Board exam cancelation: CBSE, ICSE और UP बोर्ड…परीक्षा रद्द तो शुल्क कैसा? पैरंट्स असोसिएशन ने कहा वापस करें एग्जाम फीस h3>
हाइलाइट्स:
- यूपी बोर्ड के साथ सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की दसवीं की परीक्षाएं रद्द
- इस फैसले के बाद अभिभावक परीक्षा शुल्क लौटाने की मांग करने लगे हैं
- दलील है कि बोर्ड परीक्षा ही नहीं होगी तो जमा करवाया गया शुल्क लौटाया जाना चाहिए
सैयद सना, लखनऊ
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए यूपी बोर्ड के साथ सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की दसवीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इस फैसले के बाद अभिभावक परीक्षा शुल्क लौटाने की मांग करने लगे हैं। उनकी दलील है कि बोर्ड परीक्षा ही नहीं होगी तो इसके लिए जमा करवाया गया शुल्क लौटाया जाना चाहिए।
सीबीएसई बोर्ड में दसवीं के लिए 1500 रुपये परीक्षा शुल्क लिया जाता है। गोमतीनगर निवासी अभिभावक राकेश सिंह ने कहा कि बीते एक साल से सभी अभिभावकों की आर्थिक स्थिति खराब ही चल रही है। इसके बावजूद अभिभावकों ने फीस जमा की है। ऐसे में बोर्ड को फीस लौटाने पर फैसला करना चाहिए।
पढ़ें: रद्द हुई यूपी बोर्ड 10वीं की परीक्षा, जानिए कब होंगे 12वीं के एग्जाम
फीस लौटाने की मांग
यूपी माध्यमिक शिक्षक संगठन के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल में सरकार ने स्कूलों को ट्रांसपोर्ट फीस न लेने का आदेश दिया है। ऐसा ही नियम बोर्ड पर भी लागू होने चाहिए। परीक्षा नहीं हो रही तो फीस भी लौटाई जाए।
अभिभावकों के काम आएगी रकम
असोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल्स ऑफ आगरा के अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने परीक्षा शुल्क वापसी के लिए बोर्ड के साथ शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है। उनका कहना हैकि बोर्ड को दसवीं की परीक्षा के लिए हर जिले से करोड़ों की रकम मिली है। यह रकम लौटाई जानी चाहिए। आपदा के समय में यह लाखों परिवारों के काम आएगी।
नहीं होगा खर्च
सीबीएसई के पूर्व एग्जामिनेशन कंट्रोलर पवनेश कुमार का कहना है कि परीक्षा रद होने के बाद फीस लौटाने की मांग जायज भी है। उन्होंने बताया कि परीक्षा के लिए पेपर छापने से लेकर कॉपी जांचने तक कई खर्चे होते हैं। परीक्षा न होने पर जो भी न्यूनतम खर्च हुआ है, उसकी कटौती कर बाकी रकम लौटाई जानी चाहिए।
मार्कशीट की जगह सिर्फ सर्टिफिकेट दिए जाएं
अनएडेड प्राइवेट स्कूल असोसिएशन ने उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर मांग की है कि परीक्षाएं रद्द होने पर दसवीं के स्टूडेंट्स को मार्कशीट की बजाय सिर्फ सर्टिफिकेट दिया जाए। असोसिएशन अध्यक्ष अनिल अग्रवाल का कहना है कि अगली कक्षा में प्रमोट होने वाले छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक देने की व्यवस्था की जा रही है। ऐसे में पास सर्टिफिकेट देना ही बेहतर होगा।
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फाइल फोटो
हाइलाइट्स:
- यूपी बोर्ड के साथ सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की दसवीं की परीक्षाएं रद्द
- इस फैसले के बाद अभिभावक परीक्षा शुल्क लौटाने की मांग करने लगे हैं
- दलील है कि बोर्ड परीक्षा ही नहीं होगी तो जमा करवाया गया शुल्क लौटाया जाना चाहिए
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए यूपी बोर्ड के साथ सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की दसवीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इस फैसले के बाद अभिभावक परीक्षा शुल्क लौटाने की मांग करने लगे हैं। उनकी दलील है कि बोर्ड परीक्षा ही नहीं होगी तो इसके लिए जमा करवाया गया शुल्क लौटाया जाना चाहिए।
सीबीएसई बोर्ड में दसवीं के लिए 1500 रुपये परीक्षा शुल्क लिया जाता है। गोमतीनगर निवासी अभिभावक राकेश सिंह ने कहा कि बीते एक साल से सभी अभिभावकों की आर्थिक स्थिति खराब ही चल रही है। इसके बावजूद अभिभावकों ने फीस जमा की है। ऐसे में बोर्ड को फीस लौटाने पर फैसला करना चाहिए।
पढ़ें: रद्द हुई यूपी बोर्ड 10वीं की परीक्षा, जानिए कब होंगे 12वीं के एग्जाम
फीस लौटाने की मांग
यूपी माध्यमिक शिक्षक संगठन के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल में सरकार ने स्कूलों को ट्रांसपोर्ट फीस न लेने का आदेश दिया है। ऐसा ही नियम बोर्ड पर भी लागू होने चाहिए। परीक्षा नहीं हो रही तो फीस भी लौटाई जाए।
अभिभावकों के काम आएगी रकम
असोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल्स ऑफ आगरा के अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने परीक्षा शुल्क वापसी के लिए बोर्ड के साथ शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है। उनका कहना हैकि बोर्ड को दसवीं की परीक्षा के लिए हर जिले से करोड़ों की रकम मिली है। यह रकम लौटाई जानी चाहिए। आपदा के समय में यह लाखों परिवारों के काम आएगी।
नहीं होगा खर्च
सीबीएसई के पूर्व एग्जामिनेशन कंट्रोलर पवनेश कुमार का कहना है कि परीक्षा रद होने के बाद फीस लौटाने की मांग जायज भी है। उन्होंने बताया कि परीक्षा के लिए पेपर छापने से लेकर कॉपी जांचने तक कई खर्चे होते हैं। परीक्षा न होने पर जो भी न्यूनतम खर्च हुआ है, उसकी कटौती कर बाकी रकम लौटाई जानी चाहिए।
मार्कशीट की जगह सिर्फ सर्टिफिकेट दिए जाएं
अनएडेड प्राइवेट स्कूल असोसिएशन ने उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर मांग की है कि परीक्षाएं रद्द होने पर दसवीं के स्टूडेंट्स को मार्कशीट की बजाय सिर्फ सर्टिफिकेट दिया जाए। असोसिएशन अध्यक्ष अनिल अग्रवाल का कहना है कि अगली कक्षा में प्रमोट होने वाले छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक देने की व्यवस्था की जा रही है। ऐसे में पास सर्टिफिकेट देना ही बेहतर होगा।
फाइल फोटो

