Delhi Covid: ‘दिल्ली में कोरोना का कर्व हो चुका है फ्लैट, अब न पैनिक होने की जरूरत है और न डरने की’

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Delhi Covid: ‘दिल्ली में कोरोना का कर्व हो चुका है फ्लैट, अब न पैनिक होने की जरूरत है और न डरने की’

Delhi Covid: ‘दिल्ली में कोरोना का कर्व हो चुका है फ्लैट, अब न पैनिक होने की जरूरत है और न डरने की’

नई दिल्ली: पिछले कुछ समय से दिल्ली में कोरोना के हालात स्थिर बने हुए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओमीक्रोन का सब-वेरिएंट पाया गया है और यह ओमीक्रोन से कई गुणा अधिक संक्रामक है, बावजूद इसके संक्रमण दर और नए मरीजों की संख्या स्थिर है। पिछले 10 दिनों से संक्रमण का ग्राफ फ्लैट पर आ गया है। अब यहां से यह और नीचे जाएगा। यही नहीं, एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि इस बार जिस तरह से कोरोना का असर दिख रहा है, इसे कोई वेव नहीं कह सकते हैं, क्योंकि इसमें न तो सीवियरिटी है और न ही एडमिशन रेट हाई है। 2 से 3 दिनों में मरीज रिवकर हो रहे हैं, इसलिए इसे वेव कहना सही नहीं है।

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सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन के एचओडी डॉक्टर जुगल किशोर ने बताया कि अब कोरोना बढ़ता नजर नहीं आ रहा है। इसके कैरेक्टर को देखें तो इस बार का वेरिएंट काफी संक्रामक है। बहुत ज्यादा तेजी से फैलता है। लेकिन, बहुत तेजी से और छोटे समय के लिए यह सामने आया और अब शांत होता लग रहा है। चूंकि जिस स्तर पर यह संक्रामक है, उसे देखकर यह लग रहा है कि यह फैला होगा, लेकिन इसका असर बहुत कम है, इसलिए इसका इम्पैक्ट नहीं दिख रहा है। इस वजह से जब टेस्ट ज्यादा हो रहे हैं तो नए मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन संक्रमण दर कम हो रहा है। लेकिन जब टेस्ट कम किए जा रहे हैं, तो संक्रमण रेट बढ़ रहा है, क्योंकि लक्षण वाले लोग ही जांच करा रहे हैं।

डॉक्टर जुगल ने कहा कि 10 दिनों की रिपोर्ट को देखकर ऐसा लग रहा है कि संक्रमण की दर अब फ्लैट हो गई है। ग्राफ का आकलन करें तो दिख रहा है कि यह एक ही तरह से बढ़ रहा है, न बढ़ रहा है और न कम हो रहा है। इसका मतलब है कि अब यह और नहीं बढ़ेगा, अगर बढ़ना होता तो संक्रमण दर में और इजाफा हो गया होता। अब यहां से यह नीचे ही जाएगा। इसलिए, आम लोगों को न तो पैनिक होने की जरूरत है और न ही डरने की। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत ज्यादा टेस्ट करने की भी जरूरत नहीं है। जब लक्षण ही नहीं हैं, तो जांच पर पैसा खर्च करना सही नहीं है।

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वहीं, एलएनजेपी के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि इस बार कोविड संक्रमित मरीजों में सीरियसनेस कम है, मौतें बहुत कम हैं, वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है। बहुत ही साधारण असर हो रहा है। ज्यायदातर मरीज को जुकाम व खांसी हो रही है और 2 से 3 दिनों में ठीक हो जा रहे हैं। डॉक्टर सुरेश ने कहा कि इसे वेव नहीं कह सकते। अभी आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार जांचें की जा रही हैं। उम्मीद है कि धीरे-धीरे अब यह और कम होगा।

डॉक्टर सुरेश ने कहा कि पिछली वेव से तुलना करें तो पहले पूरी दिल्ली से मरीज आते थे, इस बार ऐसा नहीं है। क्लस्टर वाइज मरीज आ रहे हैं, यूनिफॉर्म केस नहीं आ रहे। उन्होंने कहा कि अभी एलएनजेपी में सिर्फ 17 मरीज एडमिट हैं। सभी मरीज स्टेबल हैं। 4 मरीज ऑक्सिजन पर हैं, केवल एक मरीज वेंटिलेटर पर है। अस्पताल में अभी कोई भी बच्चा नहीं है।

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