शिक्षक भर्ती में आरक्षण का मुद्दा: मंत्री संजय निषाद के घर पहुंचे अभ्यर्थी, मिला समाधान का भरोसा
उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। न्याय की मांग को लेकर शनिवार को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए अभ्यर्थियों ने लखनऊ में…
उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। न्याय की मांग को लेकर शनिवार को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए अभ्यर्थियों ने लखनऊ में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के आवास पर प्रदर्शन किया। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, मंत्री ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनकी मांगों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए परिणाम को संशोधित करने की मांग की। इस दौरान उन्होंने 'निषाद चाचा बाहर आओ' जैसे नारे भी लगाए। मौके पर पुलिस बल भी तैनात रहा।
मंत्री ने मानी नाइंसाफी की बात
अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद डॉ. संजय निषाद ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में भी इन अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी होने की बात कही गई है। उन्होंने कहा, “इंसाफ मांगना हर आदमी का हक है और हम लोगों ने इंसाफ दिलाने का संकल्प लिया है।”
उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले को मुख्यमंत्री, सरकार, कैबिनेट और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर उठाकर विसंगतियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अभ्यर्थियों को उनका वाजिब हक मिल सके। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या यह एक घोटाला है, तो उन्होंने जांच से पहले इसे घोटाला कहने से परहेज किया और कहा, “जांच में जब आ जाए कि यह गलत हुआ है, तब उसको हम दूसरा शब्द दे सकते हैं। लेकिन तब तक कहते हैं कि त्रुटियां होती हैं, बहुत ऐसे होते हैं विसंगतियां होती हैं।”
'आंदोलन से ही मिलता है हक'
कैबिनेट मंत्री ने प्रदर्शन करने के अभ्यर्थियों के अधिकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी मांग उठाने और आंदोलन करने का अधिकार है। नहीं मांगेंगे, नहीं आंदोलन करेंगे तो कोई सुनने वाला थोड़ी है। आंदोलन से ही देश आजाद हुआ, आंदोलन से ही हक मिलता है।” उन्होंने आरक्षण को पिछड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक संवैधानिक व्यवस्था बताया।
इस मुलाकात के दौरान टीजीटी-पीजीटी भर्ती में पूर्व सैनिकों को मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण का मुद्दा भी उठाया गया, जिस पर मंत्री ने आगे चर्चा करने की बात कही। मंत्री के आश्वासन के बाद अभ्यर्थियों ने अपना धरना खत्म कर दिया और अब वे सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



