NEET फर्जीवाड़े में डॉक्टर, पैथोलॉजिस्ट सहित 3 गिरफ्तार: 10 लाख रुपए प्रति अभ्यर्थी हुई थी डील, 1.5 लाख रुपए तक लिया गया था एडवांस – Patna News h3>
NEET में फर्जीवाड़ा करने वाले बेगूसराय जेल के सरकारी डॉक्टर, डॉ. रंजीत और DMCH में सफाईकर्मी रहे दरभंगा निवासी सेटर रामबाबू मल्लिक को पुलिस ने समस्तीपुर और अररिया से गिरफ्तार किया है। टेलीग्राम पर NEET पेपर लीक नाम से ग्रुप बना कर ठगी करने वाले पैथोलॉ
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फैज, 6 अभ्यर्थियों से प्रश्न पत्र पहले देने के नाम पर पैसा ले चुका था। पुलिस इस मामले में बिहार के एक दर्जन से ज्यादा जिलों में छापेमारी कर रही है। फिलहाल पुलिस की अलग-अलग टीम इन तीनों के अलावा 7 से 8 लोगों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में कई जानकारियां पुलिस को मिली हैं।
जांच में यह बात सामने आई है कि रंजीत और रामबाबू ने सभी से 10-10 लाख प्रति अभ्यर्थी रेट तय किया था। एडवांस के रूप में सभी से 1 से 1.5 लाख रुपए लिया गया था। बाकी पैसा रिजल्ट आने के बाद देना था। वहीं स्कॉलर को 4 लाख में डील किया गया था।
रंजीत और रामबाबू का बंटा था काम
पुलिस ने समस्तीपुर के विभूतिपुर के रहने वाले डाॅ. रंजीत कुमार और दरभंगा के लहेरियासराय के रहने वाले राम बाबू मल्लिक को गिरफ्तार किया है। रंजीत की दोस्ती राम बाबू से मेडिकल पढ़ाई के दौरान ही हुई थी। पिछले 5 साल से दोनों मिलकर जालसाजी कर रहे थे। रंजीत अभ्यर्थियों को लाता था। मेडिकल के कई छात्र रंजीत के संपर्क में हैं।
वहीं रामबाबू स्कॉलर बनने वाले डॉक्टर की व्यवस्था करता था। रामबाबू और उसके ग्रुप के लोगों का बिहार और बिहार के बाहर के मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स से संपर्क है। यह गैंग मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स को पैसों का लालच देकर आसानी से स्कॉलर बनने के लिए तैयार कर लेते हैं।
रामबाबू, मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स को पैसों का लालच देता था।
डाॅ. रंजीत छुट्टी लेकर कर रहा फर्जीवाड़ा
डाॅ. रंजीत बेगूसराय जेल में सरकारी डॉक्टर है। यहां वह 2022 से कार्यरत है। फर्जीवाड़े के लिए रंजीत को समस्तीपुर जाना था। जांच में यह बात सामने आई है कि रंजीत 3 अप्रैल से छुट्टी पर था। रंजीत परीक्षा के दो दिन पहले से ही अपने कैंडिडेट्स को मैनेज कर रहा था। गिरफ्तारी के समय रंजीत के मोबाइल से 6 अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड, आधार कार्ड, फोटो और हस्ताक्षर मिले थे। पुलिस मुख्यालय के इनपुट पर समस्तीपुर SP ने SIT का गठन किया। SIT ने कार में बैठ कर फर्जीवाड़ा करते रंजीत और रामबाबू को गिरफ्तार कर लिया।
पटना के बड़े माफिया से जुड़ रहे तार
परीक्षा माफिया स्कॉलर के रूप में हमेशा मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर के छात्रों को चुनते हैं। इस मामले में सभी स्कॉलर की व्यवस्था रामबाबू के जिम्मे था। रामबाबू DMCH में सफाईकर्मी था। बाद में इसने नौकरी छोड़ दी। पिछले एक साल से वह बेरोजगार था।
रामबाबू के पिता सुरेश मल्लिक दरभंगा मेडिकल कॉलेज में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी थे। वो तीन महीने पहले ही रिटायर हुए हैं। DMCH में ही रामबाबू की पहचान एक बड़े परीक्षा माफिया से हुई। उसने स्कॉलर की व्यवस्था की। पुलिस को इस माफिया का नाम मिल गया है, लेकिन पुलिस जांच में असर पड़ने के कारण नाम सार्वजनिक नहीं कर रही है।
टेलीग्राम के जरिए फर्जीवाड़ा करने वाला पैथोलॉजिस्ट गिरफ्तार
पुलिस मुख्यालय के इनपुट पर अररिया पुलिस ने NEET का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देने वाले एक पैथोलॉजिस्ट फैज को गिरफ्तार किया है। फैज मूलतः इस्लामनगर का रहने वाला है। गिरफ्तार फैज ने इसके लिए टेलीग्राम पर @MeBldur नाम से अकाउंट बना कर 6 अभ्यर्थियों से पैसा ठग लिया है। फैज ने UPI के माध्यम से अपने पंजाब नेशनल बैंक के खाता में पैसा लिया है।
पुलिस ने संबंधित पंजाब नेशनल बैंक से इस खाता का डिटेल मांगा है। पुलिस इस खाते को फ्रिज भी कर सकती है। साइबर थानाध्यक्ष सह DSP रजिया सुलताना ने बताया कि फैज NEET का पेपर परीक्षा से पहले देने का झांसा देकर लोगों से ठगी करता था।
बांगलादेश के मेडिकल कालेज में लिया था एडमिशन
फैज ने बताया कि किसी कंसलटेंट के माध्यम से 2021 में बांग्लादेश के सिलहट में बने नॉर्थ ईस्ट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया। फिर इसने कुछ और बच्चों का एडमिशन कराया। इसमें इसको कुछ पैसे मिले। इसका लालच बढ़ गया। इसी बीच NEET पेपर लीक की खबर की जानकारी के बाद फैज भारत आ गया। भारत में फैज ने NEET का पेपर उपलब्ध कराने का झांसा देने का काम शुरू कर दिया। लोगों को दिखाने के लिए फैज पैथोलॉजिस्ट का भी काम करता था।
गिरफ्तार रंजीत और रामबाबू के साथ पुलिस की टीम।
कैसे हुई गिरफ्तारी
पिछले कई परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इसको ध्यान में रखते हुए इस साल NEET की परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी के कराने को लेकर पुलिस एक्शन में थी। दो दर्जन से ज्यादा परीक्षा माफिया, सेटर और उनके गैंग के कई सदस्यों का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर था। इनसे ही मिले इनपुट के आधार पर समस्तीपुर, बेगूसराय, आरा, छपरा सहित कई जिलों में छापेमारी की गई। इसी दौरान समस्तीपुर के बारे में पुलिस मुख्यालय ने इनपुट दिया।
