INDIA गठबंधन की दिल्ली महारैली: मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे समेत ये हैं चार प्रमुख मांगें
कांग्रेस और INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक 'महारैली' करने जा रहे हैं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। महिला कांग्रेस…
कांग्रेस और INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक 'महारैली' करने जा रहे हैं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, लांबा ने दावा किया कि 'वोट बचाओ, देश बचाओ, लोकतंत्र बचाओ' नारे के साथ हो रही इस रैली में देशभर से दस लाख लोग शामिल होंगे।
लांबा ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार 30 अक्टूबर तक ज्ञानेश कुमार को पद से नहीं हटाती है, तो रैली निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी। उन्होंने कहा कि यह सुझाव राहुल गांधी ने दिया था कि CEC को हटाने पर रैली वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।
रैली की मुख्य मांगें क्या हैं?
अलका लांबा ने रैली की चार प्रमुख मांगों का विवरण दिया। पहली और सबसे अहम मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों ने भी पिछले दस महीनों में 14 पत्र लिखकर CEC पर पक्षपातपूर्ण फैसले लेने और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं करने का आरोप लगाया है।
दूसरी मांग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को हटाकर मतपत्र (बैलेट पेपर) से चुनाव कराने की है। तीसरी मांग के तौर पर विपक्ष चाहता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को फिर से शामिल किया जाए। चौथी मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रोकने से जुड़ी है, जिसका कांग्रेस विरोध कर रही है।
मतदाता सूची और अन्य आरोप
लांबा ने आरोप लगाया कि एसआईआर का इस्तेमाल कर देशभर में लगभग 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिन्हें "घुसपैठिया या बांग्लादेशी" बताया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 41 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए, जबकि वे भारतीय नागरिक हैं और वहीं रहते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी पात्र नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।
इसके अलावा, अलका लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस नेताओं पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा को नीतिगत मुद्दों पर बात करनी चाहिए, न कि परिवार और महिलाओं से जुड़े व्यक्तिगत संदर्भों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने एससीओ बैठक में पाकिस्तान की भागीदारी, पठानकोट हमले की जांच में आईएसआई को बुलाने और अमेरिकी दबाव में फैसले लेने जैसे मुद्दों पर भी केंद्र सरकार की आलोचना की।
इनपुट: IANS



