भारतीय इतिहास में वो शासक जो दानी थे

1860
कर्ण
कर्ण

भारतीय भूमि प्राचीन काल से ही दयालु और परोपकारी लोगी की भूमि रही है. यहां पर दान देने की प्रथा बहुत पुरानी है. जिसमें शासक बढ़-चढकर भाग लेते थे. वैसे तो शासको के दान का वर्णन आमतौर पर मिल जाता है, लेकिन कुछ शासक इतने बड़े दानी भी थे. जिनकी पहचान ही उनके दान करने के गुण से होती है. उन्ही में से कुछ के बारे में जानते हैं.

दानवीर कर्ण

उत्तरप्रदेश में आयोजित होने वाले कुंभ के मेले के बारे में तो आपने सुना ही होगा. ऐसा बताया जाता है कि प्राचीन भारत के सम्राट हर्षवर्धन भी वहाँ आते थे और दान करते थे. इतिहास में उनका नाम दान देने के नाम से भी प्रसिद्ध है.ऐसा बताया जाता है कि वे कुंभ के दौरान 75 दिनों तक तब तक दान करते थे. जब तक उनके पास सब कुछ खत्म नहीं हो जाता था. यहाँ तक की वो अपने राजसी वस्त्र भी दान कर देते थे.

बलि और वामन

वामन और बलि के बारे में तो आपने सुना ही होगा. बलि भी बहुत दानी राजा था. जिसके बारे में बताया जाता है कि वो अपना संकल्प पूरा करने के लिए कुछ भी दान कर सकता था. उसने तीनों लोको को जीत लिया था. ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण करके बलि से तीन कदम धरती मांगी थी. दो कदम में पृथ्वी और स्वर्ग को माप लिया तथा शेष दान के लिए बलि ने अपना मस्तक को नपवा दिया.

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महाभारत में भी दानवीर के नाम से प्रसिद्धि माने वाले राजा कर्ण का वर्णन है. दुर्य़ोधन का मित्र होने के कारण उसने कर्ण को अंग देश का शासक बनाया. ऐसा बताया जाता है कि सूर्य पूजा के समय उनसे कोई कुछ भी मांग लेता था, तो वो मना नहीं करते थे. इंद्र ने सूर्य पुत्र कहलाने वाले कर्ण से छल से उनके कवच-कुंडल मांग लिए थे. जो कर्ण ने हंस्ते-हंस्ते दान कर दिए.