कावर क्षेत्र अधिसूचित भूमि के निबंधन पर लगी रोक को वापस लेने के लिए डीएम सक्षम प्राधिकार

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कावर क्षेत्र अधिसूचित भूमि के निबंधन पर लगी रोक को वापस लेने के लिए डीएम सक्षम प्राधिकार

कावर क्षेत्र अधिसूचित भूमि के निबंधन पर लगी रोक को वापस लेने के लिए डीएम सक्षम प्राधिकार

निबंधन विभाग के महानिरीक्षक ने डीएम को भेजा पत्र निज संवाददाता। कावर क्षेत्र की अधिसूचित जमीन को खरीद बिक्री की रोक सूची से मुक्त किए जाने के लिए सहायक निबंधन महानिरीक्षक पटना सुशील कुमार सुमन ने डीएम…

Newswrap हिन्दुस्तान, बेगुसरायThu, 26 Sep 2024 02:32 PM
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बेगूसराय, निज संवाददाता। कावर क्षेत्र की अधिसूचित जमीन को खरीद बिक्री की रोक सूची से मुक्त किए जाने के लिए सहायक निबंधन महानिरीक्षक पटना सुशील कुमार सुमन ने डीएम को सक्षम प्राधिकार बताया है। पत्र में डीएम को अधिसूचित भूमि के निबंधन पर लगी रोक को नियमानुसार वापस एवं आवश्यक कार्रवाई करने की निर्देश दिया है। निबंधन विभाग पटना से अधिसूचित जमीन खरीद बिक्री पर रोक हटाने से संबंधित दिशा निर्देश एक वर्ष बाद प्राप्त हुई। डीएम रोशन कुशवाहा ने 14 मार्च 2023 को अपर मुख्य सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बिहार को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश की मांग की थी। पत्र में मंझौल एवं बखरी अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत कावर झील पक्षी विहार राज्यपाल द्वारा बिहार गजट असाधारण अंक में 20 जून 1989 के माध्यम से अधिसूचित है। तत्कालीन डीएम के पत्र के आलोक में अधिसूचित भूमि की खरीद बिक्री पर रोक लगा दी गयी। कावर झील पक्षी विहार आश्रयणी के लिए लगभग 15 हजार एकड़ भूमि अधिसूचित की गयी थी। जदयू के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष चितरंजन प्रसाद सिंह ने कावर झील के जमीन की खरीद बिक्री से रोक हटाने के लिए डीएम से मांग की थी। उन्होंने बताया कि कावर झील पक्षी विहार के लिए लगभग 63 सौ हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की गई। लेकिन 36 वर्षों में अधिग्रहण की कोई प्रक्रिया नहीं अपनायी गई है। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जयमंगलागढ़ गेस्ट हाउस में अधिकारियों की बैठक हुई। यहां किसानों द्वारा वन पर्यावरण विभाग की पूर्व में घोषित क्षेत्रफल के बदले मात्र लगभग तीन हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण करने का अनुरोध किया गया। स्थानीय अधिकारियों द्वारा जल प्लावित एरिया का सीमांकन कर प्रतिवेदन भेजा गया। बिहार सरकार वर्तमान भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुये भारत सरकार के वन पर्यावरण विभाग को इसे भेज दिया। भूमि एक्ट के मुताबिक अधिसूचित भूमि का मुआवजा रैयतों को 2 वर्षों के अंदर मिलना चाहिए। जमीन की खरीद बिक्री पर रोक लगने से लगभग दस हजार छोटे बड़े किसान प्रभावित हुए हैं। यहां शादी विवाह, श्राद्ध, बच्चे को उच्च शिक्षा में मोटी रकम की जरूरत होती है। किसान जमीन से भरपाई करते हैं। डीएम रोशन कुशवाहा द्वारा खरीद बिक्री पर रोक हटाने से संबंधित अपर मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश देने की मांग की गयी थी। इधर, इस संबंध में जब डीएम तुषार सिंगला से दूरभाष पर बात की गयी तो उन्होंने बताया कि बाढ़ क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं। इस संदर्भ में फाइल देखकर कुछ बता पाएंगे।

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