राजस्थान में पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी: 12 हजार ग्राम पंचायतें हो सकती हैं, पुनर्गठन की गाइडलाइन जारी, 20 जनवरी से 15 अप्रैल तक होगा काम – Jaipur News

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राजस्थान में पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी:  12 हजार ग्राम पंचायतें हो सकती हैं, पुनर्गठन की गाइडलाइन जारी, 20 जनवरी से 15 अप्रैल तक होगा काम – Jaipur News

राजस्थान में पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी: 12 हजार ग्राम पंचायतें हो सकती हैं, पुनर्गठन की गाइडलाइन जारी, 20 जनवरी से 15 अप्रैल तक होगा काम – Jaipur News

राजस्थान में ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समितियां और जिला परिषदों के पुनर्गठन का खाका तैयार हो गया है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग ने पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन का टाइम टेबल और गाइडलाइन जारी कर दी है। उस गाइडलाइन के हिसाब से अब नई ग्राम

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पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन में नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां बनाने के साथ-साथ मौजूद पंचायती राज संस्थाओं की सीमाओं में भी बदलाव होगा। इसके लिए जनसंख्या और दूरी के पुराने मापदंडों में इस बार छूट दी गई है।

पुनर्गठन के बाद प्रदेश में हो सकती हैं 12000 ग्राम पंचायतें

राजस्थान में अगले 4 से 5 महीने के अंदर हजारों पंचायतों की सीमाओं में बदलाव हो जाएगा। मापदंडों में छूट दिए जाने से मोटे अनुमान के मुताबिक करीब 800 नई ग्राम पंचायतें बन सकती हैं। इसके अलावा करीब 20 नई पंचायत समितियां भी बनने की संभावना है। अभी 11,194 ग्राम पंचायत और 365 पंचायत समितियां हैं। पुनर्गठन के बाद इनकी संख्या 12000 पहुंच सकती है।

20 जनवरी से 15 अप्रैल के बीच पूरी करनी होगी प्रक्रिया

नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां के लिए कलेक्टर 30 दिन में प्रस्ताव तैयार करेंगे। 20 जनवरी से 18 फरवरी तक कलेक्टर प्रस्ताव तैयार करेंगे। नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां बनाने और पुनर्गठन करने के बारे में 20 फरवरी से लेकर 21 मार्च तक आपत्तियां मांगी जाएगी। 23 मार्च से 1 अप्रैल तक ड्राफ्ट प्रस्ताव के बारे में जनता से मिली आपत्तियां और सुझावों का निपटारा किया जाएगा। 3 अप्रैल से 15 अप्रैल तक नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां के पुनर्गठन के प्रस्ताव पंचायती राज विभाग को भेजने होंगे।

2011 की जनसंख्या के आधार पर ही बनेगी नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां

राजस्थान में बनने वाली नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां के लिए जनसंख्या का आधार 2011 की जनगणना ही रहेगी। नई जनगणना नहीं होने की वजह से 2011 की जनगणना के आंकड़ों को ही आधार बनाया जाएगा।

सामान्य इलाकों में कम से कम 3000 की जनसंख्या पर बनेगी एक​ ग्राम पंचायत

सामान्य इलाकों में ग्राम पंचायत के पुनर्गठन और नई ग्राम पंचायत बनाने के लिए कम से कम 3000 की जनसंख्या की सीमा रखी गई है। अधिकतम 5500 की जनसंख्या की सीमा रखी गई है।

चार रेगिस्तान जिलों और सहरिया इलाकों में 2000 की जनसंख्या पर बनेगी एक पंचायत

राजस्थान के चार रेगिस्तानी जिलों और सहरिया क्षेत्र में न्यूनतम 2000 की जनसंख्या पर एक ग्राम पंचायत बन सकेगी। इन इलाकों में ग्राम पंचायत की अधिकतम जनसंख्या 4000 रखी गई है। इससे ज्यादा जनसंख्या पर अलग से ग्राम पंचायत बनेगी। बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और बारां जिले की किशनगंज और शाहाबाद तहसीलों में न्यूनतम और अधिकतम जनसंख्या के मापदंडों में छूट दी गई है।

रेगिस्तान जिलों बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में डेढ़ लाख की आबादी और 40 से ज्यादा ग्राम पंचायत वाली पंचायत समितियां को पुनर्गठित किया जाएगा। अब रेगिस्तान जिलों में 20 ग्राम पंचायत पर एक पंचायत समिति बन सकेगी। बारां जिले के सहरिया बहुल किशनगंज और शाहबाद क्षेत्र में भी यही मापदंड लागू होंगे।

लोगों की मांग पर पंचायत के इलाके बदल सकेंगे

स्थानीय लोगों की मांग पर नई पंचायत बन सकेगी। इलाके को दूसरी पंचायत में शामिल किया जा सकेगा। अगर किसी इलाके के लोग मौजूदा ग्राम पंचायत की जगह उनके वार्ड या इलाके को दूसरी पंचायत में शामिल करना चाहते हैं। इसकी मंजूरी दी जा सकेगी, लेकिन उसे दूसरी ग्राम पंचायत के मुख्यालय से उसे इलाके की दूरी 6 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एक राजस्व गांव को दो पंचायत में नहीं रखा जा सकेगा

पंचायत के पुनर्गठन में एक राजस्व गांव को दो पंचायत में नहीं रखा जाएगा। पूरा राजस्व गांव एक ही पंचायत में रहेगा। गाइडलाइन में यह भी है कि किसी भी पंचायत का पूरा क्षेत्र ही किसी विधानसभा सीट में होना चाहिए। एक पंचायत इलाके में एक से ज्यादा विधानसभा नहीं होनी चाहिए।

सामान्य क्षेत्रों में 2 लाख से ज्यादा आबादी वाली पंचायत समितियां टूटेगी

प्रदेश में 2 लाख या इससे ज्यादा आबादी और 40 या इससे ज्यादा ग्राम पंचायत वाली पंचायत समितियां का पुनर्गठन करके उनसे नई यूनिट बनाई जाएगी। अब 25 ग्राम पंचायत पर एक पंचायत समिति बनेगी जबकि पहले 40 पंचायत पर एक पंचायत समिति बनती थी।

एक ग्राम पंचायत को बताकर दो पंचायत समितियां में नहीं रखा जा सकेगा

पुनर्गठन में नजदीक की पंचायत को नई पंचायत समिति में शामिल किया जा सकेगा, लेकिन एक ग्राम पंचायत को बताकर दो पंचायत समितियां में नहीं रखा जाएगा।

नई पंचायत का मुख्यालय वही होगा, जहां सरकारी दफ्तर हो या उनके लिए जमीन हो

नई ग्राम पंचायत के मुख्यालय को लेकर भी कलेक्टरों को सरकार ने गाइडलाइन दी है। उसके मुताबिक नई बनने वाली ग्राम पंचायत का मुख्यालय उसी गांव में रखा जाए। जहां पर आने-जाने के साधन हों। दूसरे गांव से उसका संपर्क आसान हो। पंचायत भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, पटवार भवन, किसान सेवा केंद्र और दूसरे सरकारी दफ्तर भी हों या इन्हें बनाने के लिए जमीन उपलब्ध हो।

20 फरवरी को होगा नोटिस का प्रकाशन

तहसीलदार और पटवारी के सहयोग से एसडीओ की निगरानी में ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां के पुनर्गठन के प्रस्ताव तैयार होंगे। पुनर्गठन के इन प्रस्ताव पर जनता की आपत्तियां और सुझाव लेने के लिए 20 फरवरी को नोटिस प्रकाशित करवाया जाएगा।

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प्रदेश में इस साल ग्राम पंचायतों से लेकर पंचायत समितियों और जिला परिषदों की संख्या बढ़ेगी। कैबिनेट ने 28 दिसंबर 2024 को ही पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन करने का फैसला किया था। कैबिनेट के फैसले के बाद अब पंचायती राज विभाग ने पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी है। (पूरी खबर पढ़ें)

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