सूखे पेड़ काटने पर न करें कार्रवाई…. दिल्ली हाई कोर्ट ने डिप्टी हेडमास्टर की सजा पर लगाई रोक

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सूखे पेड़ काटने पर न करें कार्रवाई…. दिल्ली हाई कोर्ट ने डिप्टी हेडमास्टर की सजा पर लगाई रोक

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने उप वन संरक्षक (DCF) को एक सरकारी स्कूल के डिप्टी हेडमास्टर के खिलाफ स्कूल परिसर के अंदर आठ सूखे पेड़ों को काटने या छांटने के मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया है। उप प्रधानाध्यापक के खिलाफ 4.2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था और उन्हें 50 पौधे लगाने का भी निर्देश दिया गया था। प्रधानाध्यापक की अनुपस्थिति में स्कूल के प्रभारी के रूप में कार्यरत याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने अपीलीय प्राधिकारी-प्रधान सचिव (पर्यावरण और वन), दिल्ली सरकार के समक्ष अपील की है और अपनी अपील में राहत मांगने से पहले ही उनपर जुर्माना लगाया जा रहा है।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा, ‘रिट याचिका पर आगे विचार करने और याचिकाकर्ता की इस दलील को ध्यान में रखते हुए कि पेड़ों की कटाई उचित अनुमति के साथ की गई थी और लोक निर्माण विभाग को सूचित किया गया था, अदालत सुनवाई की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाती है।’मामले में अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी। अदालत ने उप प्रधानाध्यापक की ओर से पेश अधिवक्ता अरुण पंवार की अपीलीय प्राधिकारी को पक्षकार बनाने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। अदालत ने दिल्ली सरकार के वकील से अपीलीय प्राधिकारी से सुनवाई की अगली तारीख पर या उससे पहले निर्देश प्राप्त करने को कहा।

याचिका में कहा गया है कि सितंबर 2020 में स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक हुई, जिसमें सूख चुके पेड़ों को काटने और छांटने का निर्णय लिया गया। याचिका में कहा गया कि वे पेड़ सूख गए थे और दीमक के कारण खोखले हो चुके थे और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों, शिक्षकों और स्कूल की इमारत की सुरक्षा के लिए खतरनाक थे। याचिका में आगे कहा गया है कि स्कूल में किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए निरीक्षण और पेड़ों की छंटाई के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक को एक अनुरोध पत्र भेजा गया था। हालांकि, अधिकारियों की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद दिसंबर 2020 में एक तहसीलदार ने स्कूल आकर छंटाई का काम पूरा किया और यहां एक श्मशान घाट में लकड़ी जमा कर दी।

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याचिका में कहा गया है कि जनवरी 2021 में एक नोटिस प्राप्त हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि स्कूल के प्रधानाध्यापक ने स्कूल परिसर में पेड़ों को नुकसान पहुंचाकर और काटकर अपराध किया है। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को कई अन्य नोटिस मिले और इस साल फरवरी में प्राप्त एक नोटिस में, डीसीएफ ने दावा किया कि उसने स्कूल परिसर में आठ सूखे पेड़ों को नुकसान पहुंचाकर और 18 अन्य पेड़ों की छंटाई कर अपराध किया है।

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