सड़क हादसे में दोस्त की हुई मौत, बांट दिए 56 हजार से ज्यादा हेलमेट, अब उठाई हेलमेट पर GST खत्म करने की मांग

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सड़क हादसे में दोस्त की हुई मौत, बांट दिए 56 हजार से ज्यादा हेलमेट, अब उठाई हेलमेट पर GST खत्म करने की मांग

नई दिल्ली: दोस्त की मौत के बाद देश के 22 राज्यों में 56 हजार से ज्यादा हेलमेट बांटकर सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर चुके नोएडा के ‘हेलमेट मैन’ राघवेंद्र हेलमेट को जीएसटी से मुक्ति दिलाना चाहते हैं। इसके लिए वह जीएसटी काउंसिल की बैठक में अपनी आवाज पहुंचाने के लिए नोएडा में जीएसटी के ज्वाइंट कमिश्नर मनोज कुमार विश्वकर्मा से लेकर देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण तक ई-मेल भेजने के साथ सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। हेलमेट पर जीरो जीएसटी के लिए वह इंटरनैशनल रोड फेडरेशन (IRF) से भी आवाज उठा चुके हैं।

वित्त मंत्री से की जीएसटी खत्म करने की मांग
‘हेलमेट मैन’ के नाम से विख्यात राघवेंद्र कुमार ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हेलमेट पर जीएसटी समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने वित्त मंत्री को लिखा है कि ज्यादातर दोपहिया वाहन चालक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अथवा निम्न आय वर्ग में आते हैं। हेलमेट पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जिससे उनका मूल्य बढ़ जाता है। सड़क सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है कि दोपहिया वाहनों पर सवारी करने वाले लोग अनिवार्य रूप से हेलमेट लगाएं। ऐसे में जीवन बचाने वाले उपकरण पर 18 प्रतिशत जीएसटी ठीक नहीं है।

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सड़क हादसों से अर्थव्यवस्था को होता है नुकसान
रोड सेफ्टी से जुड़ी एक एजेंसी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सड़क हादसों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को हर वर्ष 15 से 38 अरब डालर का नुकसान होता है। सड़क परिवहन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में डेढ़ लाख से अधिक लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई। इनमें 31.4 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालक थे। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भी पत्र लिखकर उनसे वित्त मंत्री के समक्ष हेलमेट पर जीएसटी खत्म करने की मांग रखने का अनुरोध किया है। गौरतलब है केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में माल और सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की 48वीं बैठक 17 दिसंबर को होगी।

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दोस्त की मौत के बाद राघवेंद्र बन गए हेलमेट मैन
बिहार के कैमूर जिला के बगाढ़ी गांव के रहने वाले राघवेंद्र कुमार के हेलमेट मैन बनने की कहानी बहुत संवेदनशील है। बनारस होकर दिल्ली आने के बाद लॉ की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद नौकरी के साथ ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट लेकर आराम से रह रहे राघवेंद्र की जिंदगी में मोड़ 2014 में तब आया जब उनका एक अजीज दोस्त हादसे में दम तोड़ देता है। इस हादसे के बाद उनके मुंह से यही निकलता है कि काश बाइक चला रहे उसके दोस्त के पास एक हेलमेट होता। इस हादसे ने राघवेंद्र को ‘हेलमेट मैन’ बना दिया। जॉब छोड़ दी और लोगों को हेलमेट के प्रति जागरूक करने में जुट गए। अब तक 56 हजार से ज्यादा हेलमेट लोगों के सहयोग से बांटने के साथ 29 लोगों की जिंदगी भी बचा चुके हैं।

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