रामपुर में चार नदियों का जलस्तर खतरे के निशान पर: रामगंगा, कोसी, पीलाखार और भाखड़ा में बाढ़ की आशंका, प्रशासन ने ग्रामीणों को किया अलर्ट – Rampur News h3>
शन्नू ख़ान | रामपुर11 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
रामपुर में चार प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष नहर खंड से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोसी नदी में स्थिति सबसे गंभीर है। कोसी नदी के रामनगर बैराज में 41,602 क्यूसेक पानी है। यह पूरी मात्रा डिस्चार्ज की जा रही है। दडियाल बांध पर वर्तमान गेज 207.40 मीटर है। यहां खतरे का स्तर 209.69 मीटर और हाई फ्लो लेवल 211.19 मीटर निर्धारित है।
कोसी के लालपुर वियर पर जलस्तर 192.32 मीटर पर है। यहां 2,559 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। खतरे का स्तर 195.23 मीटर और हाई फ्लो 197.03 मीटर है। पीलाखार नदी के केमरी बैराज पर गेज 179.22 मीटर है। यहां से 925 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। इस स्थान पर खतरे का स्तर 184.29 मीटर और हाई फ्लो 185.22 मीटर निर्धारित है।
भाखड़ा नदी के बिलासपुर पुल पर जलस्तर 189.28 मीटर पर पहुंच गया है। यहां खतरे का स्तर 191.76 मीटर और हाई फ्लो 192.68 मीटर है। जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क कर दिया गया है। उन्हें नदी की ओर जाने से मना किया गया है। सितंबर माह में जिले में बाढ़ की स्थिति बनना आम बात है।
इसमें 15000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। इसके अलावा रामगंगा नदी पर गंगापुर भोपतपुर में गेज 170.16 औरखतरे का स्तर 171.80 m है। इसमें पानी का स्तर 173.30 m है जो खतरे के निशान के बराबर है। इसमें 12800 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। वहीं रामगंगा नदी हुसैन गंज में गेज 194.20 है, जबकि खतरे का स्तर 196.36 मी है। यहां हाई फ्लो लेवल 198.15 मी है। इसमें भी पानी खतरे के निशान के बराबर बह रहा है। इसमें 12250 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है।
ग्रामीणों के माथे चिंता की लकीरें जिला प्रशासन ने इन नदियों के आसपास रहने वाले ग्रामीण को अलर्ट किया है और उन्हें नदियों के पास जाने से मना किया है। साथ ही अपने मवेशियों को भी ना ले जाने के लिए आगाह किया है, हालांकि स्थिति पूरी तरह प्रशासन की निगरानी और नियंत्रण में है। ग्रामीणों की अगर माने तो हर साल सितंबर माह में यहां बाढ़ के हालात होते हैं, जिससे नदियां कटान करती हैं। करीब दर्जन भर गांव इसकी जद में आते हैं, जिसके चलते जिला मुख्यालय से ग्रामीणों का संपर्क कट जाता है। रोजी-रोटी का संकट खड़ा होता है। मवेशियों को चराने में भी दिक्कत आती है।
उत्तर प्रदेश की और खबर देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – Uttar Pradesh News
शन्नू ख़ान | रामपुर11 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
रामपुर में चार प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष नहर खंड से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोसी नदी में स्थिति सबसे गंभीर है। कोसी नदी के रामनगर बैराज में 41,602 क्यूसेक पानी है। यह पूरी मात्रा डिस्चार्ज की जा रही है। दडियाल बांध पर वर्तमान गेज 207.40 मीटर है। यहां खतरे का स्तर 209.69 मीटर और हाई फ्लो लेवल 211.19 मीटर निर्धारित है।
कोसी के लालपुर वियर पर जलस्तर 192.32 मीटर पर है। यहां 2,559 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। खतरे का स्तर 195.23 मीटर और हाई फ्लो 197.03 मीटर है। पीलाखार नदी के केमरी बैराज पर गेज 179.22 मीटर है। यहां से 925 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। इस स्थान पर खतरे का स्तर 184.29 मीटर और हाई फ्लो 185.22 मीटर निर्धारित है।
भाखड़ा नदी के बिलासपुर पुल पर जलस्तर 189.28 मीटर पर पहुंच गया है। यहां खतरे का स्तर 191.76 मीटर और हाई फ्लो 192.68 मीटर है। जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क कर दिया गया है। उन्हें नदी की ओर जाने से मना किया गया है। सितंबर माह में जिले में बाढ़ की स्थिति बनना आम बात है।
इसमें 15000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। इसके अलावा रामगंगा नदी पर गंगापुर भोपतपुर में गेज 170.16 औरखतरे का स्तर 171.80 m है। इसमें पानी का स्तर 173.30 m है जो खतरे के निशान के बराबर है। इसमें 12800 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। वहीं रामगंगा नदी हुसैन गंज में गेज 194.20 है, जबकि खतरे का स्तर 196.36 मी है। यहां हाई फ्लो लेवल 198.15 मी है। इसमें भी पानी खतरे के निशान के बराबर बह रहा है। इसमें 12250 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है।
ग्रामीणों के माथे चिंता की लकीरें जिला प्रशासन ने इन नदियों के आसपास रहने वाले ग्रामीण को अलर्ट किया है और उन्हें नदियों के पास जाने से मना किया है। साथ ही अपने मवेशियों को भी ना ले जाने के लिए आगाह किया है, हालांकि स्थिति पूरी तरह प्रशासन की निगरानी और नियंत्रण में है। ग्रामीणों की अगर माने तो हर साल सितंबर माह में यहां बाढ़ के हालात होते हैं, जिससे नदियां कटान करती हैं। करीब दर्जन भर गांव इसकी जद में आते हैं, जिसके चलते जिला मुख्यालय से ग्रामीणों का संपर्क कट जाता है। रोजी-रोटी का संकट खड़ा होता है। मवेशियों को चराने में भी दिक्कत आती है।
