सीएम और मंत्रियों पर भी FIR करे सीबीआई… शराब घोटाले में सिसोदिया को फंसते देख केजरीवाल को भी कठघरे में लाने पर बीजेपी का जोर

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सीएम और मंत्रियों पर भी FIR करे सीबीआई… शराब घोटाले में सिसोदिया को फंसते देख केजरीवाल को भी कठघरे में लाने पर बीजेपी का जोर

नई दिल्ली: दिल्ली में कथित शराब घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ छिड़ी जुबानी जंग के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सारी कोशिशें अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फंदे में लाने की है। बीजेपी नेता अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि मनीष सिसोदिया तो चेहरा हैं, असली खेल तो बैकग्राउंड में रहकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने की है। बीजेपी उन्हें नई आबकारी नीति की आड़ में घोटाले को अंजाम देने की पूरी साजिश का किंगपिन बता रही है। प्रदेश बीजेपी के बड़े नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच की मांग की। उनका आरोप है कि दिल्ली मास्टर प्लान-2021 का उल्लंघन कर अनधिकृत क्षेत्रों में शराब दुकानों की अनुमति देने के पीछे का राज पता करना जरूरी है।

‘केजरीवाल कैबिनेट के पास अधिकार नहीं, फिर भी लिया फैसला’

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बिधूड़ी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शहर के अनधिकृत क्षेत्रों में शराब की दुकानों के लिए लाइसेंसधारियों को अनुमति देने का निर्णय पिछले साल 5 नवंबर को केजरीवाल की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया था। उन्होंने कहा कि न तो मुख्यमंत्री और न ही उनके मंत्रिमंडल के पास ऐसा निर्णय लेने की शक्ति है। बिधूड़ी ने कहा, ‘मैं सीबीआई से मांग करता हूं कि बैठक में मौजूद रहे केजरीवाल और उनके मंत्रियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए क्योंकि मंत्रिमंडल के पास दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के प्रावधानों का उल्लंघन कर अनधिकृत और आवासीय क्षेत्रों में शराब की दुकानें खोलने की अनुमति देने का अधिकार नहीं है।’

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मुख्यमंत्री और मंत्रियों के खिलाफ FIR की मांग

बिधूड़ी ने कहा कि यह शक्ति दिल्ली के मुख्यमंत्री या उनकी मंत्रिपरिषद में निहित नहीं थी। उन्होंने नियमों और प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए यह निर्णय लिया। भाजपा नेता ने दावा किया कि मास्टर प्लान गैर-निर्धारित क्षेत्रों में शराब की दुकानों की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने कहा कि यदि अनधिकृत क्षेत्र में शराब की दुकानों की अनुमति दी जानी है तो मास्टर प्लान में संशोधन की आवश्यकता है। बिधूड़ी ने कहा, ‘यह पूरी तरह से अवैध था और सीबीआई को केजरीवाल और उनके मंत्रियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए।’

एलजी ने भी डीडीए, एमसीडी की मंजूरी की लगाई थी शर्त
दस्तावेज से पता चलता है कि अंतिम रूप दी गई आबकारी नीति 2021-22 को 24 मई 2021 को तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल के समक्ष रखा गया था। दिल्ली मंत्रिमंडल ने 23 जून और 15 सितंबर को नीति में और संशोधन किए। 5 नवंबर 2021 को मंत्रिमंडल ने अनधिकृत क्षेत्रों में शराब की दुकानों को अनुमति देने का फैसला किया। दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय द्वारा तैयार एक रिपोर्ट से पता चलता है कि पूर्व उपराज्यपाल ने 15 नवंबर 2021 को निर्णय को मंजूरी दे दी, लेकिन एक शर्त रखी कि ऐसे क्षेत्रों में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की मंजूरी अनिवार्य है।

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उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर छापेमारी
सीबीआई ने भ्रष्टाचार की नीयत से आबकारी नीति में बदलाव करने के गंभीर आरोप में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर समेत 31 ठिकानों पर छापेमारी की। सीबीआई के छापे कई नौकरशाहों और कंपनियों के ठिकानों पर भी हुए। केंद्रीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार को सिसोदिया को घर की 14 घंटे तक तलाशी ली और उनका कंप्यूटर और मोबाइल जब्त कर लिए। इसने बुधवार को मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी जिसमें सिसोदिया को मुख्य आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने कुछ आरोपियों को पूछताछ के लिए समन भी भेज दिया है।

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