14 मार्च को होली के जुलूस का समय बदला: एडीसीपी पश्चिम की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई बैठक – Lucknow News

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14 मार्च को होली के जुलूस का समय बदला:  एडीसीपी पश्चिम की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई बैठक – Lucknow News

14 मार्च को होली के जुलूस का समय बदला: एडीसीपी पश्चिम की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई बैठक – Lucknow News

एडीसीपी को ज्ञापन देते लखनऊ व्यापार मंडल के पदाधिकारी

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) विश्वजीत श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें होलिकोत्सव जुलूस के समय में बदलाव को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

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बैठक में उपस्थित अधिकारी

बैठक में एडीसीपी धनंजय सिंह कुशवाहा, एसीपी चौक राजकुमार सिंह, इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय एवं चीफ वार्डेन लखनऊ अमरनाथ मिश्र उपस्थित रहे। इसके साथ ही होलिकोत्सव समिति चौक लखनऊ के अनुराग मिश्र, गोविंद शर्मा, ओम शर्मा, हरिश्चंद्र वंशीय होलिकोत्सव समिति राजाबाजार के संजीव रस्तोगी, चित्रांश रस्तोगी और चौपटिया होलिकोत्सव समिति के लक्ष्मीकांत पांडेय, रिद्धि गौड़ भी बैठक में शामिल हुए।

होलिकोत्सव जुलूस का समय बदला गया

बैठक में निर्णय लिया गया कि 14 मार्च 2025 को जुमे की नमाज को ध्यान में रखते हुए गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा को बनाए रखते हुए होलिकोत्सव जुलूस के समय में परिवर्तन किया जाएगा। पहले यह जुलूस दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच समाप्त होता था जिसे अब 12:30 बजे समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इस संबंध में एक पत्र पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) को सौंपा गया।

पुलिस उपायुक्त ने किया निर्णय का स्वागत

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) विश्वजीत श्रीवास्तव ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने वाला कदम है। इस अवसर पर उन्होंने सभी उपस्थित सदस्यों को मिठाई खिलाकर धन्यवाद दिया।

गंगा-जमुनी संस्कृति का उदाहरण

चीफ वार्डेन अमरनाथ मिश्र ने कहा कि लखनऊ की पहचान हमेशा से गंगा-जमुनी संस्कृति की मिसाल रही है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अतीत में भी जब त्योहारों की तिथियां एक साथ आईं। तब दोनों समुदायों ने आपसी समन्वय से अपने-अपने त्योहारों को आगे-पीछे करके प्रेम और उल्लास के साथ मनाया।

सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जाएगा होलिकोत्सव

यह निर्णय शहर में शांति, सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने के लिए लिया गया है। पुलिस प्रशासन और होलिकोत्सव समितियों ने एकमत होकर सभी धर्मों के सम्मान और परस्पर सहयोग की भावना को प्राथमिकता देते हुए इस बदलाव को स्वीकार किया।

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