों की शादी हो चुकी है और वो खुश हैं।

एक बार हम एक गांव में डांस करने गए। वहां लड़कों ने शराब पी रखी थी। उन्होंने जबर्दस्ती मेरा हाथ पकड़ लिया। जब भागने की कोशिश की, तो उनमें से एक ने मेरी चोटी पकड़ ली। घाघरा पहना था। भाग नहीं पाया, गिर पड़ा। मेरी विग उस लड़के के हाथ में रह गई। उसके बाद उन्होंने मुझे बहुत मारा।

उस दिन मेरे गांव में हल्ला मच गया कि नाचने वाले मर्द की गर्दन काट दी गई है। फिर तो लोग मेरे घर पहुंचने लगे थे। पूछ रहे थे कि वो ठीक है? क्या हुआ? अब मेरे नाचने की खबर आस-पास के गांवों में भी फैल गई थी। मेरी काफी बदनामी हुई।

यही नहीं, मेरी बेटियों को भी नहीं छोड़ा। एक बार मेरे नगर नाभा में ही मेरे भांजे की शादी थी। बेटियों को पंजाबी लहंगे और ट्रेडिशनल ज्वेलरी दिलाई। उस दिन मेरे रिश्तेदारों ने कहा कि इसने तो अपनी बेटियों को भी नचार बना दिया है।

मेरे गांव के पढ़े-लिखे सरपंच भी मेरा मजाक उड़ाते। कहते- तेरे बाल इतने लंबे क्यों हैं? तूने जूड़ा क्यों बना रखा है? एक दिन पलट कर कहा दिया- ये मेरा शौक, मेरी मर्जी, आपको क्या दिक्कत है? अगर यही जूड़ा आपका बेटा बनाता तो आप उसे बहुत मॉडर्न, स्टाइलिश बताते।

यही नहीं, सोशल मीडिया पर भी मुझे खूब ट्रोल किया जाता है। मेरा रंग सांवला है। इस वजह से लोग तंज कसते है- ‘कितने गंदे हाथ हैं तेरे, जब मुंह ठीक कर लेता है, तो हाथ भी ठीक कर लिया कर’।

हालांकि, धीरे-धीरे मेरे काम ने सबकी बोलती बंद कर दी। जो लोग मेरा मजाक उड़ाते थे, अब वही सैल्यूट करते हैं। नूर सर के साथ पिछले 25 साल से काम कर रहा हूं। अब लोग मेरे काम को आर्ट कहते हैं और मुझे आर्टिस्ट। आज देश-विदेश में टूर करता हूं। अब जिस तरह से रहता, खाता हूं। वैसी जिंदगी मेरे पूरे खानदान में किसी ने नहीं जी है।

बस एक ही बात का गम है कि मां को कोई सुख नहीं दे पाया। गरीबी के कारण उनका आखिरी समय इलाज भी नहीं करा पाया। आज जब मेरे पास पैसे हैं, तो मां नहीं हैं! अगर वो होतीं, तो उनकी सारी ख्वाहिशें पूरी करता।

बिंदर कहते हैं आज बस एक ही बात का गम है कि मां को कोई सुख नहीं दे पाया। गरीबी के कारण उनका आखिरी समय इलाज भी नहीं करा पाया। आज जब मेरे पास पैसे हैं, तो मां नहीं हैं! अगर वो होतीं, तो उनकी सारी ख्वाहिशें पूरी करता।

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1- ब्लैकबोर्ड-56 की उम्र में 20 साल छोटे लड़के से शादी:देवर बोला, भाभी कहूं या बुआ; लोग तंज कसते हैं- देखो मां-बेटे जा रहे

56 साल की थी जब कनाडा में पति ने मुझे तलाक दे दिया। भारत लौटी तो बहुत परेशान थी। यहां मुझे अपने से 20 साल छोटे लड़के निखिल से प्यार हो गया। शादी के लिए जब हम तैयार हुए तो लोगों ने जमकर विरोध किया। निखिल की मां ने मुझसे कहा कि सोचो, अगर तुम्हारा लड़का 20 साल बड़ी लड़की से शादी करता तो तुम एक मां के तौर पर क्या करती? पूरी खबर यहां पढ़ें

2-ब्लैकबोर्ड- पति पीरियड्स में भी संबंध बनाता था:पीटकर दांत तोड़ा, दूसरी शादी भी 9 दिन चली; वृंदावन में कृष्ण भक्त महिलाओं की कहानियां

वृंदावन आकर रह रहीं हरियाणा की ज्योति बताती हैं- मायके में मेरे ताऊ के लड़के की शादी थी। अपने बेटे कार्तिक के साथ वहां जाने की तैयारी में लगी थी, लेकिन पति चाहते थे कि न जाऊं। जाने से एक दिन पहले वो रात में मेरे कमरे में आए और मुझे पीटने लगे। इतना मारा कि अधमरा कर दिया। कपड़े फाड़ दिए। गर्दन से पकड़ा और मुंह बेड में लड़ा दिया। मेरा एक दांत टूट गया और होंठ कट गए। खून से सारा कपड़ा भीग गया। वो पीरियड्स में भी मेरे साथ सेक्स करता था। आखिरकार मेरा तलाक हो गया। पूरी खबर यहां पढ़ें