मप्र में एसआईआर के बाद बढ़ी परेशानी: 83 लाख वोटर उलझन में… वोटर लिस्ट व ईपिक में अलग-अलग बूथ – Bhopal News h3>
चुनाव के दौरान मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए स्वीप जैसी कई गतिविधियां की जाती हैं, लेकिन आने वाले चुनाव में भोपाल सहित प्रदेश के लाखों मतदाताओं को मतदान से पहले ही भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बाद मप्र मे
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सबसे बड़ी परेशानी यह है कि मतदाताओं के वोटर(ईपिक) कार्ड और नई वोटर लिस्ट में अलग-अलग पोलिंग बूथ दर्ज हैं। ऐसे में वोटर कार्ड देखकर मतदान केंद्र पहुंचने पर नाम वहां नहीं मिल सकता। इस बीच 10 हजार नए मतदाताओं के नाम पहली बार वोटर लिस्ट में जोड़े जाएंगे, जिनके लिए नए ईपिक कार्ड जारी होंगे। नाम जोड़ने के लिए 22 जनवरी शाम 5 बजे तक आवेदन किया जा सकता है।
भोपाल के 2 लाख से ज्यादा वोटर्स के बूथ बदल दिए हैं, मप्र में 6934 नए बूथ
मतदान केंद्र क्यों बदले गए?
चुनाव आयोग ने हर पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1200 वोटर्स रखने की हिदायत दी थी। भोपाल में कई बूथों पर 1500 से ज्यादा वोटर्स थे, इसलिए नए बूथ बनाए गए और वोटर्स शिफ्ट किए गए।
कितने मतदान केंद्र बदले?
भोपाल में पहले- 2022 पोलिंग बूथ थे, अब 2289 हैं। मप्र में पहले- 65 हजार+ पोलिंग बूथ थे। अब यह संख्या 71930 हो गई है।
कितने वोटर्स प्रभावित हुए?
मप्र में 83.20 लाख वोटर्स के पोलिंग बूथ बदल गए हैं। भोपाल में ऐसे वोटर्स की संख्या 2 लाख से ज्यादा है। इन्हीं वोटर्स के सामने परेशानी है कि वोटर लिस्ट व ईपिक में अलग-अलग बूथ हैं।
ईपिक में नई जानकारी नहीं?
चुनाव आयोग ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि बदले हुए पोलिंग बूथ की जानकारी ईपिक कार्ड में कैसे और कब अपडेट होगी। अफसरों के पास भी फिलहाल इसका जवाब नहीं है।
नाम खोजने में दिक्कत क्यों?
23 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2289 मतदान केंद्रों के हिसाब से बनी है। इस कारण अधिकतर वोटर्स को अपने पुराने बूथ पर नाम नहीं मिल रहा।
चुनाव के दिन क्या-क्या दिक्कतें आ सकती हैं?
वोटर पुराने बूथ पर पहुंच सकता है। सही बूथ खोजने में समय बर्बाद होगा। मतदान का समय छूट सकता है। बीएलओ पर भारी दबाव बनेगा। अव्यवस्था होगी।
कितने नाम काटे गए?
एसआईआर के बाद भोपाल में 4 लाख 38 हजार 876 नाम हटाए गए। इसमें 1.16 लाख से ज्यादा नो-मैपिंग वोटर्स शामिल हैं




