दिल्ली : आशियाने का खंडहर देख आंखों से बरसने लगीं बूंदें, तुगलकाबाद फोर्ट में बेघर हो गए कई

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दिल्ली : आशियाने का खंडहर देख आंखों से बरसने लगीं बूंदें, तुगलकाबाद फोर्ट में बेघर हो गए कई

दिल्ली : आशियाने का खंडहर देख आंखों से बरसने लगीं बूंदें, तुगलकाबाद फोर्ट में बेघर हो गए कई

नई दिल्ली : ऐतिहासिक स्मारक तुगलकाबाद किले की बाउंड्री के अंदर और बाहर अवैध रूप से बनी स्लम कॉलोनी के खिलाफ सोमवार को भी एक्शन लेते हुए कई घरों और दुकानों को ढहा दिया गया। ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की बताई गई 1247 प्रॉपर्टीज के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से रविवार को शुरू हुई कार्रवाई सोमवार को भी जारी रही। हाई कोर्ट के निर्देश पर एएसआई, जिला प्रशासन और एमसीडी की संयुक्त कार्रवाई में सभी अवैध निर्माण को ढहा दिया गया है। इसके बाद यहां रह रहे लोगों का आशियाना पूरी तरह से खंडहर में तबदील हो गया।

मेरे घर का अब सिर्फ खंडहर ही बचा है

उत्तर प्रदेश के महोबा से दिल्ली आई 32 वर्षीय सोनिया ने मलबे के पहाड़ पर खड़ी हैं। सोनिया का कहना है कि ये मेरा घर खंडहर बन गया है। उन्होंने कहा कि पैसे बचाने और अपनी विधवा मां के लिए घर बनाने के लिए मैंने एक नर्स के रूप में लंबी शिफ्ट में काम किया। सोनिया ने कहा कि अधिकांश लोगों के आधार और राशन कार्ड पर पता यही है। हमने इस इलाके में मतदान किया है। लेकिन अब वे हमें अतिक्रमणकारी कह रहे हैं। अगर सरकार सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को दंडित करना चाहती है, उन्हें उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने हमें ये प्लॉट बेचे हैं।

हमने चोरी नहीं की, जमीन खरीद कर बनाया था मकान

हमने चोरी नहीं की, जमीन खरीद कर बनाया था मकान

‘हम यहीं पैदा हुए हैं’, ‘गलत थे तो पहले क्यों नहीं रोका’, ‘खाकी से लेकर सफेद कपड़े वाले सभी ने घूस ली है ‘, ‘हमें बेघर कर दिया गया। दोषी कौन? हम या वे’… ये आवाजें हैं तुगलकाबाद किले की जमीन पर ढहाई गई संपत्तियों के मलबे के करीब खड़े लोगों की। चीख-पुकार के बीच वे पूछ रहे हैं कि उन्हें न्याय कौन देगा? हमने चोरी नहीं की। जमीन खरीदकर मकान बनाया था। किले की जमीन में अवैध रूप से बंगाली मोहल्ला, सूर्या मोहल्ला, घुरिया मोहल्ला और बंगाली कॉलोनी आदि के नाम से कई छोटे मोहल्ले बन गए था। उनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी और राजस्थान आदि से आए अधिसंख्य मजदूर वर्ग के लोग रह रहे थे। सबसे अधिक बंगाल के लोग थे।

घर तो मिट्टी हो गया… तुगलकाबाद में तबाही का मंजर

घर तो मिट्टी हो गया... तुगलकाबाद में तबाही का मंजर

तुगलकाबाद गांव में सोमवार को तबाही का मंजर था। बुलडोजर से टूटे घरों के बीच फर्नीचर, कपड़े, घरेलू सामान और खिलौने बिखरे हुए थे। यहां अधिकांश प्रवासी श्रमिक थे जिन्होंने अपने सपने का आशियाना बनाया। कोर्ट के आदेश के बाद उनके घरों को ढहा दिया गया। ये लोग अब भी अपने दुर्भाग्य पर रो रहे हैं। इनमें से कई लोग लगभग 30 सालों से यहां रह रहे थे। बिहार की शिबो कहती हैं, ‘पूरी जिंदगी दिल्ली में गुजार दी। एक साल पहले यहां मकान खरीदा था। 10 हजार रुपये गज के हिसाब से 50 गज का मकान था। अब मिट्टी हो गया।’ यह कहते हुए वे बुरी तरह से फफककर रोते हुए कहती हैं, ‘कल से बच्चे भूखे-प्यासे हैं। खाना तक नहीं बन पाया है।’ उसी समय कई युवाओं का शोर गूंजता है- ‘क्या बताएं। हमें तो बर्बाद कर दिया है। जिंदगी बना रहे थे। अब अपराधी बनकर जीना पड़ेगा क्या।’

​हमने चोरी नहीं की, जमीन खरीद कर बनाया था मकान

​हमने चोरी नहीं की, जमीन खरीद कर बनाया था मकान

‘हम यहीं पैदा हुए हैं’, ‘गलत थे तो पहले क्यों नहीं रोका’, ‘खाकी से लेकर सफेद कपड़े वाले सभी ने घूस ली है ‘, ‘हमें बेघर कर दिया गया। दोषी कौन? हम या वे’… ये आवाजें हैं तुगलकाबाद किले की जमीन पर ढहाई गई संपत्तियों के मलबे के करीब खड़े लोगों की। चीख-पुकार के बीच वे पूछ रहे हैं कि उन्हें न्याय कौन देगा? हमने चोरी नहीं की। जमीन खरीदकर मकान बनाया था। किले की जमीन में अवैध रूप से बंगाली मोहल्ला, सूर्या मोहल्ला, घुरिया मोहल्ला और बंगाली कॉलोनी आदि के नाम से कई छोटे मोहल्ले बन गए था। उनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी और राजस्थान आदि से आए अधिसंख्य मजदूर वर्ग के लोग रह रहे थे। सबसे अधिक बंगाल के लोग थे।

एकदम से हमारा घर उजाड़ दिया

एकदम से हमारा घर उजाड़ दिया

हमारे साथ जुल्म हुआ है। हमारे बच्चे यहां पर हुए। कोई किराये पर तो कोई अपने एक कमरे के मकान में रह रहा था। तब कोई कुछ नहीं बोला। अब एकदम से हमारा घर उजाड़ दिया है…’ यह कहते हुए शाबिया अपने दुपट्टे से आंसू पोंछते हुए टूटे घर के मलबे में बैठकर सुबकने लगती हैं। बदायूं (यूपी) की मनीषा बेहद गुस्से में कहती हैं, ‘हमने 20 लाख में 125 गज जमीन खरीदी थी। मकान बनाया तो सब घूस लेने आ गए थे। तब क्यों नहीं रोका।’

​दिल्ली HC का आदेश, SC का हस्तक्षेप से इनकार

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दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 अप्रैल को को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ऐतिहासिक तुगलकाबाद किले से अतिक्रमण चार सप्ताह के भीतर हटाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा कि था कि वह इस मुद्दे पर “मूकदर्शक” नहीं रह सकता। हाईकोर्ट चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने तुगलकाबाद किले में व्यापक पैमाने पर अतिक्रमण के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चेतावनी दी कि इसके निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर वह एएसआई निदेशक, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) आयुक्त, एसडीएम और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित शीर्ष अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश देगी। सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके से अतिक्रमण हटाने के लिए चल रहे अभियान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इससे पहले कोर्ट में कहा गया कि यह मानवीय समस्या है। कृपया यथास्थिति बहाल कीजिए। 1,000 घर पहले ही गिराये जा चुके हैं। 1,000 अब गिराये जाएंगे।

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