गुढ़ा बांध में 40% सिल्ट जमा, भराव क्षमता हुई कम: ठेका मिलने के बाद भी 3 साल में शुरू नहीं हुआ काम, लोगों में आक्रोश – Bundi News h3>
बूंदी के 70 साल पुराने गुढ़ा बांध में 40% सिल्ट (मिट्टी का मलबा) जमा हो गई है, जिससे इसकी भराव क्षमता काफी कम हो गई है। तीन साल पहले सिल्ट निकालने का ठेका लेने वाली कंपनी ने अब तक काम शुरू नहीं किया है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि संवेदक की लापरवाही और मनमानी से बड़ा घोटाला हो सकता है। उनका कहना है कि टोंक के बनास नदी में सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए की बजरी निकाली जा रही है, जबकि गुढ़ा बांध में कोई काम नहीं हो रहा। वर्ष 1958 में निर्मित गुढ़ा बांध को कभी एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध माना जाता था। 100 किलोमीटर के कैचमेंट एरिया से खेराड़ और भीलवाड़ा का पानी इसमें आता है। पिछले 7 दशकों में खेतों से बहकर आई मिट्टी से बांध का पेटा भर गया है, लेकिन विभाग ने आज तक एक बार भी सिल्ट नहीं निकलवाई। सेटेलाइट सर्वे में 40% सिल्ट जमा होने की पुष्टि हुई है। 10 साल के लिए सिल्ट निकालने का टेंडर जारी किया था
ईआरसीपी ने 31 मार्च 2023 को राजस्व आधारित मॉडल पर 10 साल के लिए सिल्ट निकालने का टेंडर जारी किया था। कार्यादेश 31 मार्च 2023 से 31 मार्च 2033 तक का है, लेकिन संवेदक ने साइट पर एक फावड़ा तक नहीं चलाया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, गुढ़ा बांध और बनास का टेंडर एक ही कंपनी को मिला था। बनास में बजरी होने के कारण संवेदक ने वहां काम शुरू कर दिया, लेकिन गुढ़ा में सिलिका कम और सिल्ट ज्यादा होने के कारण वह रुचि नहीं दिखा रहा है। ईआरसीपी के मुख्य अभियंता रवि सोलंकी ने स्वीकार किया कि संवेदक का कहना है कि सिल्ट बाधा बन रही है। विभाग ने संवेदक को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ है। किसानों की लाइफलाइन खतरे में
गुढ़ा बांध का 1958 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लोकार्पण किया था। बांध से 11,380 हेक्टेयर जमीन सिंचित होती है – बायीं नहर से 3,751 व दायीं नहर से 7,629 हेक्टेयर। सिल्ट जमने से पानी की क्षमता घट गई है। किसानों को भरपूर सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा। नाराज किसान कह रहे हैं कि सिल्ट खेतों के लिए उपजाऊ है, पर संवेदक की मंशा नहीं है। गुढ़ा बांध की विशेषताएं विभाग क्या कह रहा
मुख्य अभियंता रवि सोलंकी का कहना है कि संवेदक ने कुछ दस्तावेज दिए हैं। सिल्ट निकालेगा तो विभाग राशि देगा। फिलहाल नोटिस जारी कर जल्द काम शुरू करने को कहा है। बड़ा सवाल..
3 साल से ठेका लेकर बैठा संवेदक काम क्यों नहीं कर रहा? बनास में बजरी के लिए सक्रिय, गुढ़ा में चुप्पी क्यों? क्या विभागीय मिलीभगत है? अगर समय पर सिल्ट नहीं निकली तो किसानों की हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो जाएगी।
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