हिजाब विवाद नहीं बल्कि साजिश है… कुरान में कैसे आई पर्दे की बात, आरिफ मोहम्मद खान ने बताई खूबसूरत लड़की की कहानी

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हिजाब विवाद नहीं बल्कि साजिश है… कुरान में कैसे आई पर्दे की बात, आरिफ मोहम्मद खान ने बताई खूबसूरत लड़की की कहानी

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) ने हिजाब विवाद को एक ‘साजिश’ करार दिया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि यह पसंद का मामला नहीं है, बल्कि सवाल है कि क्या कोई व्यक्ति किसी संस्थान के नियमों, ड्रेस कोड का पालन करेगा या नहीं? कर्नाटक में हिजाब पर छिड़े विवाद (Hijab Vivad) पर बोलते हुए दिल्ली में उन्होंने कहा, ‘कृपया, इसे विवाद के रूप में न लें…यह एक साजिश है।’ आरिफ मोहम्मद ने कहा, ‘मुस्लिम लड़कियां हर जगह बहुत अच्छा कर रही हैं और इसलिए उन्हें प्रोत्साहन की जरूरत है। उन्हें नीचे धकेलने की जरूरत नहीं है।’ एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कुरान में हिजाब के जिक्र आने का संदर्भ भी समझाया।

किसी भी व्‍यक्ति का पहनावा विवाद का विषय नहीं होना चाहिए। यह व्‍यक्ति का अपना अधिकार है। शर्त सिर्फ इतनी है कि शालीनता होनी चाहिए। यह भी बात है कि आर्मी या पुलिस में भर्ती होने वाला यह नहीं कह सकता कि मैं जो चाहूंगा वो पहनूंगा। यह बात पुरुषों और महिलाओं दोनों पर लागू होती है।

केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्‍मद खान

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उन्होंने कहा, ‘यह (हिजाब पहनना) पसंद का सवाल नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि अगर आप किसी संस्थान में शामिल हो रहे हैं तो क्या आप नियमों, अनुशासन और ड्रेस कोड का पालन करेंगे या नहीं।’

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हिजाब, कुरान, इस्लाम की बात समझिए
हिजाब विवाद में कुरान के जिक्र पर गवर्नर आरिफ मोहम्मद ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि कुरान का सिर्फ ये लोग नाम लेते हैं, उसका उल्लेख नहीं करते हैं। है ही नहीं। दुनिया में जितनी भी धार्मिक परंपराएं हैं, इस्लाम तुलनात्मक रूप से बाद में आया है… सबका एक ही उद्देश्य है- इंसानों को सुसंस्कृत बनाना। उनके अंदर करुणा का भाव, रहम का जज्बा पैदा करना। उन्हें आदमी से इंसान बनाना।

गवर्नर ने कहा कि जहां तक महिलाओं के ड्रेस का ताल्लुक है, हिजाब शब्द कुरान में सात बार प्रयोग हुआ है लेकिन किसी भी जगह महिलाओं की वेशभूषा के संदर्भ में नहीं हुआ है। उसके लिए खिमार (गमछा) का प्रयोग हुआ है जो छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि ध्यान रखिए उस समय समाज में दो वर्ग होते थे- आजाद और गुलाम। गुलाम महिलाएं होती थीं, उनके साथ लोग बदतमीजी करते थे और उन पर अपना हक समझते थे। ऐसा किसी आजाद महिला के साथ भी हुआ, तो छेड़ने वालों ने कहा कि उन्होंने उसे गुलाम समझ लिया था। ऐसे में कुरान में एक आयत आई जिसमें कहा गया कि खिमार को अपनी कमीज पर डाल लो, उसका मतलब यह था कि उसे चेस्ट पर रख लो ताकि तुम पहचानी जा सको। यानी तुम गुलाम नहीं हो। इसमें संदेश यह था कि जिस पर्दे की बात कुरान कर रहा है वह महिलाओं की पहचान को बनाने में मददगार साबित हो।

खूबसूरत महिला का वो किस्सा
केरल के राज्यपाल ने कहा है कि अगर इस्लाम के इतिहास पर गौर किया जाए तो महिलाओं के पर्दा करने से इनकार करने के उदाहरण रहे हैं। हालांकि, उन्होंने खुलकर अपनी राय जाहिर नहीं की लेकिन अपनी बात रखने के लिए एक युवा महिला की कहानी सुनाई, जो पैंगबर की रिश्तेदार बताई जाती है।

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खान ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं आपको एक बात बताऊंगा…एक युवा लड़की, जो पैगंबर के घर में पली-बढ़ी थी… वह पैगंबर की पत्नी की रिश्तेदार थीं। वह काफी सुंदर थी…इतिहास यही कहता है…इसे पढ़िए।’

कहानी के हवाले से उन्होंने कहा कि मध्यकाल में जब उस महिला का पति कूफा का गवर्नर था तो उसे हिजाब न पहनने के लिए फटकार लगाई गई थी। उसने तब कहा था कि अल्लाह ने उसे खूबसूरत बनाया और अल्लाह ने उस पर खूबसूरती की मुहर लगा दी थी।

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खान ने कहा, ‘उसने कहा कि मैं चाहती हूं कि लोग मेरी सुंदरता देखे और मेरी सुदंरता में अल्लाह का रहम देखे…और अल्लाह का शुक्रगुजार रहे…इस्लाम की पहली पीढ़ी की महिलाओं की यह सोच थी। मैं यही कहना चाहता हूं।’

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पिछले दिनों कर्नाटक के उडुपी में सरकारी कॉलेज में हिजाब पहनकर आई छात्राओं को कक्षाओं में प्रवेश नहीं देने से विवाद शुरू हुआ था। बाद में यह विवाद बढ़ता चला गया और कुछ हिंदू छात्र भगवा गमछा लेकर आने लगे।
(भाषा से इनपुट के साथ)

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