आज पहुंचें कैंप में, पालतू कुत्ते और बिल्लियों को लगवाएं नि:शुल्क टीके h3>
आज पहुंचें कैंप में, पालतू कुत्ते और बिल्लियों को लगवाएं नि:शुल्क टीकेआज पहुंचें कैंप में, पालतू कुत्ते और बिल्लियों को लगवाएं नि:शुल्क टीकेआज पहुंचें कैंप में, पालतू कुत्ते और बिल्लियों को लगवाएं…
Newswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफFri, 27 Sep 2024 04:24 PM
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आज पहुंचें कैंप में, पालतू कुत्ते और बिल्लियों को लगवाएं नि:शुल्क टीके बिहारशरीफ, राजगीर और हिलसा अनुमंडल स्तरीय पशु चिकित्सालय में कैंप पालको को जागरूक करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी होगा। फोटो पशु अस्पताल : बिहारशरीफ का राजकीय पशु अस्पताल, जहां लगेगा कैंप। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। लोगों को रेबीज की बीमारी से बचाने के लिए कुत्तों और बिल्लियों को रेबीजरोधी टीका लगाया जाएगा। 28 सितंबर दिन शनिवार को जिले के बिहारशरीफ राजकीय पशु अस्पताल तथा हिलसा व राजगीर के अनुमंडल पशु चिकित्सालय में वर्ल्ड रेबीज डे पर विशेष कैंप लगाया जाएगा। यहां कुत्तों व बिल्लियों को नि:शुल्क टीका दिया जाएगा। इतना ही नहीं जागरूकता कार्यक्रम भी होगा, जिसमें पशु चिकित्सक रेबीज की बीमारी से बचाव के तरीके बताएंगे। जिला पशुपालन पदाधिकारी डा रमेश कुमार बताते हैं कि टीका दिये जाने के बाद कुत्ते व बिल्लियों को काटने पर भी मनुष्य व अन्य जानवरों में रेबीज होने का खतरा कम हो जाता है। टीकाकरण के दौरान पशुओं की जांच की जाएगी। लोगों को पालतू कुत्ते व बिल्लियों के बेहतर तरीके से रखरखाव व प्रबंधन संबंधी परामर्श दिये जाएंगे। बिहारशरीफ, राजगीर और हिलसा में लगने वाले कैंप में सौ-सौ जानवरों को टीके लगाये जाएंगे। सुबह 8.30 से शाम पांच बजे तक लोग यहां कुत्ते व बिल्लियों को लाकर टीका लगवा सकते हैं। खास यह भी कि टीका लगाने के बाद जानवरों के कार्ड भी बनाये जाएंगे। क्या है रेबीज बीमारी: : रेबीज घातक विषाणुजनित जूनोटिक रोग है। यह मनुष्यों और पालतू जानवरों को समान रूप से प्रभावित करती है। यह बीमारी रोगग्रस्त पशुओं के काटने से मनुष्यों में फैलती है। लक्षण प्रकट होने के बाद इस रोग की कोई विशेष चिकित्सा उपलब्ध नहीं है। रेबज लाइलाज बीमारी है। बचाव जानवरों को टीका लगवाना है। प्राथमिक उपचार: तत्काल काटे हुए स्थान को नल के बहते पानी के नीचे 10 से 15 मिनट लगातार साबून लगाकर या कास्टिक सोड से धोना चाहिए। उसके बाद 70 प्रतिशत इथाइल अल्कोहल या टिंक्चर आयोडिन काटने के स्थान पर लगाना चाहिए। उसके बाद चिकित्सकक के पास जाकर उपचार कराएं। बीमारी के लक्षण : 1. जानवर अधिकतर एकांत एवं अंधकार में रहना पसंद करता है और सुस्त व शांत रहता है। 2. जबड़े की मांसपेशियों के लकवाग्रस्त होने के कारण नीचला जबड़ा लटक जाता है तथा जानवर खाने- में असमर्थ हो जाता है। 3. जानवर कभी गिरता है तो कभी उठता है और काल्पनिक चीजों को पकड़ने का प्रयास करता है। काटने के लिए दौड़ता भी है।
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आज पहुंचें कैंप में, पालतू कुत्ते और बिल्लियों को लगवाएं नि:शुल्क टीके बिहारशरीफ, राजगीर और हिलसा अनुमंडल स्तरीय पशु चिकित्सालय में कैंप पालको को जागरूक करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी होगा। फोटो पशु अस्पताल : बिहारशरीफ का राजकीय पशु अस्पताल, जहां लगेगा कैंप। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। लोगों को रेबीज की बीमारी से बचाने के लिए कुत्तों और बिल्लियों को रेबीजरोधी टीका लगाया जाएगा। 28 सितंबर दिन शनिवार को जिले के बिहारशरीफ राजकीय पशु अस्पताल तथा हिलसा व राजगीर के अनुमंडल पशु चिकित्सालय में वर्ल्ड रेबीज डे पर विशेष कैंप लगाया जाएगा। यहां कुत्तों व बिल्लियों को नि:शुल्क टीका दिया जाएगा। इतना ही नहीं जागरूकता कार्यक्रम भी होगा, जिसमें पशु चिकित्सक रेबीज की बीमारी से बचाव के तरीके बताएंगे। जिला पशुपालन पदाधिकारी डा रमेश कुमार बताते हैं कि टीका दिये जाने के बाद कुत्ते व बिल्लियों को काटने पर भी मनुष्य व अन्य जानवरों में रेबीज होने का खतरा कम हो जाता है। टीकाकरण के दौरान पशुओं की जांच की जाएगी। लोगों को पालतू कुत्ते व बिल्लियों के बेहतर तरीके से रखरखाव व प्रबंधन संबंधी परामर्श दिये जाएंगे। बिहारशरीफ, राजगीर और हिलसा में लगने वाले कैंप में सौ-सौ जानवरों को टीके लगाये जाएंगे। सुबह 8.30 से शाम पांच बजे तक लोग यहां कुत्ते व बिल्लियों को लाकर टीका लगवा सकते हैं। खास यह भी कि टीका लगाने के बाद जानवरों के कार्ड भी बनाये जाएंगे। क्या है रेबीज बीमारी: : रेबीज घातक विषाणुजनित जूनोटिक रोग है। यह मनुष्यों और पालतू जानवरों को समान रूप से प्रभावित करती है। यह बीमारी रोगग्रस्त पशुओं के काटने से मनुष्यों में फैलती है। लक्षण प्रकट होने के बाद इस रोग की कोई विशेष चिकित्सा उपलब्ध नहीं है। रेबज लाइलाज बीमारी है। बचाव जानवरों को टीका लगवाना है। प्राथमिक उपचार: तत्काल काटे हुए स्थान को नल के बहते पानी के नीचे 10 से 15 मिनट लगातार साबून लगाकर या कास्टिक सोड से धोना चाहिए। उसके बाद 70 प्रतिशत इथाइल अल्कोहल या टिंक्चर आयोडिन काटने के स्थान पर लगाना चाहिए। उसके बाद चिकित्सकक के पास जाकर उपचार कराएं। बीमारी के लक्षण : 1. जानवर अधिकतर एकांत एवं अंधकार में रहना पसंद करता है और सुस्त व शांत रहता है। 2. जबड़े की मांसपेशियों के लकवाग्रस्त होने के कारण नीचला जबड़ा लटक जाता है तथा जानवर खाने- में असमर्थ हो जाता है। 3. जानवर कभी गिरता है तो कभी उठता है और काल्पनिक चीजों को पकड़ने का प्रयास करता है। काटने के लिए दौड़ता भी है।

