BRICS का भविष्य: भारत की 'मानव-केंद्रित' अध्यक्षता और चीन की धीमी अर्थव्यवस्था पर विशेषज्ञों की राय
ब्रिक्स संवाद के दूसरे सत्र के दौरान भारत के पूर्व शेरपाओं ने समूह के भविष्य और उसमें भारत की भूमिका पर महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बातचीत में एक ओर जहाँ भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन…
ब्रिक्स संवाद के दूसरे सत्र के दौरान भारत के पूर्व शेरपाओं ने समूह के भविष्य और उसमें भारत की भूमिका पर महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बातचीत में एक ओर जहाँ भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए 'मानव-केंद्रित' दृष्टिकोण पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर चीन की धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था को समूह के लिए एक अहम पहलू बताया गया।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव और राजदूत दम्मू रवि ने प्रधानमंत्री की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए बताया कि आगामी शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय लचीलापन, नवाचार और स्थिरता पर आधारित होगा। उन्होंने कहा, "जैसा कि प्रधानमंत्री पहले ही परिकल्पना कर चुके हैं, ब्रिक्स के लिए प्राथमिकता मानव-केंद्रित और जनता-प्रथम होनी चाहिए। यह भारत का व्यापक विषय होने जा रहा है, जिसके तहत पूरा एजेंडा लचीलापन, रचनात्मकता, नवाचार और स्थिरता के इर्द-गिर्द घूमेगा।"
चीन की चुनौती और भारत की उभरती भूमिका
इस संवाद में चीन की आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर विमर्श हुआ। ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और पूर्व ब्रिक्स शेरपा, राजदूत संजय भट्टाचार्य ने इस बात पर प्रकाश डाला कि चीन लंबे समय से ब्रिक्स के विकास में एक प्रभावशाली शक्ति रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा, "आज चीन की अर्थव्यवस्था गिर रही है। उसकी अर्थव्यवस्था धीमी हो गई है और उसमें संरचनात्मक कमजोरियां हैं।"
प्रोफेसर भट्टाचार्य ने इसके विपरीत भारत की मजबूत स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा, "शायद ब्रिक्स आंदोलन में उभरता सितारा वास्तव में भारत है, क्योंकि भारत में मजबूत आर्थिक विकास है, साथ ही उस मार्गदर्शन को जारी रखने की क्षमता और गति भी है।"
भारत के लिए एक सुनहरा अवसर
दम्मू रवि ने विश्वास जताया कि यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक शानदार अवसर होगा। उन्होंने कहा, "मेरे विचार से, 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए इस जन-केंद्रित विषय के इर्द-गिर्द एजेंडा बनाने का एक शानदार अवसर है। जब विभिन्न ब्रिक्स देशों के नेता आएंगे, तो यह अपने आप में, मेरे विचार से, एक बड़ी सफलता होगी।" वहीं, संजय भट्टाचार्य ने यह भी जोड़ा कि ब्रिक्स को अक्सर डॉलर के घटते महत्व के संदर्भ में देखा जाता रहा है।
इनपुट: IANS



