उदयपुर CMHO पर भ्रष्टाचार के मामले में गिर सकती गाज: बामणिया पर टेंडरों मे अनियमित्ता और पद के दुरूपयोग के आरोपों की जांच करेगी ACB, राज्य सरकार ने दी मंजूरी – Udaipur News h3>
शासन संयुक्त सचिव निशा मीणा की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि डॉ. शंकरलाल बामणिया के विरुद्ध प्राप्त जांच रिपोर्ट और आरोप-पत्रों के आधार पर ACB को अग्रिम कार्रवाई हेतु अनुमति दी जाए।
उदयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. शंकरलाल बामणिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू करने की हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में शासन संयुक्त सचिव निशा मीणा ने आदेश जारी कर
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अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) इस पूरे मामले में डॉ. बामणिया के खिलाफ विस्तृत जांच और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी। उदयपुर में फिलहाल 2 सीएमएचओ है। डॉ अशोक आदित्य और डॉ शंकर बामणिया। विभागीय सभी पावर डॉ अशोक के पास हैं। बामणिया राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर अपने पद पर लगे हुए है।
दरअसल डॉ. शंकरलाल बामणिया के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलने के बाद एसीबी ने सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांगी थी । भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 17-ए के तहत किसी भी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले विभाग् के सक्षम अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होती है।
इसी प्रक्रिया के तहत शासन सचिवालय के कार्मिक विभाग ने फाइल का रिव्यू किया और फिर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई के के लिए पत्र भेजा। मंत्री से मंजूरी के बाद अभियोजन स्वीकृति आदेश जारी हुए है।
डॉ. शंकरलाल बामणिया के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलने के बाद एसीबी ने सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांगी थी ।
डॉ. बामणिया के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए विभागीय मंत्री से पूर्वानूमोदन (अप्रुवल) प्राप्त कर लिया गया है। शासन संयुक्त सचिव निशा मीणा की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि डॉ. शंकरलाल बामणिया के विरुद्ध प्राप्त जांच रिपोर्ट और आरोप-पत्रों के आधार पर ACB को अग्रिम कार्रवाई हेतु अनुमति दी जाए। इस आदेश की कॉपी महानिदेशक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भी भेज दी गई है, ताकि ACB तुरंत अपना काम शुरू कर सकें।
क्या है पूरा मामला? एसीबी के डीआईजी (प्रथम) डॉ. रामेश्वर सिंह ने इस मामले में पहल की थी। एसीबी के पास डॉ. बामणिया के खिलाफ पद के दुरूपयोग, टेंडरों मे अनियमित्ता आदि की शिकायत आई थी, जिसका शुरुआती परीक्षण करने पर उसे ‘विस्तृत जांच’ के बाद कार्यवाही योग्य पाया गया। एसीबी ने सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि लोक सेवक द्वारा अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में की गई गड़बड़ियों की जांच के लिए 17-ए की अनुमति जरूरी है। नियम के मुताबिक, सक्षम प्राधिकारी को 3 महीने के भीतर इस पर निर्णय लेना होता है।
अब आगे क्या होगा? न्यायलय के आदेश से CMHO की कुर्सी पर जमे हुए डॉ. बामणिया के खिलाफ नियम 13 के तहत कार्यवाही करेगी या फिर उनकी संपत्तियों और उनके कार्यकाल के रिकॉर्ड को खंगालना शुरू करेगी।
इस पूरे केस में उनकी गिरफ्तारी भी संभव है। उदयपुर के चिकित्सा विभाग में भी इस खबर के बाद हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि डॉ. बामणिया एक जिम्मेदार पद पर तैनात हैं और उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों ने विभाग की छवि पर भी सवाल खड़े किए हैं।




