साड़ी के जरिए पॉलिथिन के नुकसान की दे रहे जानकारी | Giving information about the loss of polythene through saree | Patrika News

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साड़ी के जरिए पॉलिथिन के नुकसान की दे रहे जानकारी | Giving information about the loss of polythene through saree | Patrika News

Rakhi Hajela
पॉलिथिन के बढ़ते प्रयोग का असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। पॉलिथिन से होने वाले नुकसान को देखते हए अब राज्य सरकार भी इसके उपयोग पर एक जुलाई से रोक लगाने जा रही है। राजधानी जयपुर में मालवीय नगर निवासी नवल डागा और उनकी पत्नी शारदा डागा ने भी पॉलिथिन से होने वाले नुकसान को बताने के लिए एक अनोखा तरीका ईजाद किया है।
नवल डागा और उनकी पत्नी ने एक खास साड़ी तैयार की है, साड़ी की खासियत है इस पर लिखी गई चौपाईयां। साड़ी पर कुल 213 दोहे प्रिंट किए गए हैं, जिन्हें नवल डागा ने खुद लिखा है। सभी दोहों में पॉलिथिन से होने वाले नुकसान को लेकर संदेश दिया गया है।
पहला शब्द ही पॉलिथिन
इन सभी 213 दोहों में भी खास यह है कि हर दोहा पॉलिथिन शब्द से शुरू होता है यानी दोहे का पहला शब्द पॉलिथिन है और तो और दोहे में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिसमें नीचे की मात्रा नहीं लगाई गई है। नवल डागा बताते हैं कि इस साड़ी को तैयार करने में उन्हें तकरीबन तीन माह का समय लगा है। पॉलिस्टर की साड़ी को तैयार करने में प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया गया है।
थैले भी किए तैयार
इसके साथ ही उन्होंने इसी तरह से कपड़े के थैले भी तैयार किए गए है। इन थैलों पर भी पॉलिथिन का उपयोग रोकने का मैसेज देते हुए दोहे लिखे गए हैं। नवल और शारदा बताते हैं कि वह अपने मिलने वाले लोगों को यह थैले उपहार में देते हैं जिससे उनका संदेश अन्य लोगों तक पंहुच सकें और वह भी पॉलिथिन का उपयोग करना बंद करें।
गौरतलब है कि नवल डागा 13 जुलाई 1977 से पेड़, पानी और वन्य जीवों के सरंक्षण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने इस कार्य को सुचारू रूप से अंजाम देने के लिए समय की एक एक बूंद को व्यर्थ बहने से रोकते हैं। वे पर्यावरण से जुड़े विभिन्न प्रकार के फ्रेंडली आइटम्स बनाते हैं, जो पूरी दुनिया में इनके अलावा आपको कहीं भी देखने को नहीं मिलेंगे। नवलजी का घर विचित्रताओं से भरा है। पर्यावरण से जुड़े हर एक विषय पर नारे, स्लोगन, कविता, मुहावरे, लोकोक्तियां, फैक्ट्स एंड फिगर्स को आम जीवन से जुड़ी वस्तुओं पर प्रिंट करके उन्हें देश-विदेश तक पहुंचाने का कार्य नवल डागा अर्से से करते आ रहे हैं।
उनके यहां निर्मित होने वाले 6822 आइटम्स 14 भारतीय भाषाओं में बनते हैं। 302 से ज्यादा तरह के कुशन कवर बनाते हैं। 546 गौत्रों के आइटम हैं इनके पास। 1269 तरह के आइटम हैं जो सिर्फ आने जाने वालों को गिफ्ट करते हैं। गुल्लक, साड़ी के फॉल, मोबाइल स्टैंड, पेन स्टैंड,चाबी स्टैंड, गिलास, ट्रे, टाइल्स, छाते, राखियां, खटिया, बुक्स, पंखी,पेपर वेट, ट्रैवलिंग बेग, चाय प्लेट, गाय को रोटी खिलाने का कवर आदि बनाने में कील प्रयोग नहीं की जाती।



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