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1984 सिख दंगे: सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने पीड़ितों को किया याद, सम्मानजनक रोजगार और न्याय की मांग दोहराई

1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर राज्यसभा सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी ने पीड़ितों के परिवारों के लिए सम्मानजनक रोजगार और लंबित न्याय की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है। नई दिल्ली के तिलक नगर…

1984 सिख दंगे: सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने पीड़ितों को किया याद, सम्मानजनक रोजगार और न्याय की मांग दोहराई
(फोटो: IANS)

1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर राज्यसभा सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी ने पीड़ितों के परिवारों के लिए सम्मानजनक रोजगार और लंबित न्याय की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है। नई दिल्ली के तिलक नगर स्थित शहीद गंज गुरुद्वारा में आयोजित एक प्रार्थना सभा में उन्होंने कहा कि 42 साल बाद भी पीड़ित परिवारों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी न्याय का इंतजार कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदली है।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साहनी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 1 नवंबर 1984 को एक 'बेहद दुखदायी दिन' बताया, जब हजारों निर्दोष सिखों का नरसंहार हुआ था। उन्होंने व्यथित होकर बताया कि उनके अपने परिवार के चार सदस्यों को उस दौरान जिंदा जला दिया गया था।

सुनियोजित नरसंहार, अनसुलझे सवाल

सांसद साहनी ने इस हिंसा को अचानक भड़का दंगा नहीं, बल्कि एक 'सोची-समझी साजिश' करार दिया। उन्होंने चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रातों-रात सिख समुदाय के हर घर को चिन्हित किया गया था, चाहे वे किसी गली में हों या किसी इमारत की पहली मंजिल पर। उन्होंने कहा, “किसी को बेवकूफ बनाना आसान है, लेकिन सच्चाई यह है कि सूचियां पहले से तैयार थीं।”

उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे दंगाइयों के पास एक जैसा सफेद पाउडर, जिससे आग लगती थी, और एक जैसी लोहे की रॉड पहुंचीं। उन्होंने कहा, "31 अक्टूबर की रात को ही रॉड कैसे बंट गईं, पाउडर कैसे आ गया और जेलों से अपराधियों को कैसे छोड़ दिया गया।" साहनी ने इस बात पर जोर दिया कि आज तक इस बात की कोई जांच नहीं हुई कि यह पाउडर किसने, कब और कैसे बांटा।

अधूरे वादे और पीड़ितों का संघर्ष

सांसद ने पीड़ित परिवारों की मौजूदा मुश्किलों पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि दंगा पीड़ितों को जो फ्लैट दिए गए थे, उनकी कीमत 27,000 रुपये रखी गई थी। पीड़ितों ने 3,000 रुपये जमा भी किए, लेकिन अब उन पर लाखों का ब्याज चढ़ा दिया गया है और फ्लैट आज तक उनके नाम पर ट्रांसफर नहीं हुए हैं।

बिजली बिल और नौकरियों के वादों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2013 तक बिल माफ थे, लेकिन अब गरीब पीड़ितों से वसूली की जा रही है, जबकि उन्हें पुराने बिल माफ करने और 600 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया गया था। इसी तरह, 2,600 से अधिक परिवारों की सूची के बावजूद केवल 47-48 बच्चों को ही नौकरी मिली। उन्होंने कहा कि 15 साल कांग्रेस और उसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार रही, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए।

विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि उन्होंने उपराज्यपाल (LG) से बात की है और लिखित में सारी जानकारी दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन पीड़ितों के साथ न्याय नहीं हुआ, तो वे खुद उनके साथ धरने और भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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