संवासिनी-कांड में सांसद रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ गवाही-जिरह आज: 24 साल पुराने केस की MP-MLA कोर्ट में सुनवाई, NBW के खिलाफ SC से राहत – Varanasi News h3>
विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए यदुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में संवासिनी प्रकरण में कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में धरना-प्रदर्शन व सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में आज सुनवाई हागी। सांसद रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ पिछली तारीख पर कैं
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बता दें कि राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ अब तक दो बार NBW जारी हो चुका है। जिसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी, कोर्ट ने सुनवाई तक अदालत में कार्रवाई पर रोक लगा दी है, सुरजेवाला को राहत तो मिली लेकिन कोर्ट हर बार उन्हें पेश करने का नोटिस दे रहा है।
पहले बताते हैं रणदीप सुरेजवाला पर कार्रवाई
वाराणसी में 24 साल पहले सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने जिला मुख्यालय पर चक्काजाम किया था। इसमें सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने में कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ केस दर्ज है। इसमें बहुचर्चित संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं को फर्जी ढंग से आरोपी बनाए जाने का आरोप लगा।
21 अगस्त 2000 को युवा कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला और प्रदेश अध्यक्ष एसपी गोस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता आयुक्त कार्यालय परिसर में जबरन घुस गए थे। कांग्रेस नेताओं ने आयुक्त कोर्ट में घुस कर हंगामा और तोड़फोड़ की थी। सूचना पर पुलिस सभी को शांत कराने गई, तो प्रदर्शनकारी उलझ गए थे।
पुलिस टीम ने बल प्रयोग किया, तो कांग्रेस कार्यकर्ता पथराव करते हुए भागने लगे। पुलिस ने मौके से रणदीप सिंह सुरजेवाला और एसपी गोस्वामी सहित कांग्रेस के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। केस दर्ज कर उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था।
संवासिनी कांड में मचा था हड़कंप
वाराणसी में बहुचर्चित संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इसमें रणदीप सुरजेवाला ने प्रदर्शन कर चक्का जाम किया था। इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज किया गया था।
बताया गया कि शिवपुर स्थित नारी संरक्षण गृह (संवासिनी गृह) की संवासिनियों से अनैतिक देह व्यापार की सूचना पर साल 2000 में सुर्खियां बटोरीं। संवासिनी गृह से भागी एक 12-13 साल की लड़की ने इस बात की सूचना दी, तो वाराणसी से लखनऊ तक प्रशासनिक फोन घनघनाने लगे।
जांच हुई और तत्कालीन एसीएम फोर्थ की रिपोर्ट पर 24 मई 2000 को एफआईआर दर्ज की, पुलिस के बाद मामले में सीबीआई ने जांच की और अंत में सभी को क्लीन चिट दे दी। रणदीप सुरजेवाला ने प्रदर्शन कर चक्का जाम किया था। इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज किया गया था।
तत्कालीन एएसपी जीके गोस्वामी को मिली थी विवेचना
अधिवक्ता संजीव वर्मा ने बताया कि मामले की विवेचना तत्कालीन एएसपी जीके गोस्वामी को दी गयी। उन्होंने विवेचना की,14 आरोपितों के खिलाफ अनैतिक देह अधिनियम में आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें कुछ नामचीन लोगों और पुलिस अधिकारियों को भी आरोपित किया गया था। इसमें बिजनेसमैन और सफेदपोश सामने आये थे। अधीक्षिका श्यामा सिंह को जेल भेज दिया गया था।
सरकारी संपत्ति को हुआ नुकसान, वकील बोले- नाम नहीं
पुलिस की तहरीर में साफ है कि सुरजेवाला के द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शन के दौरान उनके समर्थकों के द्वारा कथित तौर पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पथराव किया और लोक सेवकों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोका।
सुरजेवाला और अन्य के खिलाफ वाराणसी के कैंट थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। फिलहाल, सुरजेवाला के वकील का कहना है कि राज्यसभा सदस्य का नाम प्राथमिकी में नहीं है। गिरफ्तारी प्रपत्र और केस डायरी में भी उनका नाम नहीं है।
हाईकोर्ट खारिज कर चुका डिस्चार्ज अप्लीकेशन
लगभग 24 साल पहले चक्काजाम, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में दर्ज को रद्द करने की सुरजेवाला की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहले ही खारिज हो चुकी है। ADGC विनय कुमार सिंह की माने तो सुरजेवाला भी आरोपी हैं। उनकी पत्रावली की सुनवाई अलग चल रही है। उनकी ओर से अदालत में कई बार पत्रावली के स्पष्ट पठनीय कागजात उपलब्ध कराने के लिए अर्जी दी गई। कोर्ट की ओर से स्पष्ट पठनीय कागजात उपलब्ध भी कराया गया था।
कोर्ट ने सांसद को तारीख देकर तलब किया, कई तारीखों पर नहीं आने के चलते सांसद के खिलाफ दो बार NBW जारी किया। कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसमें NBW पर रोक लगाई गई।
रणदीप सिंह सुरजेवाला के मामले में अधिवक्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध पूर्व से ही सुरजेवाला के विरुद्ध कार्यवाहियों पर स्थगन आदेश पारित है। इसमें सूचीबद्ध होकर सुनवाई और आदेश विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट अग्रिम विधि कार्यवाही निष्पादित करने को कहा है।
