पूर्व न्यायाधीशों के पत्र पर NDA का समर्थन, कहा- संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा विपक्ष
देश के 42 पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लिखे गए एक खुले पत्र पर एनडीए के घटक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस पत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है…
देश के 42 पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लिखे गए एक खुले पत्र पर एनडीए के घटक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस पत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने इस पत्र का समर्थन करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए एक आवश्यक चेतावनी बताया है और विपक्षी दलों की आलोचना की है।
भाजपा ने विपक्ष के रवैये को बताया 'पैटर्न'
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "कांग्रेस और विपक्ष जिस तरह से संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रहे हैं, वह एक पैटर्न बन गया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि जब फैसले विपक्ष के पक्ष में आते हैं तो वे इसे लोकतंत्र की जीत बताते हैं, लेकिन जब फैसले उनके खिलाफ जाते हैं तो वे संस्थाओं पर ही सवाल उठाने लगते हैं।
सरावगी के अनुसार, "पूरा देश विपक्ष और कांग्रेस के गलत व्यवहार को देख रहा है। इसी कारण 42 पूर्व जजों ने कांग्रेस और विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के खिलाफ चेतावनी देते हुए एक खुला पत्र लिखा है।" उन्होंने कहा कि यह पत्र दर्शाता है कि देश के प्रबुद्ध नागरिक विपक्ष के इस रवैये से चिंतित हैं और इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक मानते हैं।
जदयू और अन्य नेताओं का भी समर्थन
बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने भी पूर्व न्यायाधीशों के पत्र का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "पूर्व जजों ने अपने पत्र में अच्छी भावना व्यक्त की है। चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवाल संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा हैं।" उन्होंने न्यायाधीशों को जानकार बताते हुए उनकी भावना को बिल्कुल सही ठहराया और विपक्ष पर अराजकता फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
वहीं, जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने इस पत्र को 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा, "बड़ी संख्या में रिटायर्ड जजों ने इस तरह से प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी नेताओं को यह समझना चाहिए कि जनता और देश के बुद्धिजीवी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने की उनकी कोशिशों को देख रहे हैं।" रंजन ने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र में विश्वास रखने वालों का 'इंडिया' ब्लॉक से भरोसा कम हो रहा है।
इनपुट: IANS



