सियासी घटनाक्रम के बीच अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हुए विधायक, लोकार्पण- शिलान्यास कार्यक्रमों पर फोकस | MLA became active in their respective areas amid political development | Patrika News

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सियासी घटनाक्रम के बीच अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हुए विधायक, लोकार्पण- शिलान्यास कार्यक्रमों पर फोकस | MLA became active in their respective areas amid political development | Patrika News

लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रमों पर फोकस
सियासी संकट के बीच लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम एकाएक बढ़ गए हैं, विधायकों का भी पूरा फोकस लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम पर है जहां पर क्षेत्र से संबंधित विकास कार्यों का लगातार लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है, इसके अलावा विधानसभा क्षेत्रों के लंबित कार्यों काफी निपटारा किया जा रहा है।

जिला प्रशासन के जरिए होने वाले विकास कार्यों पर भी विधायकों ने पूरा फोकस कर दिया है और सड़क निर्माण, हैंडपंप, ट्यूबेल, बिजली, रोड लाइट, सफाई जैसे कामों को प्राथमिकता दी जा रही है।

विधायकों को मध्यावधि चुनाव की आशंका
सूत्रों की माने तो विधायकों का अपने-अपने क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा सक्रिय होने की एक वजह यह भी है कि सभी दलों के विधायक को मध्यावधि चुनाव की आशंका है। विधायकों का कहना है कि जिस तरह से सत्तारूढ़ कांग्रेस में गहलोत-पायलट गुट के बीच अदावत चल रही है उसे कहीं न कहीं मध्यावधि चुनाव की आशंका बनी हुई है, वहीं गहलोत कैबिनेट के मंत्री ही साफ बयान दे रहे हैं कि वो किसी भी कीमत पर सचिन पायलट गुट से मुख्यमंत्री नहीं बनने देंगे चाहे इसके लिए फिर मध्यावधि चुनाव भी क्यों ना हो जाए?

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इसी आशंका के चलते विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में समय देना शुरू कर दिया है जिससे की अगर इस तरह की आशंका बनती भी है तो समय से पहले ही अपने तमाम कार्यों का निपटारा कर दें और जनता की नाराजगी भी दूर कर दें।

सवा साल बाद होने हैं विधानसभा चुनाव
हालांकि राजस्थान में विधानसभा चुनाव दिसंबर 2023 में होने हैं, ऐसे में अभी सवा साल का समय बचा हुआ है लेकिन जिस तरह से कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर गहलोत-पायलट गुट के बीच टकराव हो रहा है, उससे कहीं न कहीं विधायकों में भी मध्यावधि चुनाव को लेकर चिंता पेंशन बढ़ी हुई है।

गौरतलब है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर हाल ही में प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने विधायक दल की बैठक बुलाई थी लेकिन गहलोत गुट के विधायकों ने इस बैठक का बहिष्कार करते हुए समानांतर विधायक दल की बैठक बुलाई थी और 92 विधायकों ने सीएम गहलोत के समर्थन में अपना इस्तीफा विधानसभा स्पीकर को दे दिया था जिसके बाद पार्टी आलाकमान ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सीएम गहलोत के करीबी शांति धारीवाल, महेश जोशी और आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ को कारण बताओ नोटिस जारी करके 10 दिन में जवाब मांगा था।

वीडियो देखेंः- AICC ऑफिस के बाहर पायलट के समर्थन में लगे नारे



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