बिहार के सभी जिले में खुलेंगे आयुष हेल्थ एंड वेलनेंस सेंटर: डॉ. धनंजय
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बेगूसराय, निज प्रतिनिधि। बिहार के सभी 38 जिलों में 294 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चिन्हित कर लिए गए हैं। इसमें आयुष चिकित्सा पद्धति से रोगियों को लाभ पहुंचाने का काम किया जाएगा। ये बातें राज्य आयुष स्वास्थ्य समिति के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ धनंजय शर्मा ने कहीं। वे आयुर्वेद महाविद्यालय, बेगूसराय में गुरुवार को आयोजित महाविद्यालय के 78वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता को आयुष चिकित्सा पद्धति से विशेष लाभ पहुंचाया जाएगा। इसमें आयुर्वेद एवं योग के माध्यम से चिकित्सा व्यवस्था की जाएगी। इन हेल्थ वेलनेस सेंटर में योग शिक्षक की व्यवस्था भी सरकार के नियमों के साथ की जाएगी।
आयुर्वेद महाविद्यालय की पूर्ववर्ती छात्र समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद महाविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह में तीन पूर्व प्राचार्योँ डॉ. भूदेव सिंह, डॉ. दिनेश्वर प्रसाद एवं डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी तथा वर्तमान प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी को सम्मानित किया गया। प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने महाविद्यालय की स्थापना एवं विकास संबंधी कार्यों की जानकारी दी। प्राचार्य ने बताया आज महाविद्यालय अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 500 रोगी आ रहे हैं। विभिन्न विभागों में पदस्थापित चिकित्सकों के द्वारा उनका इलाज सफलतापूर्वक किया जा रहा है। प्राचार्य के द्वारा महाविद्यालय के तीन भूतपूर्व प्राचार्य डॉ. भूदेव सिंह, डॉ. दिनेश्वर प्रसाद एवं डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी को चादर एवं स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्राचार्य द्वारा राज्य आयुष समिति के प्रशासनिक पदाधिकारी- सह- उप सचिव प्रमोद कुमार एवं आयुष समिति के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. धनंजय शर्मा को भी शाल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वर्तमान प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी को राज्य आयुष समिति के कार्यक्रम पदाधिकारी ने सम्मानित किया।
पूर्व प्राचार्य ने कहा कॉलेज में हो रसायनशाला व फार्मेसी की व्यवस्था
पूर्व प्राचार्य डॉ. भूदेव सिंह ने अपने अनुभवों को बताते हुए कहा कि आयुर्वेद महाविद्यालय को प्रगति के रास्ते पर लाने के लिए मैंने बहुत सारे कार्य किए। भवन निर्माण संबंधी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की। उन्होंने अपनी स्मृतियों को ताजा करते हुए बताया कि बाबू अयोध्या प्रसाद सिंह के द्वारा स्थापित यह महाविद्यालय सरकारीकरण के बाद पूरी तरह से प्रगति के रास्ते पर चल रहा है। पूर्व प्राचार्य डॉ. दिनेश्वर प्रसाद ने सुझाव दिया कि महाविद्यालय में एक रसायनशाला स्थापित किया जाए। इसके लिए विधिवत बिहार सरकार से फार्मेसी स्थापित करने के लिए लाइसेंस बनाने हेतु आवेदन दिया जाए। उन्होंने प्राचार्य को सुझाव दिया कि इस तरह के कार्यों से महाविद्यालय के भूमि एवं भवन की सुरक्षा होगी तथा महाविद्यालय की दवाएं भी यहीं बना करेंगी। पूर्व प्राचार्य डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी ने अपने अनुभवों को बताते हुए कहा कि मैं जब यहां पदस्थापित हुआ तो यह महाविद्यालय कई वर्षों से बिना मान्यता के चल रहा था। मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं थी। मैं यहां के संसाधनों का सही रूप से प्रयोग करते हुए महाविद्यालय के मान्यता के लिए कार्य किया और उसमें हमें सफलता मिली। उन्होंने बताया कि आज महाविद्यालय के पास नौ बीघे की जमीन है जिस पर 257 करोड़ की लागत से भवन बन रहा है। यह लगातार किए गए मेहनत का परिणाम है।
प्राचार्य के हाथों सम्मानित पूर्ववर्ती छात्र समिति के सदस्यों ने जतायी खुशी
कार्यक्रम का संचालन करते हुए महाविद्यालय के शालाक्य विभाग के प्रभारी डॉ. मुन्ना कुमार ने महाविद्यालय के पुराने, वर्तमान और भविष्य की रूपरेखा को प्रस्तुत किया। महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र समिति के सचिव डॉ.दिलीप कुमार वर्मा ने महाविद्यालय की स्थापना और मान्यता में विभिन्न प्राचार्य के सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की। पूर्ववर्ती छात्र समिति के अध्यक्ष डॉ. लाल कौशल कुमार, सचिव डॉ. दिलीप कुमार वर्मा, कोषाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. श्याम किशोर प्रसाद, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. रामनंदन सहनी, डॉ. इंदु कुमारी, डॉ. रामनाथ शर्मा, डॉ. राजेश्वर पोद्दार, डॉ. बीपी शर्मा, डॉ.अखिलेश जायसवाल, डॉ. जीपी शुक्ला, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. किश्वर सुल्ताना समेत कई लोगों को प्राचार्य के द्वारा माला एवं बुके देखकर सम्मानित किया गया।
यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
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बेगूसराय, निज प्रतिनिधि। बिहार के सभी 38 जिलों में 294 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चिन्हित कर लिए गए हैं। इसमें आयुष चिकित्सा पद्धति से रोगियों को लाभ पहुंचाने का काम किया जाएगा। ये बातें राज्य आयुष स्वास्थ्य समिति के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ धनंजय शर्मा ने कहीं। वे आयुर्वेद महाविद्यालय, बेगूसराय में गुरुवार को आयोजित महाविद्यालय के 78वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता को आयुष चिकित्सा पद्धति से विशेष लाभ पहुंचाया जाएगा। इसमें आयुर्वेद एवं योग के माध्यम से चिकित्सा व्यवस्था की जाएगी। इन हेल्थ वेलनेस सेंटर में योग शिक्षक की व्यवस्था भी सरकार के नियमों के साथ की जाएगी।
आयुर्वेद महाविद्यालय की पूर्ववर्ती छात्र समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद महाविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह में तीन पूर्व प्राचार्योँ डॉ. भूदेव सिंह, डॉ. दिनेश्वर प्रसाद एवं डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी तथा वर्तमान प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी को सम्मानित किया गया। प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने महाविद्यालय की स्थापना एवं विकास संबंधी कार्यों की जानकारी दी। प्राचार्य ने बताया आज महाविद्यालय अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 500 रोगी आ रहे हैं। विभिन्न विभागों में पदस्थापित चिकित्सकों के द्वारा उनका इलाज सफलतापूर्वक किया जा रहा है। प्राचार्य के द्वारा महाविद्यालय के तीन भूतपूर्व प्राचार्य डॉ. भूदेव सिंह, डॉ. दिनेश्वर प्रसाद एवं डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी को चादर एवं स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्राचार्य द्वारा राज्य आयुष समिति के प्रशासनिक पदाधिकारी- सह- उप सचिव प्रमोद कुमार एवं आयुष समिति के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. धनंजय शर्मा को भी शाल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वर्तमान प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी को राज्य आयुष समिति के कार्यक्रम पदाधिकारी ने सम्मानित किया।
पूर्व प्राचार्य ने कहा कॉलेज में हो रसायनशाला व फार्मेसी की व्यवस्था
पूर्व प्राचार्य डॉ. भूदेव सिंह ने अपने अनुभवों को बताते हुए कहा कि आयुर्वेद महाविद्यालय को प्रगति के रास्ते पर लाने के लिए मैंने बहुत सारे कार्य किए। भवन निर्माण संबंधी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की। उन्होंने अपनी स्मृतियों को ताजा करते हुए बताया कि बाबू अयोध्या प्रसाद सिंह के द्वारा स्थापित यह महाविद्यालय सरकारीकरण के बाद पूरी तरह से प्रगति के रास्ते पर चल रहा है। पूर्व प्राचार्य डॉ. दिनेश्वर प्रसाद ने सुझाव दिया कि महाविद्यालय में एक रसायनशाला स्थापित किया जाए। इसके लिए विधिवत बिहार सरकार से फार्मेसी स्थापित करने के लिए लाइसेंस बनाने हेतु आवेदन दिया जाए। उन्होंने प्राचार्य को सुझाव दिया कि इस तरह के कार्यों से महाविद्यालय के भूमि एवं भवन की सुरक्षा होगी तथा महाविद्यालय की दवाएं भी यहीं बना करेंगी। पूर्व प्राचार्य डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी ने अपने अनुभवों को बताते हुए कहा कि मैं जब यहां पदस्थापित हुआ तो यह महाविद्यालय कई वर्षों से बिना मान्यता के चल रहा था। मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं थी। मैं यहां के संसाधनों का सही रूप से प्रयोग करते हुए महाविद्यालय के मान्यता के लिए कार्य किया और उसमें हमें सफलता मिली। उन्होंने बताया कि आज महाविद्यालय के पास नौ बीघे की जमीन है जिस पर 257 करोड़ की लागत से भवन बन रहा है। यह लगातार किए गए मेहनत का परिणाम है।
प्राचार्य के हाथों सम्मानित पूर्ववर्ती छात्र समिति के सदस्यों ने जतायी खुशी
कार्यक्रम का संचालन करते हुए महाविद्यालय के शालाक्य विभाग के प्रभारी डॉ. मुन्ना कुमार ने महाविद्यालय के पुराने, वर्तमान और भविष्य की रूपरेखा को प्रस्तुत किया। महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र समिति के सचिव डॉ.दिलीप कुमार वर्मा ने महाविद्यालय की स्थापना और मान्यता में विभिन्न प्राचार्य के सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की। पूर्ववर्ती छात्र समिति के अध्यक्ष डॉ. लाल कौशल कुमार, सचिव डॉ. दिलीप कुमार वर्मा, कोषाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. श्याम किशोर प्रसाद, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. रामनंदन सहनी, डॉ. इंदु कुमारी, डॉ. रामनाथ शर्मा, डॉ. राजेश्वर पोद्दार, डॉ. बीपी शर्मा, डॉ.अखिलेश जायसवाल, डॉ. जीपी शुक्ला, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. किश्वर सुल्ताना समेत कई लोगों को प्राचार्य के द्वारा माला एवं बुके देखकर सम्मानित किया गया।
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