यूका कचरा जलाने से रोकने की मांग: महिलाएं बोलीं बेहतर विकल्प अपनाए सरकार, फिर से कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी – Indore News h3>
पीथमपुर, महू और इन्दौर की महिलाओं ने यूनियन कार्बाइड के खतरनाक कचरे के और अधिक परीक्षण को रोकने की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि पिछले तीन दिनों से चल रहे परीक्षण के कारण पीथमपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोग कैंसर कारक रसायनों के प्रभाव में आ गए
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पीथमपुर बचाओ समिति के अध्यक्ष हेमंत कुमार हिरोले ने पत्रकार वार्ता में बताया कि रामकी प्लॉट केन्द्रीय पौलुशन बोर्ड की गाईडलाईन TSDF के अनुसार 500 मीटर के अन्दर कोई आबादी नहीं होना चाहिए, लेकिन तारपुरा गाँव 50 मीटर के अंदर ही बसा है। जो कि CPCB यह गाइडलाइन का उल्लंघन है। बीते चार-पाँच दिन से क्षेत्र में नाक और आंखों में जलन, खांसी, गला सूखने की शिकायतें बढ़ गई है।
जब तक हवा में भारी धातुओं और कैंसर कारक डाइऑक्सिन तथा फ्यूरान की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक कोई और परीक्षण नहीं होना चाहिए। समिति ने राख के परीक्षण की रिपोर्ट भी सार्वजनिक करने की मांग की है। हिरोले ने कहा कि मप्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (एमपीपीसीबी) द्वारा मीडिया में जारी पहली ट्रायल रिपोर्ट में भोपाल जहरीले कचरे में मौजूद अत्यंत घातक न्यूरोटोक्सिन मर्करी जो 2015 की रिपोर्ट में सामान्य से 700 से 900 गुना मात्रा है का। उसका रिपोर्ट में जिक्र ही नहीं किया गया है।
मर्करी फिल्टर को कहां दफनाया ये रिपोर्ट में नहीं बताया
मर्करी को किस विधि से कितनी मात्रा में स्थिर किया गया यह भी रिपोर्ट में नहीं बताया गया है। मर्करी की कितनी मात्रा लैंडफिल में डाली गई किस क्वालिटी के मर्करी फिल्टर को कहां दफनाया गया यह भी नहीं बताया है। 340 डिग्री पर मर्करी गैस में कन्वर्ट होता है। कचरा जलने के दौरान एंबिएंट गैस या हवा में मर्करी की कितनी मात्रा निकली यह भी नहीं बताया गया है।
भोपाल के घातक का केमिकल कचरे को जलाने से ऑनलाइन निगरानी द्वारा अथवा अन्य तरीके से घातक जहरीली गैस डाइऑक्सिन व फ्यूरान की कितनी मात्रा निकली यह नहीं बताया गया है डाइऑक्सिन व फ्यूरान की किस लैब में जांच कराई उस का नाम नहीं बताया गया है
महिलाओं ने कहा कि यह मिथक फैलाया जा रहा है कि इस दहन प्रक्रिया से UC का कचरा नष्ट हो रहा है। जबकि वास्तविकता में खतरनाक कचरे की मात्रा तीन गुना हो गई है। कचरे से निकलने वाली राख और लीचेट को एक लैंडफिल में दफनाया जाएगा। यह लैंडफिल पहले से ही जमीन को प्रदूषित कर रहा है।
इस तथ्य की पुष्टि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने भी की है।महिलाओं ने सवाल उठाया कि जब इस खतरनाक कचरे से निपटने के बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं उन पर विचार करना चाहिए। सरकार स्वच्छ हवा में सांस लेने के हमारे संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21) को वंचित नहीं कर सकती।
महिलाओं ने कहा कि वे शीघ्र ही उच्च न्यायालय की शरण लेंगे। ताकि UC के खतरनाक कचरे के और अधिक परीक्षण को रोका जा सके और इस कचरे से निपटने के लिए बेहतर विकल्प तलाशे जा सकें।
