Delhi Weather: मई में फरवरी से मौसम का मजा लीजिए, लेकिन बीमारी से भी रहिए सावधाान! h3>
अभी का मौसम फैला रहा है वायरस
गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर अतुल गोगिया ने कहा कि यह मौसम वायरल फ्लू के लिए अनुकूल हो जाता है। आमतौर पर गर्मी आते ही वायरल फ्लू के मामले कम हो जाते हैं। क्योंकि गर्मी में वायरस एक्टिव नहीं रह पाता। लेकिन अभी का मौसम वायरस को जिंदा रहने और फैलने दोनों में मदद कर रहा है। इसके अलावा अभी रुक-रुक कर हो रही बारिश की वजह से मच्छर भी बढ़ रहे हैं।
एलएनजेपी के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि यह सच है इस प्रकार का मौसम सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। मई में गर्म पानी से नहाने वाला मौसम हो गया है। गर्मी से तो राहत मिली है, लेकिन अचानक मौसम में 10 डिग्री का उतार चढ़ाव कमजोर इम्युनिटी वाले बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। जिसमें बच्चे और बुजुर्ग दोनों शामिल हैं। जो लोग पहले से अस्थमा या सांस के मरीज हैं, उन्हें ज्यादा दिक्कत होती है। गला खराब, छाती में निमोनिया हो जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक गर्मी नहीं आएगी समस्या बनी रहेगी। इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
इसलिए लोग पड़ रहे बीमार
एशियन फिडेलिस हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. मुकुंद सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव से सबसे अधिक कमजोर इम्युनिटी वाले लोग बीमारी का शिकार होते हैं। नवजात, बूढ़े व्यक्ति अन्य किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों को खासतौर पर बदलते मौसम से बच कर रहना चाहिए। इनदिनों में सूक्ष्म कण के अधिक फैलाव के कारण लोगों में एलर्जी देखने को मिलती है। सूक्ष्म जीवों जैसे बैक्टीरिया, वायरस के कारण भी कई वायरल बीमारियों से इंफेक्शन का भी खतरा बना रहता है। जोकि बंद नाक, खांसी और अन्य फेफड़े संबधित बीमारी का मुख्य कारण हैं।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के जनरल फिजिशन डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि नियमित व्यायाम से हम अपने शरीर को बदलते मौसम से होने वाली बीमारियों से बचा सकते हैं। व्यायाम से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। हमें अपने भोजन में संतुलित आहार को प्रयोग में लेना चाहिए। बदलते मौसम के दौरान विटामिन C से भरपूर फलों का सेवन करना चाहिए जैसे संतरा, नींबू, सेब इत्यादि।
लोग बचाव करें, मौसम की मार से बचें
आकाश हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी एक्सपर्ट डॉक्टर अक्षय बुद्धराजा ने कहा कि इस प्रकार के मौसम में सांस की एलर्जी और नाक की एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है। मार्च और अप्रैल में पोलेन की एलर्जी का खतरा रहता है। पेड़ से पोलेन हवा में पहुंचता है और जिन्हें इससे एलर्जी होती है, उन्हें एलर्जी हो जाती है। जिन्हें पहले से अस्थमा होता है, उनके अटैक बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि लोग बचाव करें, मौसम की मार से बचें।
इन बातों पर करें अमल
- दिन और रात में तापमान का अंतर ज्यादा हो तो हल्के गर्म कपड़े इस्तेमाल करें
- दिल्ली का तापमान 23-25 डिग्री के आसपास है, इसलिए रात में AC न चलाएं
- बारिश की वजह से मच्छर हो सकते हैं, घर के आसपास पानी जमा न होने दें
- फ्रिज का ठंडा पानी और कोल्ड ड्रिंक न पीएं, खाने-पीने पर पूरा ध्यान दें

