पूर्णिया में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन: विशाल पैदल मार्च निकालकर की नारेबाजी, मुसलमानों की अस्मिता के लिए खतरा बताया – Purnia News

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पूर्णिया में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन:  विशाल पैदल मार्च निकालकर की नारेबाजी, मुसलमानों की अस्मिता के लिए खतरा बताया – Purnia News

पूर्णिया में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन: विशाल पैदल मार्च निकालकर की नारेबाजी, मुसलमानों की अस्मिता के लिए खतरा बताया – Purnia News

वक्फ संशोधन बिल के विरोध में लोगों ने घंटों तक प्रदर्शन किया।

पूर्णिया के रौटा प्रखंड में वक्फ संशोधन बिल के विरोध में बुधवार देर दोपहर विशाल पैदल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया गया। मार्च में हजारों लोग शामिल रहे। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए सड़क पर उतरकर वक्फ संशोधन बिल के विरोध में घंटों प्रदर्शन किया। पैदल

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इसका नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र राजद पूर्णिया के जिला अध्यक्ष मोहम्मद बिस्मिल ने किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार के इस कदम को मुस्लिम विरोधी करार दिया।

वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते लोग

मुसलमानों की अस्मिता के लिए खतरा बताया

प्रदर्शन के दौरान मोहम्मद बिस्मिल ने अपने संबोधन में कहा कि वक्फ संशोधन बिल मुसलमानों की धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक पहचान पर सीधा हमला है। यह बिल हमारी सामूहिक धरोहरों को सरकारी कब्जे में लेने की साज़िश है। वक्फ संपत्तियाँ केवल इबादतगाह नहीं है बल्कि वे हमारे समाज के गरीब, अनाथ, विधवा और छात्रों की सहायता का माध्यम रही है। सरकार इन संपत्तियों को छीनकर उनका व्यवसायिक दोहन करना चाहती है। यह न केवल संविधान की आत्मा के खिलाफ है, बल्कि मुसलमानों की अस्मिता के लिए भी खतरा है।

इस बिल के जरिए सरकार वक्फ बोर्डों के अधिकार छीनकर उन्हें मात्र एक दिखावटी संस्था बनाना चाहती है। इसमें यह प्रावधान किया गया है, कि सरकार किसी भी वक्फ संपत्ति की जांच और अधिग्रहण कर सकती है, जिससे हमारे धार्मिक और सामाजिक संस्थानों की स्वायत्तता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार अल्पसंख्यकों के हितों को कुचलने का प्रयास कर रही है।

प्रदर्शनकारियों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

वक्फ संशोधन बिल को वापस लेने की मांग

प्रदर्शन में भाग लेने वाले सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने वक्फ संशोधन बिल की कई खामियों को सामने रखा। फैसल राज, यजदानी राज, मास्टर शाहबाबू, खुबैद रब्बानी, अशद रब्बानी, सालिक राज, मसरूर फैजी, फरहाद अनवर और तनजीम डाडला ने बताया कि बिल में वक्फ ट्रिब्यूनल्स की भूमिका सीमित कर दी गई है और विवादों को सामान्य अदालतों में भेजने का प्रावधान लाया गया है, जिससे मामलों के निपटारे में देरी और न्यायिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी। साथ ही समुदाय की राय लिए बिना वक्फ संपत्तियों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी अलोकतांत्रिक बताया गया। इस विशाल प्रदर्शन में राज ग्रुप फाउंडेशन की पूरी टीम सक्रिय रही।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि वक्फ संशोधन बिल को अविलंब वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया, तो देशभर में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। मुस्लिम समाज इस बिल को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा।

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