सिरप 48.6% जहरीला…लेकिन रिपोर्ट सिर्फ- नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी की: जांच रिपोर्ट में खानापूर्ति, कंपनी को कोर्ट में मिल सकता है फायदा; अब तक हो चुकी 23 मौत – Bhopal News h3>
मध्यप्रदेश में जो कफ सिरप 23 बच्चों की मौत का कारण बना। जिसमें 48.6% जहरीला केमिकल निकला। उसकी रिपोर्ट में बड़ी चूक सामने आई है। मध्यप्रदेश फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के लैब एनालिस्ट ने इस जांच रिपोर्ट में कफ सिरप को नॉट ऑफ स्टेंडर्ड क्वालिटी (NSQ)
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विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे गंभीर मामलों की जांच रिपोर्ट में इस तरह की मामूली चूक दर्ज की जाती है तो इसका फायदा संबंधित दवा निर्माता कंपनी को कोर्ट में मिल जाता है।
बता दें कि एमपी एफडीए की जांच में सिरप कोल्ड्रिफ (Coldrif) में जहरीला डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 0.1% के बजाए 46.28% मिली।
ड्रग इंस्पेक्टर ने डाक से भेजा था सैंपल छिंदवाड़ा के ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा ने कफ सिरप के 29 सितंबर को सैंपल लेने के बाद खुद भोपाल पहुंचाने के बजाय डाक के जरिए फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के ऑफिस भेजे थे। FDA की लैब में जांच करने में ऐसी लापरवाही हुई कि स्टाफ ने इतने गंभीर मामले में जल्दी जांच करने के बजाय मनमर्जी से काम किया। बीच में दशहरे का अवकाश आया तो स्टाफ ने नियमानुसार छुट्टी भी मनाई। लेकिन, जांच करने में जो नियम लागू होते हैं उनकी परवाह नहीं की।
ड्रग इंस्पेक्टर और FDA के बजाय बीएमओ ने FIR क्यों कराई? बाजार में बिकने वाली प्राइवेट दवाओं की जांच और निगरानी का जिम्मा ड्रग इंस्पेक्टर और फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन का है। कफ सिरप से बच्चों की मौतों के मामले में छिंदवाड़ा के ड्रग इंस्पेक्टर और फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के जिम्मेदारों ने FIR नहीं कराई। बल्कि परासिया के बीएमओ से कंपनी और कफ सिरप प्रिस्क्राइब करने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
पुलिस की एसआईटी पहुंची, एमपी एफडीए तमिलनाडु नहीं गई छिंदवाड़ा, पांढुर्णा से लेकर बैतूल तक के 23 से ज्यादा बच्चों की अब तक मौतें हो चुकी हैं। मामले में देशभर में हाहाकार मचा हुआ है। इसके बावजूद मप्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की टीम तमिलनाडु में कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी की जांच पड़ताल करने नहीं पहुंची। मप्र पुलिस की एसआईटी ने तमिलनाडु में कंपनी के मुख्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
मंत्री ने तमिलनाडु सरकार को बता दिया दोषी इधर, एमपी के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने तमिलनाडु सरकार और वहां के अधिकारियों पर इस पूरे मामले का ठीकरा फोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सीएम डॉ. मोहन यादव खुद पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अभी जो बच्चे पीड़ित हैं हमारी पहली प्राथमिकता उनका सही इलाज कराने की है। अधिकारियों और डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। बच्चों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री जी ने की है।
मंत्री पटेल ने कहा कि इस प्रकरण में जितने भी दोषी हैं, कोई भी अपराधी बच न पाए, इसके लिए सरकार कटिबद्ध है। ये पूरा प्रकरण तमिलनाडु की एक फैक्ट्री की वजह से हुआ है। इसके लिए जितनी दोषी तमिलनाडु सरकार की पूरी व्यवस्था है, उस पर मीडिया ने उतना चिन्हित नहीं किया जितना किया जाना चाहिए था। क्योंकि इसमें मप्र सरकार के अधिकारी गण इतने दोषी नहीं हैं जितने अधिक दोषी तमिलनाडु सरकार की व्यवस्था है। क्योंकि दवा बनाने और लाइसेंस देने की व्यवस्था है वो स्टेट की है। और जिस स्टेट में दवाई बनती है और जब वह बाहर आती है तो उसकी क्वालिटी चेक करना। हर बैच का लैबोरेटरी में चेक होना अनिवार्य है।
मंत्री शिवाजी पटेल ने जहरीले सिरप के लिए तमिलनाडु सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
मंत्री बोले- तमिलनाडु सरकार ने लापरवाही की मंत्री ने कहा तमिलनाडु सरकार ने लापरवाही की है। तमिलनाडु के किन अधिकारियों ने लापरवाही की है। ये भी हमारे ध्यान में आया है। उसके लिए भी हम तमिलनाडु सरकार को लिख रहे हैं कि वो इस बात की जांच करें कि उनके प्रदेश में स्थित फैक्ट्री से ऐसी अमानक दवाई निकलकर बाहर कैसे आई? मप्र सरकार ने जो एफआईआर की है उसमें गिरफ्तारियां शुरू हो गई हैं। हमारी टीम तमिलनाडु में कंपनी के कर्ताधर्ताओं को गिरफ्तार करेगी।
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मध्यप्रदेश में 23 बच्चों की मौत का कारण बने कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली कंपनी की फैक्ट्री को तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को सील कर दिया। सरकार ने चेन्नई बेस्ड कंपनी के खिलाफ केस दर्ज करने की भी बात कही है। इधर, 23 बच्चों की मौत मामले में मध्यप्रदेश सरकार की बनाई विशेष जांच टीम (एसआईटी) भी तमिलनाडु पहुंची। पूरी खबर पढ़ें…
