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मथुरा में मनाई गीता जयंती: श्री कृष्ण जन्मस्थान पर किया पूजन,वृंदावन में निकाली गई शोभायात्रा – Mathura News

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मथुरा में मनाई गीता जयंती:  श्री कृष्ण जन्मस्थान पर किया पूजन,वृंदावन में निकाली गई शोभायात्रा – Mathura News

मथुरा में मनाई गीता जयंती: श्री कृष्ण जन्मस्थान पर किया पूजन,वृंदावन में निकाली गई शोभायात्रा – Mathura News

गीता जयंती के अवसर पर वृंदावन में शोभायात्रा निकाली गई

गीता जयंती के अवसर पर मथुरा वृंदावन में अलग अलग जगह कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मथुरा में श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर में स्वर्ण मंडित गीता जी का पूजन किया गया वहीं वृंदावन में शोभायात्रा निकाली गई। इस अवसर पर साधु संत और धर्माचार्यों ने एक स

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मंत्रों के साथ किया पूजन

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि श्रीम‌द्भगवतगीता जी के पुरोधा भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर गीता-जयन्ती महोत्सव का शुभारंभ मंगल ध्वनि, मंत्रोच्चारण, पुष्पार्चन के साथ हुआ। स्वर्ण मंडित श्रीम‌द्भागवत जी के सानिध्य में विराजित श्रीम‌द्भगवतगीता जी का पूजन, अभिषेक शास्त्रीय मर्यादाओं, वैदिक परंपराओं एवं मान्यताओं के साथ किया गया। ऐसे दिव्य महोत्सव में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु तो सम्मिलित हुए ही साथ ही देश-विदेश से पधारे हजारों श्रद्धालु भी इस महोत्सव के दर्शन कर धन्य हो उठे।

श्री कृष्ण जन्मस्थान पर गीता जी का पूजन किया गया

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गीता जी के 18 अध्याय में है जीवन का सार

कपिल शर्मा ने बताया कि गीता जी के प्रथम छः अध्यायों में कर्म की प्रधानता, मध्य के छः अध्यायों में भक्ति की प्रधानता और अन्त के छः अध्यायों में ज्ञान की व्याख्या की गयी है। सात सौ श्लोकों एवं अठ्‌ठारह अध्याय को धारण करने वाली श्रीम‌द्भगवतगीता मात्र एक पुस्तक नहीं है अपितु भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा उच्चारित नादब्रह्म का जीवंत स्वरूप है। साथ ही कर्म भक्ति और ज्ञान की एक त्रिवेणी जिसका अवगाहन कर मानव जीवन के परम लक्ष्य और शान्ति की प्राप्ति संभव है। आज अहम की प्रधानता के कारण संपूर्ण विश्व अशान्त और व्याकुल है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट कहा है कि ममकार के ज्वर से मुक्त हुए बिना मानव जीवन में शान्ति संभव नहीं है और वह श्रीमद्‌भगवतगीता जी रूपी त्रिवेणी के आवागमन से सहज संभव है।

श्री कृष्ण जन्मस्थान पर गीता जी का पाठ करते आचार्य

शंकराचार्य वितरित करेंगे गीता जयंती पर प्रसाद

इस अवसर पर संस्थान के पूजाचार्यों के द्वारा किये गये गीताजी के सस्वर पाठ से संपूर्ण भागवत-भवन गुंजायमान हो उठा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर पधारे श्रद्धालु गीता के पुरोधा की जन्मभूमि पर उन्हीं की वाणी को सुनकर अभिभूत हो उठे। मंगलवार को गीता-जयन्ती महोत्सव का मुख्य प्रसाद पीले वस्त्र में श्रीगीता जी की पुस्तक एवं प्रसाद का वितरण शंकराचार्य विधुशेखर भारती महास्वामी जी महाराज के सानिध्य में किया जायेगा। शंकराचार्य के दिव्य सानिध्य में श्रीगीता के प्रसाद को प्राप्त करने हेतु भक्तों में विशेष उत्साह एवं भाव है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव श्री कपिल शर्मा ने कृष्ण भक्तों एवं गीता के प्रेमियों से ऐसे दिव्य प्रसाद को प्राप्त करने का अनुरोध किया है।

पूजन के बाद निकाली शोभायात्रा

गीता जयंती के पावन अवसर पर श्रीमद् गीताजी की शोभायात्रा एवं संगोष्ठी का आयोजन केशव वेद विद्यालय केशव धाम एवं सोहम आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। अध्यक्षता महामंडलेश्वर स्वामी डॉ आदित्य गिरि महाराज ने की। सबसे पहले ललिता आश्रम मे श्री मद् गीताजी का पूजन आरती हुई। इसके बाद शोभायात्रा प्रारंभ हुई।

गीता जयंती के अवसर पर वृंदावन में आयोजित संगोष्ठी

गीता श्रवण का नहीं जीवन में अपनाने का ग्रन्थ

शोभायात्रा में गीता जी का जगह जगह पूजन आरती एवं पुष्पवर्षा के साथ सम्मान किया गया। सोहम आश्रम में दीप प्रज्वलन के साथ संगोष्ठी का प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम के संयोजक आचार्य डॉ रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि गीता जीव मात्र के कल्याण के लिए जियो गीता के माध्यम से यह संदेश समाज को भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के मध्य कुरुक्षेत्र में प्रदान किया।गीता केबल श्रवण का ही नहीं एवं जीवन में अपनाने का ग्रंथ है। मुख्य वक्ता चतुर्नारायण शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता में भगवान के द्वारा कर्म की उपादेयता का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान ने श्रेष्ठ धर्म के साथ श्रेष्ठ कर्म की शिक्षा प्रदान की है।

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