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जानिए कब और कहां-कहां किया जाता है कुंभ मेले का आयोजन

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नई दिल्ली: कुंभ पर्व हिंदू धर्म का मुख्य पर्व है. करोड़ों की तादाद में श्रद्धालु कुंभ पर्व स्थल जैसे हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में स्नान करते है. इस पर्व में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल होते है. इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ भी किया जाता है. कुंभ के मेले को देखने के लिए भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों के लोगों का जमावड़ दिखाई देता है.

बता दें कि हिंदू धर्म में कुंभ का पर्व हर 12 वर्ष के अवधि में, इन्हीं चारों पवित्र नदी के तट पर बनाया जाता है. हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में संगम जहां गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं.

तो चलिए जानते है निम्न जगहों में क्या खासियत है इस पवित्र पर्व की…

हरिद्वार का कुंभ पर्व

हरिद्वार में इस पर्व की धूम काफी देखी जाती है. हरिद्वार हिमालय पर्वत श्रृंखला के शिवालिक पर्वत के नीचे विराजमान है. प्राचीन ग्रंथों में हरिद्वार को गंगाद्वार, मोक्षद्वार, तपोवन और मायापुरी के नाम से भी प्रसिद्ध है. यह हिन्दुओं के लिए एक मुख्य तीर्थस्थान भी है. मेले की तिथि की गणना करने के लिए सूर्य, चन्द्र और बृहस्पति की स्थिति की जरूरत होती है.

नासिक का कुंभ मेला

भारतं में 12 में से एक ज्योतिर्लिंग त्र्यम्बकेश्वर नामक पवित्र शहर में स्थित है. यह स्थान नासिक से 38 किलोमीटर की दूरी पर है. सिंहस्थ कुंभ मेला 12 वर्षों में एक बार नासिक एवं त्रयम्बकेश्वर में आयोजित किया जाता है. ऐतिहासिक प्रमाणों के मुताबिक, नासिक उन चार स्थान में से एक है जहां अमृत कलश से अमृत की कुछ बूंदे गिरी थी. कुंभ मेले में अधिक संख्या में श्रद्धालु गोदावरी के पावन जल में स्नान कर अपनी आत्मा की शुद्धि एवं मोक्ष के लिए प्रार्थना करते हैं.

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इलाहाबाद का कुंभ का पर्व

ज्योतिषशास्त्रियों के मुताबिक, जब बृहस्पति कुम्भ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तब कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है. प्रयाग का यह मेला सभी कुंभ मेलों में सबसे अधिक महत्व रखता है.

उज्जैन का कुंभ पूर्व

यह मध्य प्रदेश की पश्चिमी सीमा पर स्थित है. इंदौर से इसकी दूरी करीब 55 किलोमीटर है. यह शिप्रा नदी पर बसा हुआ है. ये ही नहीं उज्जैन भारत के पवित्र एवं धार्मिक स्थलों में से एक है.

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