Corona Cases in India: कोरोना ने क्यों पकड़ी रफ्तार, क्या आएगी तीसरी लहर, अनुमान लगाना कितना मुश्किल
देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच ही तीसरी लहर की बात शुरू हो गई है। इस पर एक्सपर्ट की अलग- अलग राय भी सामने आ रही है। देश में कोरोना की तीसरी लहर कब आएगी इसका अनुमान कब लगाया जाना चाहिए। आशुतोष शर्मा,सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का कहना है कि तीसरी लहर और इसके आगे की बात सिर्फ अनुमान लगाने की बात नहीं है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कोरोना के केस कैसे अचानक तेजी से बढ़ गए, वैक्सीनेशन की रफ्तार और कोरोना वायरस को लेकर आशुतोष शर्मा ने अपनी राय रखी ।
दूसरी लहर का अंत कब होगा
दूसरी लहर कब जाएगी इसको लेकर कोई अनुमान है। इस बारे में आशुतोष शर्मा का कहना है कि कई तरीकों से इसको लेकर अनुमान लगाया जाता है। उदाहरण के तौर यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, अशोका यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट जो संकेत देते है कि पीक केस रोजाना के हिसाब से 8 लाख, 5 से 6 लाख और 4 लाख मई शुरुआत से अंत तक रहेगा। यह जो मॉडल है वो संकेत दे रहा है कि पीक के दो महीने बाद केस वहीं पहुंच जाएंगे जो पहली लहर के समाप्त होने के वक्त थे। हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाना, आइसोलेशन, वैक्सीनेशन के साथ ही वायरस के म्यूटेशन पर बहुत कुछ निर्भर करता है।
क्या सबको लग पाएगी वैक्सीन
क्या वो क्षमता है जिससे कि सभी अधिक से अधिक आबादी को वैक्सीन लग जाए। इस बारे में आशुतोष शर्मा का कहना है कि वैक्सीन की उत्पादन क्षमता को कई तरीकों से बढ़ाया जा रहा है। वैक्सीन बनाने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, कुछ शर्तों में छूट दी जा रही है। साथ ही विदेश की वैक्सीन को मान्यता दी गई है। देश में कई और वैक्सीन तैयार की जा रही है जिसे जल्द मान्यता मिल सकती है।
अनुमान कहां तक सही
ऐसा कोई मैथमेटिकल मॉडल नहीं है जिससे आपदा की सटीक जानकारी हो सके। अनुमान सिर्फ जो इनपुट मिल रहे उस आधार पर ही लगाया जा सकता है। वायरस का बिहेयिवर कैसा है, कैसे बदल रहा है इस पर अनुमान लगाया जा सकता है। कई सारे टॉप वैज्ञानिक, जर्नल में पब्लिश लेख भारत में कोरोना की पहली लहर में मौत के आंकड़ों का अनुमान लगाया। जैसा अनुमान लगाया गया वैसा नहीं हुआ।
कैसे तेजी से फैल गया वायरस
दिल्ली में जनवरी 15 से जनवरी 23 के बीच पांचवां सीरोलॉजिकल सर्वे हुआ था जिसमें 56 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिला। 28 हजार पॉजिटिव लोगों का यह सैंपल था। यह मामले घटने के संकेत थे। लेकिन म्यूटेंट वायरस की वजह से मामले तेजी से बढ़ गए।
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