कानपुर में आर्टिस्ट ने फंदा लगाकर दी जान: सुसाइड नोट में लिखा-मैं अपनी कल्पनाओं की दुनिया में वापस जा रहा हूं… – Kanpur News

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कानपुर में आर्टिस्ट ने फंदा लगाकर दी जान:  सुसाइड नोट में लिखा-मैं अपनी कल्पनाओं की दुनिया में वापस जा रहा हूं… – Kanpur News

कानपुर में आर्टिस्ट ने फंदा लगाकर दी जान: सुसाइड नोट में लिखा-मैं अपनी कल्पनाओं की दुनिया में वापस जा रहा हूं… – Kanpur News

परिवार के साथ अभिषेक (चश्मे में) फाइल फोटो

मुझे माफ कर देना, सारी गलती मेरी है… मैं अपनी कल्पनाओं की दुनिया में वापस जा रहा हूं… सुसाइड नोट में यह बातें लिख कर कानपुर में एक आर्टिस्ट पंखे से फंदा लगा कर जान दे दी। सुबह मां ने कमरा खोला तो बेटे का शव फंदे से लटकता देख उनकी चीख निकल गई। मौके पर

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फांसी लगाने से पहले अभिषेक ने लिखा सुसाइड नोट

विजय नगर निवासी अभिषेक गुप्ता (24) मां माया गुप्ता व छोटे भाई अनुराग के साथ रहते थे। उनके पिता राजेश गुप्ता की करीब 8 साल पहले मौत हो चुकी है। पड़ोसी आशु मल्होत्रा ने बताया कि अभिषेक ने दो साल पहले कानपुर विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट का कोर्स किया था।

पोस्टमार्टम हाउस में घटना की जानकारी देते मृतक के दोस्त

शुक्रवार देर रात कमरे में लगाया फंदा

जिसके बाद उसकी लोहिया ग्रुप में आर्टिस्ट के पद पर नौकरी लग गई थी। छोटे भाई अनुराग ने बताया कि कल रात खाना खाने के बाद पूरा परिवार कमरे में सोने चला गया था। देर रात बड़े भाई ने आगे के कमरे में पंखे से फंदा लगा कर जान दे दी। सुबह मां अभिषेक को जगाने पहुंची तो उसका शव फंदे पर लटक रहा था।

बहन की शादी के बाद आज होनी थी पूजा

सूचना पर काकादेव पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतक के पास से सुसाइड नोट बरामद किया। परिजनों ने बताया कि फरवरी माह में अभिषेक की बहन कीर्ति की शादी हुई थी। जिसके बाद आज घर में पूजा होनी थी, जिसके लिए बेटी व दामाद घर आए थे।

अभिषेक की परिजनों ने कराई थी कांउसलिंग

मृतक के जीजा दिव्यांशु गुप्ता ने बताया कि अभिषेक काफी समय से परेशान चल रहा था, वह किसी को कुछ बताता भी नहीं था। जिसके बाद उसकी काउंसिलिंग भी कराई थी। वह कुछ समय पहले उनके पास दिल्ली भी आया था, जिस पर उसे काफी समझाया भी था। आज पूजा के कारण ससुराल आया था, सोचा था कि उसे दोबारा समझाएंगे।

सुसाइड नोट में लिखे आखिरी शब्द….

मुझे माफ कर देना सारी गलती मेरी है। मेरा परिवार निर्दोष है, उन्हें कुछ भी न करें… शायद इस दुनिया में कोई नहीं, जो मुझे समझ सके। मैं बस इतना चाहता हूं कि मेरी गलतियों की सजा मेरे परिवार को न दी जाए… उन्होंने कुछ भी नहीं किया है, सारी चीजें पहली जैसी हो जाएं… जैसे होती थीं… प्लीज मेरी ये लास्ट इच्छा पूरी कर दो। मै अपनी कल्पनाओं की दुनिया में वापस जा रहा हूं…

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