पशुपालन विभाग: जूनोटिक बीमारियों की वजह- सेफ्टी टूल्स की कमी, टीके रखने की जगह नहीं – Jaipur News

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पशुपालन विभाग:  जूनोटिक बीमारियों की वजह- सेफ्टी टूल्स की कमी, टीके रखने की जगह नहीं – Jaipur News

पशुपालन विभाग: जूनोटिक बीमारियों की वजह- सेफ्टी टूल्स की कमी, टीके रखने की जगह नहीं – Jaipur News

पशुपालन विभाग के चिकित्सा कर्मियों का पिछले कुछ दिनों में कराई गई स्वास्थ्य की जांच में चौंकाने वाली बीमारियां निकली हैं। उनमें वैसी बीमारियां सामने आई हैं, जो पशुओं के संपर्क में रहने या पशुओं के टीकों के संपर्क में आने से हुई हैं। ये बेहद घातक हैं।

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करीब 300 कर्मचारियों की जांच में 100 से अधिक पीड़ित असल में सरकार ने अलग-अलग ब्लॉक के चिकित्सा कर्मियों की जांच के लिए पिछले दो माह पहले शिविर शुरू किए थे। मंगला पशु बीमा योजना में 21 लाख पशुओं का रजिस्ट्रेशन हुआ। 1 लाख ऊंट, 5 लाख भेड़ बकरी, बाकी गाय-भैंसा। दो जानवरों की एक यूनिट। 10 लाख पशुपालक हैं। इसमें 42 लाख का टारगेट यानी 21 लाख पशुपालक।

डिपार्टमेंट में करीब 15 हजार कर्मचारी हैं। इनमें से केवल जयपुर जिले के 7 ब्लॉक की जांच की गई, जिसमें करीब 300 लोगों की जांच में 100 से अधिक कर्मचारी ब्रूसेलोसिस, स्कब टाइफस, लैप्टोस्पायरोसिस बीमारी से पीड़ित निकले। ये तीनों जूनोटिक बीमारी हैं। जानवरों के नजदीक आने से फैलने वाली बीमारी। ब्रुसेलोसिस इनमें बेहद घातक है।

वजह यह भी संसाधन नहीं

असल में टीकाकरण के समय लगातार संपर्क में रहने, उपयोग आने वाली सिरिंज आदि का डिस्पोजल तरीके से नहीं हो रहा। विभाग इस पर गंभीर नहीं है। निडिल-सिरिंज कर्मचारी वहीं पटक कर आ रहे हैं, क्योंकि उनके पास संसाधन नहीं हैं।

सेफ्टी उपकरण नहीं

ग्लॉव्स, एप्रेन, प्रोटेक्टिंग ग्लास, सेनेटाइजर, पीपीई किट, गम बूट, वैक्सीन स्टोर व परिवहन की उचित व्यवस्था और डिस्पोजल की उचित व्यवस्था नहीं है।

नियमों की पालना नहीं

प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन भी नहीं किया जा रहा। पशु चिकित्सा संस्थाओं में संक्रमित कचरा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था नहीं है।

एडवाइजरी की पालना नहीं

राष्ट्रीय पशु रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीकाकरण के संबंध में केंद्र सरकार ने एडवाईजरी जारी की है। यहां उचित पालना नहीं की जा रही। इससे विभाग के कार्मिक, पशुपालक व आम जनता जूनोटिक बीमारियों संक्रमण हो रहे हैं।

नपुंसकता और गर्भपात की आशंका 100 फीसदी तक मेडिसिन विभाग के डॉ. श्रीकांत शर्मा का कहना है कि जूनोटिक बीमारियां पशुओं के संपर्क में आने या उनसे जुड़ी बीमारियों से मनुष्य में आता है। इससे कई बीमारियां जैसे ब्रुसेलोसिस, रेबीज, निपाह वायरस, लेप्टोस्पिरोसिस, एंथ्रेक्स आदि के लक्षण आते हैं। जो बेहद घातक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रुसेलोसिस से नपुंसकता की आशंका बढ़ती है। गर्भपात की आशंका 100 फीसदी तक रहती है। इनकी जांच होती नहीं, इसलिए कई दिन तक इस पर ध्यान नहीं देता, असली जांच तक पहुंच नहीं पाते, तब तक बीमारी की गंभीरता बढ़ती जाती है।

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