मिसाइल गिरी जहाज तबाह, होर्मुज में 30 दिन फंसे अशोक: एक हफ्ते का खाना पूरे महीने चलाया, 300 जहाज अब भी जंग के बीच h3>
11 सेकेंड का एक वीडियो है। इसमें एक जहाज है, जिसके आगे वाले हिस्से से धुंआ उठ रहा है। वीडियो बना रहा शख्स कैमरा घुमाकर दूर एक और जहाज दिखाता है, जो शायद नेवी का है। भारतीय नाविकों के संगठन फॉरवर्ड सीमैन्स यूनियन ऑफ इंडिया का दावा है कि ये जहाज भारत क
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अमेरिका और ईरान जंग के बीच बीते 101 दिनों से होर्मुज की यही हालत है। करीब 167 किमी लंबे होर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा 33 किमी चौड़ा है। जंग से पहले हर रोज दुनिया में तेल ट्रांसपोर्ट करने वाला 5वां शिप यहीं से गुजरता था।
ओडिशा के मरीन ऑफिसर अशोक दीक्षित 27 फरवरी को कतर से LPG का जहाज लेकर निकले थे। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ गई। अशोक का जहाज होर्मुज में फंस गया। 30 दिन वहीं फंसा रहा। दैनिक NEWS4SOCIALने उनके जरिए जाना कि होर्मुज से निकलना कितना खतरनाक है और उनका क्या अनुभव रहा। अशोक का दावा है कि अब भी वहां 300 से ज्यादा जहाज फंसे हैं। इनमें 20 से 22 भारत के हैं। पूरी बातचीत…
सवाल: अचानक जंग शुरू होने से होर्मुज पार करने में क्या परेशानी आई?
जवाब: जंंग शुरू होते ही हम लोग फंस गए। बाहर निकलने का सवाल ही नहीं था। एक जगह एंकर डालकर खड़े हो गए। कोई मूवमेंट नहीं। 30 दिन ऐसे ही खड़े रहे। होर्मुज पार करने की परमिशन नहीं थी। बाकी तो ये इंटरनेशनल बॉर्डर है। आम दिनों में कोई दिक्कत नहीं होती। आराम से एंट्री-एग्जिट होता है।
अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, दुनिया के कुल पेट्रोलियम में से करीब 20% होर्मुज से होकर गुजरता है। जंग से पहले तक ईरान इसी रूट से रोजाना 17 लाख बैरल पेट्रोलियम निर्यात करता था।
सवाल: होर्मुज पार करते वक्त सबसे बड़ा खतरा क्या था, ईरानी सेना, समंदर में बिछी सुरंग या आसमान से आते ड्रोन? जवाब: पूरा पर्शियन गल्फ जल रहा है। हम बीच में खड़े थे और कुछ भी हो सकता था। चाहे मिसाइल हो, ड्रोन हो या सिंगल फायरिंग, डर तो रहता ही है। मेरे 15-17 साल के करियर में मैंने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी। कभी नहीं सोचा था कि इस तरह फंसना पड़ेगा।
अब तो काफी बेहतर स्थिति है। मार्च में तो इतनी फायरिंग हो रही थी कि एक दिन में 6 देशों पर अटैक हो रहा था। वहां फंसे लोग जैसा बता रहे हैं, उस हिसाब से अब खतरा कम है। बस आना-जाना बंद है।
सवाल: वहां फंसे थे, तो आपकी मेंटल सिचुएशन कैसी थी, खाने-पीने का इंतजाम कैसे होता था?
जवाब: सीनियर अफसरों की जिम्मेदारी होती है कि बहुत पैनिक न हो। हम पैनिक होंगे, तो जूनियर ज्यादा डरेंगे। उनसे बार-बार बोलते थे कि सब ठीक हो जाएगा। मर्जी से काम करो। सब अपने को बिजी रखो। कोई प्रेशर मत लो। सबसे ज्यादा प्रेशर फैमिली का होता है। वे न्यूज देख रहे हाेते हैं, तो डरकर सवाल करते हैं।
मैं गल्फ इंडिया के लिए काम करता हूं। गल्फ में लोड करते हैं, इंडिया में डिस्चार्ज करते हैं। अगर आप इंडिया आएंगे तो 4 से 5 दिन गुजरात, मुंबई, मैंगलोर के लिए मिलेंगे। ईस्ट काेस्ट जाएंगे तो 8 से 10 दिन लेंगे। मतलब 4 से 10 दिन के बीच सफर होता है। हम इतने दिन के अलावा एक्स्ट्रा खाना-पानी भी रखते हैं।
हमें गल्फ से लोड करके इंडिया में ईस्ट कोस्ट में डिस्चार्ज करना था। हमने 7-8 दिन का खाना ले लिया। फिर होर्मुज में फंस गए। दिन बीतने लगे तो हमने राशनिंग शुरू कर दी। खाने-पीने की चीजों पर कंट्रोल किया। खाना सभी को मिले, लेकिन बर्बाद न हो।
रोज सामान चेक करते थे। वॉशिंग मशीन दो दिन में एक बार चलाते हैं, उसे हफ्ते में एक बार कर दिया। ऐसे ही पूरा टाइम निकाला। हमारा खाना खत्म होने वाला था। किस्मत अच्छी थी कि उससे पहले ही हम वहां से निकल गए।
सवाल: होर्मुज में जिस जगह जहाज फंसे, वो एरिया कैसा है? इसे पार करने में कितना टाइम लगा?
जवाब: एक तरफ ईरान कोस्ट और दूसरी तरफ ओमान कोस्ट है। ओमान की तरफ पहाड़ हैं। ईरान का तट सीधा है। ये करीब 32 से 36 किमी का एरिया है।
यहां आप कहीं से भी नहीं जा सकते। इसके लिए एक ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम, यानी TSS है। ये एक तरह का ट्रैक है। इसे इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन रिकमंड करता है। अगर आप ट्रैक से बाहर जाते हैं और कुछ हो जाता है, तो इंश्योरेंस नहीं मिलेगा।
TSS पार करने में करीब 3 घंटे लगते हैं। जंग चल रही थी, इसलिए डेंजर जोन पार करने में करीब 22 घंटे लग गए। 5 से 6 घंटे तो बहुत खतरनाक थे। कहीं जहाज जल रहे थे। मिसाइलें गिरी थीं। कहीं टूटे जहाज खड़े हैं। गल्फ ऑफ ओमान पहुंचने के बाद हम सेफ हो गए।
जलते जहाज का ये विजुअल अशोक दीक्षित ने दिया है। मिसाइल या ड्रोन के अटैक से जहाज पूरी तरह बर्बाद हो गया।
सवाल: क्या सफर के दौरान ईरानी या अमेरिकी सेना की तरफ से रेडियो पर वॉर्निंग आई?
जवाब: हां, सफर के दौरान रेडियो पर चेतावनी आती थीं। जिस इलाके से हमें होर्मुज पार करना था, उसके आसपास हालात बहुत खराब थे। एक जहाज पर हमला हुआ। इसके बाद रेडियो पर ऐलान किया गया – ‘Hormuz is currently closed, no ships are allowed to transit.’ 28 फरवरी को भी ईरान की तरफ से रेडियो पर चेतावनी दी गई थी कि कोई भी जहाज इस रूट से आगे न बढ़े। उनका लहजा काफी सख्त होता था।
सवाल: क्या कभी आपके आसपास अटैक हुआ था?
जवाब: 19 फरवरी को कतर के LNG टर्मिनल पर अटैक हुआ था। मैं और मेरा एक जूनियर बातें कर रहे थे, तभी हमारे करीब ही मिसाइल गिरी। कतर ने 2-3 मिसाइल इंटरसेप्ट की थीं। उनके टुकड़े हमारे आसपास के कुछ शिप पर गिरे थे। कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन जहाजों को नुकसान हुआ। कतर नेवी ने सभी को फोन करके पूछा भी कि आपका नुकसान हुआ है क्या?
सवाल: होर्मुज पार करते वक्त किन कानूनों का पालन करना पड़ता है?
जवाब: बहुत से इंटरनेशनल नियम और नेविगेशन प्रोसेस का पालन करना पड़ता है। होर्मुज नेविगेशन के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। जहाजों को तय नेविगेशन चैनल का ही इस्तेमाल करना पड़ता है। आने और जाने वाले जहाजों के लिए अलग-अलग ट्रैक होते हैं।
होर्मुज में एंट्री से पहले हर शिपिंग कंपनी के अपने सुरक्षा नियम भी होते हैं। ये कंपनी के मुताबिक, अलग-अलग हो सकते हैं। सफर के दौरान जहाज के सभी अधिकारियों और क्रू को अलर्ट रहना पड़ता है। इंजन को हमेशा रेडी पोजीशन में रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर जहाज को तुरंत कंट्रोल किया जा सके।
सवाल: भारत सरकार या इंडियन नेवी की तरफ से कोई मदद मिली?
जवाब: हां, इंडियन नेवी की वजह से ही हम बाहर निकल पाए। उन्होंने 28 मार्च को हमसे बात की। 29 मार्च की सुबह हम वहां से निकल पाए। 30 दिन फंसे रहने के बाद हमने इंडियन नेवी को देखा, तो सब बहुत खुश हुए।
ईरान ने इजराइल पर हमले रोके, अमेरिका सीजफायर की कोशिश में जुटा अमेरिका और ईरान के बीच 39 दिन की जंग के बाद 7-8 अप्रैल को पहले अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी। दो महीने बाद ईरान ने 7 जून की रात इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह हमला लेबनान में इजराइली हमले के जवाब में किया गया। इजराइल के मुताबिक, अप्रैल में सीजफायर के बाद यह पहली बार है, जब ईरान ने उस पर मिसाइल हमला किया है।
8 जून को ईरान ने कहा कि उसने फिलहाल इजराइल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोक दी है। हालांकि, चेतावनी भी दी कि इजराइल ने फिर से लेबनान पर हमला किया तो पहले से ज्यादा सख्त जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका युद्धविराम और शांति समझौते की कोशिशों में जुटा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि इजराइल और ईरान दोनों संघर्ष रोकना चाहते हैं और अंतिम समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है।
……………………… ईरान-अमेरिका जंग पर ये खबर भी पढ़ें होर्मुज में जलते जहाज से 24 भारतीयों का रेस्क्यू, भारत ने नागरिकों को ईरान छोड़ने को कहा
होर्मुज स्ट्रेट के पास एक तेल टैंकर में आग लगने के बाद उस पर सवार 24 भारतीय नाविकों को इंडियन नेवी ने बचा लिया। शुरुआती रिपोर्टों में जहाज पर हमले की आशंका जताई गई, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। ईरान और इजराइल के बीच बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द वहां से निकलने की सलाह दी है। पढ़ें पूरी खबर…





