चित्तौड़गढ़ में आयुर्वेदिक हॉस्पिटल की बिल्डिंग का हाल बेहाल: बढ़ रही दीवारों में दरारें, 5 सालों से रिनोवेट की मांग, नहीं हुई कोई सुनवाई – Chittorgarh News h3>
चित्तौड़गढ़ जिला हॉस्पिटल परिसर में संचालित हो रहे आयुर्वेद हॉस्पिटल की हालत जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है।
चित्तौड़गढ़ जिला हॉस्पिटल परिसर में स्थित आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी हॉस्पिटल की बिल्डिंग जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। लेकिन रिनोवेट के लिए पिछले 5 सालों से लेटर लिखकर डिमांड करने के बावजूद भी कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा। आयुर्वेद विभाग का कहन
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जिला हॉस्पिटल के PMO को भी इसकी लिखित रूप से जानकारी दी गई, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस बिल्डिंग की खराब स्थिति इसके दीवारों में पड़ी दरारों में ही देखा जा सकता है। ऐसे में यहां कार्यरत, डॉक्टर, नर्स, कर्मचारी और आने वाले मरीजों पर भी खतरा हो सकता है।
कई सालों से दीवारों में पड़ रही दरारें केंद्र सरकार की 20 साल पहले शुरू की गई एक छत्र योजना के तहत जिला हॉस्पिटल परिसर में ही मरीज को एलोपैथिक के साथ-साथ आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई थी। इसलिए परिसर में बन की बिल्डिंग में इन 3 विभागों को शिफ्ट किया गया था। जिन मरीजों को आयुर्वेद या होम्योपैथिक का इलाज लेना है, उसे कहीं और जाने की जरूरत ना पड़े। जिला हॉस्पिटल में ही इसकी सुविधा मिल सके। पिछले 20 सालों से इसी बिल्डिंग में लगातार सभी सेवाएं एक साथ मिल रही है। अब धीरे-धीरे यह बिल्डिंग लगातार जर्जर हालत में पहुंच रही है। बिल्डिंग की यह हालत आज या कल से नहीं बल्कि 6-7 सालों से है। यहां संचालित हो रहे आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉक्टर सौरभ हाड़ा ने लगातार आयुर्वेद चिकित्सा विभाग को इस बिल्डिंग के जर्जर हालत के बारे में लिखित रूप से जानकारी दी। विभाग की ओर से सिर्फ एक ही जवाब आया कि इस बिल्डिंग की पजेशन तो विभाग के पास है, लेकिन इसके मरम्मत का मद विभाग के पास नहीं आता है। इसके रिनोवेट का खर्च सिर्फ जिला हॉस्पिटल के प्रशासन द्वारा किया जा सकता है।
दीवारों की दरारें बढ़ती जा रही है, ऐसी दरारें पूरी बिल्डिंग में है।
रिनोवेट करने का मद विभाग के पास नहीं आता आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. सौरभ हाड़ा ने बताया कि 2019 से वह यहां पर कार्यरत है। इसके बाद उन्होंने विभाग से इसके मरम्मत की भी मांग की है। लेकिन एक छत्र योजना के तहत संचालित बिल्डिंग को रिनोवेट करने का मद विभाग के पास नहीं आता है। इसके बाद उन्होंने जिला हॉस्पिटल के PMO को भी 2 बार लिखकर इसकी जानकारी देते हुए मरम्मत की मांग की है। लेकिन वहां से भी कोई रिस्पांस नहीं आया। यहां दीवारों की दरारें लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि यहां पर आयुर्वेद के 2 डॉक्टर, 1 नर्स, 1 कंपाउंड, 1 फोर्थ क्लास, यूनानी के 1 डॉक्टर, होम्योपैथिक के 1 डॉक्टर, 1 नर्स, 1 फोर्थ क्लास स्टॉफ काम करता है। यहां पर काफी मरीज भी रोज आते हैं। ऐसे में खतरे का डर हमेशा बना रहता है। लगातार कोशिश भी की जा रही है लेकिन कोई समाधान निकाल कर नहीं आ रहा है। डॉक्टर ने कहा कि कम से कम मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए उनके लिए हॉस्पिटल प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिए।
