कोटा में साढ़े 11 बजे बाद होलिका दहन मुहूर्त: शहर के अलग-अलग इलाकों में बनाई गई झांकिया, मंदिरों में कार्यक्रम – Kota News

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कोटा में साढ़े 11 बजे बाद होलिका दहन मुहूर्त:  शहर के अलग-अलग इलाकों में बनाई गई झांकिया, मंदिरों में कार्यक्रम – Kota News

कोटा में साढ़े 11 बजे बाद होलिका दहन मुहूर्त: शहर के अलग-अलग इलाकों में बनाई गई झांकिया, मंदिरों में कार्यक्रम – Kota News

कोटा शहर में होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा। पंचांग के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 28 मिनट से शुरू होगा जो कि रात 12 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। कुल 47 मिनट का यह शुभ समय दहन का होगा। शहर भर के अलग अलग इलाको, गली मोहल्लों पर होलिका दहन क

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पंचांग के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 28 मिनट से शुरू होगा जो कि रात 12 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।

बेहद खास है ये झांकिया

नयापुरा आदर्श होली संस्था अध्यक्ष राकेश कुमार राकू ने बताया कि इस झांकियों को बंगाली कारीगर के साथ स्थानीय कलाकार बनाते हैं। इस बार चार झांकिया बनाई गई है। इनमें प्रमुख महाभारत दृश्य की झांकी कृष्ण और अर्जुन की है। वहीं दूसरी झांकी में यूएस आर्मी के जवान, भारतीयों को हथकड़ी लगाकर भारत आने का दृश्य दर्शाया गया है। तीसरी झांकी भारतीय अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स को लेकर बनाई है। वह अंतरिक्ष में फंसी हुई है और उनकी वापसी की मांग की गई है। वहीं चौथी झांकी में वृद्धाश्रम हाउसफुल का संदेश है, किस प्रकार बच्चे माता-पिता को वृद्धाश्रम में रख रहे हैं। परिवार टूट रहे हैं और रिश्तों में दरार आ रही है।

आदर्श होली की झांकियां

टीलेश्वर महादेव मंदिर में महिलाएं होलिका की पूजा करने पहुंची।

एस्ट्रोलॉजर कविता जांगिड़ ने बताया कि होली जलाते समय या होली जलाने के बाद तीन परिक्रमा करने के पश्चात होलिका को दोनों हाथो से नमस्कार करके यह स्तोत्र बोलने से होलिका मनुष्य के सभी पापो को हर लेती है। होलिका जगन्माता बनके सर्वसिद्धियाँ प्रदान करती है सुखशान्ति प्रदान करती है। यह स्तोत्र को तीन परिक्रमा करने के बाद दोनों हाथो से नमस्कार करके होलिका के आगे पढ़ना चाहिए।

होलिका स्तोत्र पापं तापं च दहनं कुरु कल्याणकारिणि | होलिके त्वं जगद्धात्री होलिकायै नमो नमः || होलिके त्वं जगन्माता सर्वसिद्धिप्रदायिनी | ज्वालामुखी दारूणा त्वं सुखशान्तिप्रदा भव || वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च | अतस्त्वं पाहिनो देवि भूते भूतिप्रदा भव || अस्माभिर्भय सन्त्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः | अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव || त्वदग्नि त्रिः परिक्रम्य गायन्तु च हसंतु च | जल्पन्तु स्वेछ्या लोकाः निःशङ्का यस्य यन्मतम् ||

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