Delhi Metro: गर्मी से बेहाल पक्षी दिल्ली मेट्रो की स्पीड पर कैसे लगा रहे हैं बार-बार ब्रेक, जानें…

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Delhi Metro: गर्मी से बेहाल पक्षी दिल्ली मेट्रो की स्पीड पर कैसे लगा रहे हैं बार-बार ब्रेक, जानें…

Delhi Metro: गर्मी से बेहाल पक्षी दिल्ली मेट्रो की स्पीड पर कैसे लगा रहे हैं बार-बार ब्रेक, जानें…

यमुना बैंक और इंद्रप्रस्थ के बीच पिछले 3 दिनों में दो बार मेट्रो में खराबी आई। दोनों बार लगभग एक ही जगह पर और एक जैसे कारणों से दिक्कत पैदा हुई। सोमवार शाम को पक्षी के टकराने के कारण वायर टूटने से ब्लू लाइन पर मेट्रो सेवा ठप हुई थी। गुरुवार सुबह भी पक्षी के कारण ही मेट्रो के ओएचई का कैंटनरी वायर टूटा। इतने कम समय में हुई एक जैसी इन दो घटनाओं ने डीएमआरसी की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच के आधार पर अंदेशा जताया जा रहा है कि इंद्रप्रस्थ और यमुना बैंक के बीच यमुना किनारे गर्मियों में वेट लैंड जैसा इलाका बन जाना इसका कारण है। पानी और भोजन की तलाश में यहां बड़ी तादाद में पक्षियों के जो झुंड इकट्ठा होते हैं, दिक्कत उसी की वजह हो रही है। ये पक्षी यहां पेड़ों पर डेरा जमाए बैठे रहते हैं और दिनभर आस-पास के इलाकों में उड़ते रहते हैं।

​पक्षियों की चोंच और पंजों में दबे तार से होती है दिक्कत

चूंकि यहां मेट्रो लाइन पेड़ों के बिल्कुल नजदीक से गुजर रही है, ऐसे में अक्सर ये पक्षी मेट्रो लाइन के तारों पर बैठ जाते हैं। ये तार इंसुलेटेड होते हैं, इसलिए पक्षियों के तार पर बैठने से तो कोई दिक्कत नहीं होती है, लेकिन जब पक्षी खाने के लिए या घोंसला बनाने के लिए अपनी चोंच या पंजों में कोई तार, कपड़ा, धागा, घास का तिनका, लकड़ी का टुकड़ा या ऐसी ही कोई अन्य चीज लिए सीधे मेट्रो के तार पर जाकर बैठ जाते हैं, दिक्कत तब पैदा होती है। अधिकारियों ने बताया कि पक्षियों की चोंच या पंजों में दबी ये चीजें जब नीचे के दूसरे तार से टकराती हैं, तो दोनों तारों के बीच एक तरह का चार्जिंग पॉइंट बन जाता है और फॉल्ट हो जाता है। इसके अलावा कई बार उड़ने या बैठने के दौरान पक्षियों के पंख या पंजे भी ओएचई के तारों में फंस जाते हैं और जरा सा खिंचने पर तार तुरंत टूट जाता है। यमुना किनारे इन पक्षियों के लिए पानी और भोजन के लिहाज से ज्यादा अनुकूल परिस्थितियां हैं। इसी वजह से यहां पर इनकी तादाद भी ज्यादा दिखती है। इसी वजह से बार-बार इस सेक्शन पर ऐसी समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है।

​अनूठे प्रयोग करके समस्या को कम करने का प्रयास

डीएमआरसी के प्रिंसिपल एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल के मुताबिक, इस तरह की घटनाओं को पूरी तरह से रोकने का तो कोई प्रभावी तरीका नहीं है। हालांकि इनमें कमी लाने के लिए पिछले कुछ सालों में कई कदम उठाए गए हैं। इस वजह से अब दिक्कत पहले जितनी नहीं आती है। खासतौर से ब्लू लाइन की 9 जगहों समेत पूरे मेट्रो नेटवर्क में 26 जगहों पर ओएचई के वर्चुअल स्विचिंग पॉइंट लगाए गए हैं। इससे अब दो क्रॉस ओवर्स के बीच लाइन का ज्यादा बड़ा हिस्सा प्रभावित नहीं होता है और दिक्कत केवल दो स्टेशनों के बीच तक सीमित रहती है। इससे बाकी हिस्से पर मेट्रो का परिचालन जारी रखने में काफी मदद मिली है। उन्होंने बताया कि इंद्रप्रस्थ और यमुना बैंक के बीच बार-बार होने वाली इस तरह की घटनाओं को देखते हुए यहां भी एक वर्चुअल स्विचिंग पॉइंट लगाया गया है, जिसकी मदद से आगे के हिस्से पर मेट्रो सेवा जारी रहती है।

​20 हजार से ज्यादा एंटी बर्ड स्पाइक्स लगाए

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पक्षियों को ओएचई के संवेदनशील हिस्सों पर बैठने से रोकने के लिए और भी उपाए किए गए हैं। पूरे नेटवर्क में 10 हजार से अधिक जगहों पर 20 हजार से ज्यादा एंटी बर्ड स्पाइक्स भी लगाए गए हैं, ताकि पक्षी उन जगहों पर न बैठें या वहां घोंसला ना बनाएं। मेट्रो लाइन में लगे कॉपर के स्प्लिट पिन को भी बदलकर उनकी जगह स्टेनलेस स्टील से बने पिन लगाए गए हैं, ताकि पक्षियों के टकराने पर भी वे आसानी से न टूटें। मेट्रो नेटवर्क के एलिवेटेड सेक्शनों पर पक्षियों से प्रभावित हिस्सों की भी अलग से पहचान की गई है और वहां लाइन को ट्रिप होने से रोकने के लिए ऐसे सभी जरूरी उपाय किए गए हैं।

48 घंटे में फिर आई मेट्रो में खराबी

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बता दें कि सोमवार के बाद दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन पर गुरुवार सुबह 3 घंटे तक यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। पीक टाइम में वैसे ही इस लाइन पर काफी रश रहता है। मेट्रो खराब होने से भीड़ और बढ़ गई। स्टेशनों पर ट्रेनों के लिए यात्रियों को आधे-आधे घंटे इंतजार करना पड़ा। जो ट्रेनें आ रहीं थीं, वो भी पहले से ही खचाखच भरकर आ रही थीं। ऐसे में यात्रियों को ट्रेनों में चढ़ने-उतरने के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही थी। हालांकि, डीएमआरसी स्टेशनों पर और ट्रेनों के अंदर लगातार अनाउंसमेंट करवा के और सोशल मीडिया के जरिए यात्रियों को अपडेट जरूर देती रही, लेकिन पीक टाइम होने के कारण यात्रियों को ज्यादा राहत नहीं मिली। अलबत्ता कई यात्रियों के दूसरी लाइनों पर शिफ्ट हो जाने के कारण उन लाइनों पर भी भीड़ बढ़ गई।

​इस साल मेट्रो में आई खराबी की बड़ी घटनाएं

  • 12 मई: वॉयलेट लाइन पर कश्मीरी गेट के पास सिग्नल सिस्टम में खराबी आने के कारण करीब दो घंटे तक मेट्रो सेवा प्रभावित रही।
  • 21 अप्रैल: ट्रैक सर्किट ड्रॉप होने के कारण ब्लू लाइन पर सुबह 9 बजे से 11 बजे तक मेट्रो सेवा बाधित रही।
  • 28 मार्चः तकनीकी खराबी के चलते जनकपुरी वेस्ट से टर्मिनल-1 आईजीआई एयरपोर्ट के बीच मजेंटा लाइन पर करीब 3 घंटे तक मेट्रो सेवा प्रभावित हुई।
  • 11 फरवरी: इंद्रलोक से पीतमपुरा के बीच एक जगह ओएचई का वायर टूटने के कारण मेट्रो की रेड लाइन पर शाम को पीक टाइम के दौरान ढाई घंटे तक मेट्रो ने रुलाया।

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