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गांव में हाथ काटा, जंगल में वही हाथ खाया: वॉट्सएप पर वीडियो डालकर बोले- जो विधायकी लड़ेगा, उसका यही होगा; बेहरा मर्डर केस पार्ट-2

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गांव में हाथ काटा, जंगल में वही हाथ खाया:  वॉट्सएप पर वीडियो डालकर बोले- जो विधायकी लड़ेगा, उसका यही होगा; बेहरा मर्डर केस पार्ट-2

गांव में हाथ काटा, जंगल में वही हाथ खाया: वॉट्सएप पर वीडियो डालकर बोले- जो विधायकी लड़ेगा, उसका यही होगा; बेहरा मर्डर केस पार्ट-2

25 मार्च 2019, ओडिशा का धकोटा गांव। रात करीब 8 बजे पूर्व कांग्रेस नेता रामचंद्र बेहरा पत्नी और दोनों बेटियों के साथ डिनर कर रहे थे। तभी गांव के पांच लोग, संजीव प्रुस्टी, अजीत, अरुण, अलेख और पुरण आए। सभी ने बेहरा के पैर छुए और बोले- ‘कल से तो आप बीजेड

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सभी चाय-नाश्ता करते हुए बातें करने लगे। दो घंटे बाद वो लोग चले गए। कुछ ही देर में फिर लौटकर आए और बाहर से आवाज दी- ‘बेहरा साहब, कुछ और लोग आपसे मिलना चाहते हैं, बाहर आ जाइए।’

बेहरा जैसे ही घर से बाहर निकले, उन लोगों ने लाठियां बरसानी शुरू कर दी। फिर अरुण नाम के शख्स ने तलवार निकाली और बोला- ‘विधायकी लड़ने का बहुत शौक है न। आज सारे शौक पूरे हो जाएंगे।’, उसने तलवार से बेहरा का बायां हाथ काट दिया। चारों तरफ खून फैल गया। हाथ कटकर जमीन पर गिर गया।

चीखें सुनकर बेहरा की पत्नी और बेटियां बाहर आईं तो कातिलों ने उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी।

फिर उन लोगों ने भाला उठाया और बेहरा के पेट, छाती हर जगह घोंप दिया। बेहरा जोर-जोर से चीख रहे थे। अजीत ने तलवार उठाई और दाहिनी हथेली भी काटकर अलग कर दी। फिर बारी-बारी से दोनों पैर काट दिए।

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बेहरा को अधमरी हालत में छोड़कर संजीव, अजीत और प्रमोद वहां से भाग गए। जाते हुए वो लोग बेहरा के कटे हुए हाथ भी साथ ले गए।

इधर, बेहरा की पत्नी प्रसांती और बेटियां मीनारानी, देबजानी करीब एक घंटे बाद उन्हें लेकर आनंदपुर हॉस्पिटल पहुंचीं। वहां डॉक्टर से जो हो सका वो इलाज करके कटक के लिए रेफर कर दिया।

दैनिक NEWS4SOCIALकी सीरीज ‘मृत्युदंड’ में बेहरा मर्डर केस के पार्ट-1 में इतनी कहानी तो आप जान ही चुके हैं। आज पार्ट-2 में आगे की कहानी…

एंबुलेंस में रामचंद्र बेहरा को लेकर सभी कटक के लिए निकल गए। अभी आधे रास्ते ही पहुंचे थे कि बेहरा का शरीर ठंडा पड़ने लगा। कुछ देर में गर्दन लटक गई।

देखते ही बेहरा की पत्नी प्रसांती चीखते हुए अपनी बेटी से बोली- ‘पापा के शरीर में कोई हलचल नहीं है। शरीर बर्फ की तरह ठंडा पड़ गया है।’

एंबुलेंस में बैठी नर्स ने बेहरा की नब्ज चेक की, दोनों आंखें खोलकर देखीं। फिर धीमी आवाज में बोली- ‘अब कटक ले जाने का कोई फायदा नहीं। इनकी सांसें थम चुकी हैं।’ प्रसांती और दोनों बेटियां फूट-फूटकर रोने लगीं। बड़ी बेटी अपने पिता की लाश को झकझोरने लगी। कुछ देर बाद सभी बेहरा की लाश को लेकर वापस गांव धकोटा लौट आए।

उधर, संजीव, प्रमोद और अजीत मोटरसाइकिल पर सवार होकर बेहरा के कटे हुए हाथ लिए पूरे गांव में घूम रहे थे। पीछे-पीछे बाकी कातिल भी थे।

संजीव, प्रमोद और अजीत मोटरसाइकिल पर सवार होकर बेहरा के कटे हाथ लिए पूरे गांव में घूम रहे थे। स्केच: संदीप पाल

संजीव हर घर के पास से गुजरते हुए कटा हुआ हाथ दिखाकर सभी को धमका रहा था- ‘किसी ने भी रामचंद्र बेहरा का समर्थन किया या हमारे खिलाफ गवाही देने और यहां से विधायकी लड़ने की गलती की, तो उसका भी यही अंजाम होगा। उसका भी हाथ काटकर पूरे गांव में घुमाएंगे। बेहरा का जो हाल किया है, वही हाल तुम सभी का होगा। @#$%, हमारे नेता की जगह लेने वाला था।’ कहते हुए कुछ देर बाद सभी गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर जंगल की तरफ भाग गए।

तब तक बेहरा का कटा हुआ हाथ किसी लकड़ी की तरह सख्त और पूरी तरह से काला पड़ चुका था। सभी उस हाथ को लेकर जंगल पहुंच गए। संजीव ने अजीत से कहा- ‘तुम अपना मोबाइल निकालो और टॉर्च जलाओ। आज इसके हाथ को काटकर खाएंगे और वीडियो बनाएंगे। देखो, इसकी उंगलियां कैसे अकड़ गई हैं।’

सुनते ही अजीत ने बाकियों से कहा- ‘जल्दी से मोबाइल निकालकर टॉर्च जलाओ।’ सभी टॉर्च जलाने लगे। अजीत ने भी जेब से मोबाइल निकाला और कैमरा ऑन कर लिया। प्रमोद ने पहले कटे हुए हाथ को हवा में लहराया और फिर उसे खाने लगा। सभी वीडियो रिकॉर्ड करके एक-दूसरे के वॉट्सएप पर भेजने लगे और बोले- ‘जो विधायकी लड़ेगा, उसका यही होगा।’

प्रमोद ने बेहार के कटे हुए हाथ को खाते हुए वीडियो रिकॉर्ड करवाया फिर उसे वॉट्सएप पर शेयर भी किया। स्केच: संदीप पाल

इधर, रामचंद्र बेहरा के मर्डर की खबर फैलते ही घासिपुरा पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर मनोरंजन बिसी अपनी टीम के साथ धकोटा गांव पहुंच गए। सब-इंस्पेक्टर मनोरंजन बिसी ही इस केस के IO भी थे। गांव पहुंचकर IO बिसी ने देखा कि बेहरा के मेन गेट पर खून ही खून था। घास भी लाल हो चुकी थी। पुलिस ने फौरन पूरे एरिया को घेर लिया। फोरेंसिक टीम ने क्राइम सीन से खून से सनी चप्पल, ब्लड सैंपल और खून से सनी करीब 5 किलोग्राम मिट्टी और पत्थर समेटकर टेस्टिंग के लिए भेज दिए।

कुछ देर बाद पुलिस को बेहरा के घर के पास ही झाड़ियों के बीच खून से सनी तलवार और भाला मिला। पुलिस ने इसे भी रिकवर करके फोरेंसिक टेस्ट के लिए भेज दिया। तब तक बेहरा की लाश भी आ चुकी थी।

इंस्पेक्टर बिसी को देखते ही बेहरा की बेटी मीनारानी बिलख-बिलखकर रोने लगी। कहने लगी- ‘हमारी आंखों के सामने ही पापा को मार दिया। वो चीख रहे थे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की…।’

IO ने पूछा-‘उन्हें पहचानते हो क्या।’

‘हां साहब, वो 6 लोग थे। संजीव प्रुस्टी, अजीत प्रुस्टी, अरुण प्रुस्टी, अलेख प्रुस्टी, प्रमोद और पुरण बैतोई। सभी धकोटा गांव के ही रहने वाले हैं, BJD के कार्यकर्ता हैं। पापा को मारने के बाद भी वो सभी धकोटा गांव की तरफ भागे थे।’, आंसू को पोंछते हुए मीना बोली।

IO बिसी डायरी पलटते हुए बोले- ‘BJD से तुम्हारे पापा का क्या रिश्ता था?’

रुंधे गले से मीनारानी बोली- ‘पापा पहले कांग्रेस में थे। 2014 में उन्होंने पार्टी छोड़कर निर्दलीय विधायकी का चुनाव लड़ा था। वो घासिपुरा ब्लॉक के चेयरमैन भी रह चुके थे। इस बार MLC चुनाव में उन्हें BJDसे टिकट मिलने वाला था। 26 मार्च को वो BJD जॉइन करने वाले थे, उससे पहले ही मेरे पापा को मार दिया।’

IO ने फिर पूछा- ‘25 मार्च को क्या हुआ था?’

‘पापा, सुबह-सुबह केओंझर में BJD के नेता और कार्यकर्ताओं से मिलने गए थे। शाम को घर लौटे। फिर यहां भी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर अगले दिन की प्लानिंग में जुट गए कि सुबह कितनी गाड़ियां कार्यालय जाएंगी। कितने समर्थक जाएंगे।

रात करीब 8 बजे ये पांचों लोग घर आए। पापा ने उन्हें अंदर बैठाकर चाय-नाश्ता कराया। कुछ देर बातचीत करने के बाद वो लोग चले गए। तकरीबन 10 बजे वो लोग फिर लौटकर आए और पापा को बाहर बुलाया। फिर मेनगेट बंद करके लाठी, तलवार और भाले से हमला कर दिया।’ कहते-कहते मीना बेसुध होने लगी।

पुलिस ने मीना की बहन देबजानी से आगे की बातें पूछनी शुरू की। खुद को संभालते हुए देबजानी बोली- ‘जब हम दोनों भागते हुए मेन गेट पर पहुंचे, तो देखा उन लोगों ने पापा के हाथ-पैर तलवार से काट दिए। छाती और पेट पर भाला घोंप दिया।’

‘आप दोनों ने बचाने की कोशिश नहीं की?’, IO बिसी ने पूछा।

मीना फिर बोली- ‘कैसे बचाती? उन लोगों ने हम पर भी तलवार तान दी थी, कहने लगे जरा भी आवाज की तो जान से मार देंगे।’

मीनारानी से इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर से रोते हुए कहा- ‘उन लोगों ने हमारी आंखों के सामने पापा के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।’ स्केच: संदीप पाल

पुलिस ने सभी कातिल के खिलाफ धारा 302 यानी हत्या, 201 यानी सबूत मिटाने और 120-बी यानी आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी। पोस्टमॉर्टम हुआ तो पता चला कि कोहनी से नीचे का बायां हाथ और दूसरे हाथ का पंजा गायब था।

अगले दिन IO मनोरंजन बिसी की टीम ने धकोटा गांव के एक घर में पूछताछ शुरू की। सभी का यही कहना था- ‘हमें नहीं पता कल रात क्या हुआ, हम लोग तो सो रहे थे।’

पुलिस वापस रामचंद्र बेहरा के घर पहुंची और मीनारानी से बोली- ‘गांव में तो किसी ने कुछ देखा ही नहीं, सबका कहना है कि वो लोग सो रहे थे।’

मीनारानी फौरन बोली- ‘साहब, पापा मदद के लिए चीख रहे थे लेकिन कोई नहीं आया। वो जो सामने घर देख रहे हैं न, वो रंजीत गुप्ता का घर है। जिस रात पापा का मर्डर हुआ, हमने रंजीत से गाड़ी मांगने के लिए घंटों उसका दरवाजा पीटा, लेकिन कोई बाहर नहीं आया।’

इंस्पेक्टर कुछ सोचते हुए बोले- ‘कहीं रंजीत गुप्ता भी उन लोगों का साथी तो नहीं।’

मीना हैरान होकर बोली- ‘एक-दो दिन पहले पापा के कातिल संजीव, अरुण और अजीत, रंजीत के ऊपर वाले कमरे में थे। रंजीत वहां खड़ा होकर मेरे घर की तरफ इशारा करते हुए उन्हें कुछ बता रहा था।’

‘क्या आपके पापा की किसी से दुश्मनी थी?’, पुलिस ने सीधा सवाल पूछा।

सहमी हुई मीना बोली- ‘पापा तो घासीपुरा ब्लॉक के जाने-माने नेता थे। BJD जॉइन करने वाले थे। भला उनकी किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है। वो तो MLC का चुनाव लड़ने वाले थे।’

रंजीत गुप्ता वाली बात सुनते ही पुलिस का दिमाग ठनका। फौरन पुलिस रंजीत गुप्ता के घर पर छापेमारी करने पहुंच गई। पता चला कि रंजीत गुप्ता घर पर नहीं है।

पुलिस ने रंजीत के घरवालों से पूछताछ शुरू की। नाम बताने पर पता चला कि आरोपी में से तीन-चार लोग रंजीत के दोस्त हैं। घटना से एक-दो दिन पहले ही रंजीत के घर आए थे और बातचीत में बेहरा के घर के बारे में सब पूछ रहे थे। वो लोग जानना चाहते थे कि मेनगेट से बेहरा का डाइनिंग हॉल कितना दूर है? घर के किस कमरे में कौन सोता है?

अब पुलिस समझ चुकी थी कि पूरी प्लानिंग और रेकी करने के बाद कातिलों ने मर्डर किया है। हालांकि, पुलिस के सामने सवाल अभी भी वही था कि आखिर ये आरोपी कत्ल के बाद कहां भाग गए? बेहरा का एक हाथ गायब क्यों है? आखिर पुलिस ने कैसे सुलझाई इस केस की गुत्थी? पूरी कहानी बेहरा मर्डर केस पार्ट-3 में…

27 मार्च 2019 की सुबह। पुलिस रामचंद्र बेहरा के कातिलों को धकोटा गांव और आसपास के जंगलों में तलाश रही थी। कई घंटे बीत गए, लेकिन कातिलों का अता-पात नहीं था। गांव वाले भी कुछ बताने को तैयार नहीं थे। फिर पुलिस को एक मुखबिर ने बताया कि 25 मार्च की रात साढ़े 10 के करीब कुछ लोग मोटरसाइकिल से गांव वालों को धमकाते हुए जंगल की तरफ भागे थे। कहानी पढ़िए बेहरा मर्डर केस पार्ट-3 में

(यह सच्ची कहानी पुलिस चार्जशीट, कोर्ट जजमेंट, एडवोकेट अश्विनी मल्लिक, सब-इंस्पेक्टर मनोरंजन बिसी और बलिया बरिक, रामचंद्र बेहरा की बेटी मीनारानी और जर्नलिस्ट श्री कुमार मिश्रा से बातचीत पर आधारित है। सीनियर रिपोर्टर नीरज झा ने क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल करते हुए इसे कहानी के रूप में लिखा है।)