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कुबेरेश्वर धाम आयोजन में प्रशासन की सीधी चूक: गृह विभाग की गाइडलाइन का नहीं कराया पालन, नहीं थे जनसैलाब को कंट्रोल करने के इंतजाम – Bhopal News

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कुबेरेश्वर धाम आयोजन में प्रशासन की सीधी चूक:  गृह विभाग की गाइडलाइन का नहीं कराया पालन, नहीं थे जनसैलाब को कंट्रोल करने के इंतजाम – Bhopal News

कुबेरेश्वर धाम आयोजन में प्रशासन की सीधी चूक: गृह विभाग की गाइडलाइन का नहीं कराया पालन, नहीं थे जनसैलाब को कंट्रोल करने के इंतजाम – Bhopal News

सीहोर जिले के कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष के लिए पहुंचने वाली लाखों लोगों की भीड़ और कांवड़ यात्रा में उमड़े जन सैलाब को कंट्रोल करने के मामले में सीहोर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने गृह विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन नहीं कराया है। आयोजक और प्रशासन

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एक साल पहले गृह विभाग द्वारा जारी एसओपी में सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रबंधन और समुचित सुरक्षा पर फोकस करने के लिए पुलिस अधीक्षक, पुलिस आयुक्त नगरीय क्षेत्र भोपाल, इंदौर और सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए थे। गृह सचिव गौरव राजपूत ने 4 जुलाई 2024 को जारी निर्देशों में साफ कहा है कि ऐसे आयोजनों के दौरान अव्यवस्था, भगदड़ और अन्य दुर्घटनाओं की स्थिति रोकने के लिए गाइडलाइन का कड़ाई से पालन कराया जाए।

14 बिन्दुओं की गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि आयोजन के पूर्व आयोजकों द्वारा हर 500 व्यक्तियों की भीड़ पर समुचित सेवादारों का प्रबंध किया जाए। इन सेवादारों के अलावा पुलिस प्रशासन भी अपने बल से भीड़ और भगदड़ रोकने के लिए प्रभावी नियंत्रण करेगा। कुबेरेश्वर धाम में इसकी कमी साफ दिखी है। यहां के मुख्य सेवादार विनय मिश्रा और सहयोगियों के अनुसार उनके पास 140 सेवादार हैं जो लाखों की भीड़ के हिसाब से नाकाफी हैं।

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प्रवेश-निकासी के लिए श्रद्धालुओं की संख्या तय होनी चाहिए

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बड़े धार्मिक आयोजनों में आने वाली भीड़ को कंट्रोल करने के लिए आने-जाने के रास्तों की व्यवस्था मजबूत रखने के साथ बैरिकेटिंग के लिए भी कहा गया है। साथ ही आमने-सामने से आ रहे लोगों की भीड़ रोकने के लिए भी प्रबंध करने को कहा गया है। एसओपी में यह भी कहा गया है कि संकरे प्रवेश और निकास मार्गों की स्थिति में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तय कर प्रवेश निकासी कराई जाए, लेकिन कुबेरेश्वर धाम में इस तरह का कोई इंतजाम नहीं है। जिसे जहां से रास्ता मिला चल दिया। इससे अव्यवस्था की स्थिति बनती जा रही है।

आने-जाने के लिए अलग रूट होना था, एक ही रूट से आवागमन

गाइडलाइन में यह कहा गया है कि जहां भी कार्यक्रम हों वहां आने-जाने के लिए अलग-अलग मार्ग होना चाहिए और महिला व पुरुष की अलग लाइन होना चाहिए। अगर आने-जाने का एक ही द्वार है तो अस्थायी द्वार बनाकर खतरे को कम करना है। इसका भी कुबेरेश्वर धाम में पालन नहीं हो रहा है। यहां एक ही गेट और जिससे लोगों का आना और जाना है। अस्थायी द्वार की व्यवस्था नहीं की गई है।

भीड़ का प्रेशर रिलीज करने इंतजाम नहीं, पार्किंग भी नाकाफी

धार्मिक आयोजन स्थल पर आपात स्थिति में भगदड़ रोकने के लिए आपातकालीन द्वार और प्रेशर रिलीज पाइंट बनाने की बात भी एसओपी में कही गई है लेकिन इसका भी कोई प्रबंध कुबेरेश्वर धाम में नहीं रहा है। गाइडलाइन में कहा गया है कि यहां आयोजन हो वहां पर यातायात प्लान और पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था होनी चाहिए। कुबेरेश्वर धाम लाखों लोग लाखों वाहन से पहुंचे हैं लेकिन पार्किंग के इंतजाम न होने से अफरा तफरी मचती रही है। इस मामले में प्रशासन के इंतजाम भी नाकाफी साबित हुए हैं।

उपहार वितरण का समुचित इंतजाम नहीं, अफसर रोक नहीं पाए

एसओपी में यह भी कहा गया है कि उपहार, भोजन, प्रसाद, कम्बल आदि के मुफ्त वितरण के दौरान भगदड़ रोकने के लिए इंतजाम होना चाहिए। अधिक भीड़ होने पर सामग्री के वितरण पर प्रतिबंध लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर की ओर से निर्देश दिए जाने को कहा गया है लेकिन सीहोर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक इस स्थान पर बांटे जा रहे रुद्राक्ष के वितरण को लेकर बन रही अव्यवस्था पर कंट्रोल नहीं कर पाए हैं। एसओपी में साफ कहा गया है कि बड़े आयोजनों में सांप, बम आदि अफवाहों से होने वाली भगदड़ की स्थिति को रोकने के लिए पर्याप्त लाउडस्पीकर, ध्वनि यंत्र होने चाहिए जो यहां की भीड़ के हिसाब से नाकाफी है।

मेडिकल टीम भी नाम मात्र, कांवड़ यात्रा में न फर्स्ट एड न एम्बुलेंस

आयोजन स्थल पर चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था के निर्देश हैं। ऐसे स्थानों पर डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाना है मौके पर एम्बुलेंस भी दवाइयों के साथ रखने के लिए कलेक्टरों को निर्देश हैं लेकिन यहां उमड़ी भीड़ के हिसाब से यह प्रबंध भी नहीं है। यहां एक अस्पताल बनाया गया है जहां दो डॉक्टर्स हैं, लेकिन ये दवा लिखने के अलावा कोई चिकित्सकीय सुविधा नहीं दे पाते हैं। यहां निकाली जा रही कांवड़ यात्रा में भी अव्यवस्था का आलम है। यात्रा के समय रास्तों में कोई भी फर्स्ट एड सुविधा, एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं देखी गई। लोग परेशान होकर भटक रहे हैं।

मूलभूत सुविधाओं की भी भीड़ के मुताबिक पूर्ति नहीं

ऐसे आयोजन स्थल पर बिजली, पानी की सुविधा के साथ फायर अलार्म सिस्टम भी मजबूत रखने के निर्देश हैं, लेकिन कुबेरेश्वर धाम के भीतर और बाहर मौजूद भारी भीड़ के हिसाब से यह इंतजाम नाकाफी दिखाई देते हैं। एसओपी में यह भी कहा गया है कि ऐसे आयोजन स्थलों पर सीनियर अफसरों की विजिट होनी चाहिए और हर स्थिति का आकलन कर अव्यवस्था की स्थिति न बनने देने वाले प्रबंध कराना चाहिए। सीहोर, एसपी और कलेक्टर की इस मामले में भी चूक सामने आ रही है।

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कुबेरेश्वर में रुद्राक्ष बंटते ही मची थी भगदड़:श्रद्धालु बोले- न सिक्योरिटी है न सुविधा, सड़क पर नहाने के भी 50 रुपए लेते हैं

हम परिवार के साथ पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने यहां आए थे। यहां कोई सुविधा नहीं है। कोई सिक्योरिटी नहीं है। रुद्राक्ष बंटना शुरू हुआ तभी भगदड़ मच गई। चारों तरफ जो ये बिल्डिंग बनी हैं, ये बिजनेस के लिए हैं या जनता के लिए? यहां तो रोड पर नहाने तक के 50 रुपए लेते हैं।’ सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में यूपी के मेरठ से आई सूरज बाई गुस्से में आकर ये बात कहती हैं। यहां मंगलवार को जब भगदड़ में दो महिलाओं की मौत हुई तब वे वहीं थीं। बदइंतजामी को लेकर ऐसा ही गुस्सा दूसरे लोगों में भी है। भारी भीड़ जुटने की जानकारी के बावजूद न प्रशासन ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की न कुबेरेश्वर धाम से जुड़े लोगों ने। नतीजा- दो मौतें। पूरी खबर पढ़ें…

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