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कोरोना काल में मददगार बनकर इंसानियत को मजबूत कर रहे ये टीवी सिलेब्स

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कोरोना काल में मददगार बनकर इंसानियत को मजबूत कर रहे ये टीवी सिलेब्स


कोरोना काल में मददगार बनकर इंसानियत को मजबूत कर रहे ये टीवी सिलेब्स

कोरोना की दूसरी लहर ने जो तबाही मचाई, उसके बाद क्या आम क्या खास, हर कोई अपनी हैसियत से आगे आया मददगार के रूप में। कोरोना का कहर भले कुरूप हो, मगर इंसानियत का दयावान चेहरा इस दौर में और खूबसूरत नजर आया। टीवी और फिल्मों के बड़े सिलेब्स कोरोना में अपने-अपने हिसाब से लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं। हमने ऐसे ही टीवी सिलेब्स से जानी उनकी मदद की बात!

रोहिताश्व गौड़ ने आर्टिस्टों के राशन-पानी और किराए का किया इंतजाम
इस महामारी में सबसे ज्यादा प्रभावित ऐसे ऐक्टर हुए हैं, जो जूनियर आर्टिस्ट हैं और मुंबई में स्ट्रगल कर रहे हैं। वे किसी मुकाम पर नहीं पहुंच पाए हैं। वे छोटे- मोटे काम करते हैं, जिसमें उन्हें कभी पेमेंट मिलती है, कभी नहीं मिलती और वो भी कभी टेलिकास्ट के तीन महीने बाद मिलती है। ऐसे में उनके लिए किराया और राशन-पानी के लाले पड़े हुए हैं। मैं अपने आप को भाग्यवान मानता हूं कि मुझे लगातार काम मिलता रहा और एन टीवी पर मेरे शो भाबी जी घर पर हैं को लगातार लोकप्रियता मिली, मगर जो बेसिक जरूरतों से जूझ रहे हैं, ऐसे कलाकारों के लिए हमने राशन-पानी किराए का इंतजाम किया है। मुझे लगता है, इस मुश्किल दौर में हम इतना तो कर ही सकते हैं।

रोहिताश्व गौड़

डोनल बिष्ट बोलीं- बूंद-बूंद से सागर भरता है
मैं समझती हूं कि कोरोना की इस दूसरी लहर में हम हैसियत से थोड़ा भी कुछ करते हैं, तो वह बूंद-बूंद से सागर भरने जैसा होगा। मैं अपने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को लगातार पॉजिटिविटी दे रही हूं। इसके अलावा हाल ही में मैं #IStandByMedia से भी जुड़ी। इस कॉज के जरिए मैंने उन पत्रकारों के परिवारों की सहायता की अपील की, जो कोविड की बलि चढ़ गए। यह इनिशिएटिव प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो द्वारा चलाया गया था। इसके अलावा मैं ‘ फाइंड अ बेड’ पहल का भी हिस्सा बनी। हम सभी जानते हैं कि कोरोना के इस मुश्किल दौर में बेड्स की कितनी किल्लत है, तो मैं देश भर के 160 शहरों में 20 हजार स्टूडेंट्स की पहल वाले इस कॉज का हिस्सा बनी। मुझे लगता है, यह पहल इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।

डोनल बिष्ट

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डोनल बिष्ट

रुशद राणा ने कम्युनिटी फ्रिज के जरिए असहाय लोगों के लिए किया खाने का प्रबंध
कोविड में जहां लोग दवा और इलाज के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही। ऐसे लोगों के लिए हम खाने-पीने के इंतजाम में लगे हुए हैं।मैं अमफह नामक एक गैर सरकारी संगठन के साथ काम कर रहा हूं, जिसके साथ हमने मुंबई के विभिन्न हिस्सों में कम्युनिटी फ्रिज लगाए हैं। कम्युनिटी फ्रिज में हम खाना भर कर रखते हैं। संकट की इस घड़ी में इस तरह का फ्रिज सड़कों पर असहाय लोगों को खाना मुहैया करा सकता है।

रुशद राणा

रुशद राणा

डेलनाज ईरानी ने की पानी और एनराईजर के जरिए कुरियर वालों की मदद
मैं हाल ही में टूगेदर वी कैन की पहल से मैं जुड़ी हूं, जिसमें बिल्डिंग के चौकीदारों और बिल्डिंग में सामान पहुंचाने के लिए आने वाले कुरियर वालों के लिए जलपान की व्यवस्था होती है। हम उन्हें एनर्जाइजर पाउच और बोतलबंद पानी देते हैं। मौजूदा समय में कुरियर वालों को बिल्डिंग के अंदर नहीं आने दिया जा रहा है, ऐसे में उन्हें प्यास लगेगी, तो वो पानी भी नहीं मांग सकते। इस पहल के माध्यम से हम उन्हें रिफ्रेशमेंट मुहैया करवा देते हैं। जो इस भीषण गर्मी में सबसे अहम जरूरत है।मैं समझती हूं कि यह मेरी तरफ से छोटा-सा योगदान सही, मगर हमें यह समझने की जरूरत है कि कोरोना के कहर में ये लोग लगातार काम कर रहे हैं।

डेलनाज ईरानी

डेलनाज ईरानी

अमृता प्रकाश ने बताया- मैंने और मां ने की कोविड पीड़ितों के लिए मुफ्त भोजन सेवा
मैं इसे “दया का कार्य” नहीं मानती, क्योंकि मैं ईमानदारी से सोचती हूं कि हम सभी केवल अपनी सर्वोत्तम क्षमता में काम कर रहे हैं, क्योंकि यही समय की जरूरत है।हम अभी नहीं करेंगे, तो कब करेंगे? बहुत हाहाकार मचा हुआ है। कोविड की दूसरी लहर की वृद्धि के बाद से मैं कई समूहों के साथ एक संसाधन कार्यकर्ता के रूप में स्वेच्छा से काम कर रही हूं, जो कोविड राहत की दिशा में काम कर रहे हैं। मैं सप्ताह में 7 दिन 18-20 घंटे काम कर रही हूं, कई बार सुबह 6-7 बजे तक। इस बीच, मैंने और मेरी मां ने कोविड प्रभावित लोगों के लिए एक मुफ्त भोजन सेवा भी शुरू की है, जिसे मैं अपने सोशल मीडिया के माध्यम से कॉर्डिनेट कर रही हूं। इसके साथ ही मैं हेमकुंट फाउंडेशन के समर्थन में फंड्स रेजिंग मुहिम का भी हिस्सा हूं।

अमृता प्रकाश

अमृता प्रकाश

होम क्वारंटीन मरीजों की मदद कर रही हैं समीक्षा भटनागर
कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों को अलग-अलग तरह से लाचार कर दिया है। हर किसी की पीड़ा और जरूरत अलग है। फिलहाल मैं होम क्वारंटीन के मरीजों की मदद के लिए मैं डॉक्टरों के साथ कॉर्डिनेट कर रही हूं और उन्हें आवश्यक उपचार के बारे में सटीक जानकारी प्रदान कर रही हूं। मैं बीएमसी की मदद से पिछले हफ्ते 2 गंभीर रोगियों के लिए हॉस्पिटल में बेड की व्यवस्था करने में कामयाब रही थी।मैं आपको बता नहीं सकती, इस तरह की हेल्प करके मुझे कितना सुकून मिलता है। मैं सोशल मीडिया का उपयोग करके कोविड के उचित व्यवहार पर जन जागरूकता भी फैला रही हूं। मैंने देखा है कि ज्यादातर लोग संक्रमण के पहले कुछ दिनों में कोविड के बारे में नहीं जानते या गंभीरता से नहीं लेते हैं जबकि शुरुआती दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।मैंने जरूरतमंदों को ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे राहत प्रदान करने के लिए फंड रेज़र ड्राइव हेमकुंठ फाउंडेशन की मदद भी की है।

समीक्षा भटनागर

समीक्षा भटनागर

मदद करना तो फर्ज हैः हसन जैदी
हजरत अली ने कहा है कि आपको दान ऐसे देना चाहिए कि सीधे हाथ ने दिया हो, तो उल्टे हाथ को पता ना चले।शिया मुस्लिम होने के नाते हम इस बात पर अमल करते हैं।यही वजह है कि मैं इन बातों का ज्यादा प्रचार नहीं करता। मगर ये सच है कि कोरोना काल में मदद को आगे आना हर किसी का फर्ज बन गया है। हम पिछले एक साल से लोगों की हेल्प कर रहे हैं। बीते साल हमने मजदूरों, बुजुर्गों और विकलांकों की मदद की थी। हम अभी भी सहायता कर रहे हैं। उन्हें भोजन और मेडिकल हेल्प देकर। इस साल भी हम अपने गांव में लोगों की लगातार हेल्प कर रहे हैं। जैसे किसी की मेडिकल हेल्प हो या शादी ब्याह अथवा एजुकेशन की बात। मगर इसे हम अपने फर्ज के अंतर्गत करते हैं।

हसन जैदी



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