सचिन पायलट अब नहीं बनाएंगे नई पार्टी,कांग्रेस के इस दांव के बाद खत्म हो गई संभावना

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सचिन पायलट अब नहीं बनाएंगे नई पार्टी,कांग्रेस के इस दांव के बाद खत्म हो गई संभावना

सचिन पायलट अब नहीं बनाएंगे नई पार्टी,कांग्रेस के इस दांव के बाद खत्म हो गई संभावना

जयपुर: राजस्थान में पिछले साढ़े 4 साल से गहलोत और पायलट के बीच चल रहा सियासी बवाल अब चरम पर पहुंच चुका है। कांग्रेस में दिखाई दे रही मतभेदों की लड़ाई को लेकर आलाकमान ने गत दिनों हो दोनों ही नेताओं को बिठा कर उनमें सुलह करवाने का प्रयास किया। लेकिन यह सुलह कितनी टिकाऊ रही। यह सबके सामने हैं। पायलट अभी भी अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर डटे हुए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि पायलट की तीनों मांगे नहीं मानी जाती है तो, पायलट अपनी नई पार्टी का गठन कर सकते हैं। इसकी सबसे अधिक संभावना 11 जून को राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर किया जाना माना जा रहा है। राजेश पायलट की पुण्यतिथि को लेकर सचिन पायलट पर पूरे देश के लोगों की नजरें टिकी हुई है। आखिर पुण्यतिथि मनाने के बाद क्या पायलट नई पार्टी की घोषणा करेंगे या फिर कांग्रेस में बने रहेंगे।

कांग्रेस के नेताओं ने नई पार्टी की संभावनाओं से किया इनकार

जहां एक ओर 11 जून को पायलट की ओर से नई पार्टी के गठन की घोषणा को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज है। वही कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल पायलट की नई पार्टी बनाने की चर्चा को लेकर इसे केवल अफवाह बता रहे है। राहुल गांधी, खरगे और वेणुगोपाल ने अशोक गहलोत और पायलट को मना लिया है। इसके बाद ही साथ मिलकर चुनाव लड़ने की सहमति बनाई है। जिसका जिक्र वेणुगोपाल मीडिया के सामने कर चुके हैं। उनका कहना है कि सचिन पायलट लगातार संपर्क में है। दिल्ली में हुई बैठक के बाद पायलट से 3-4 बार बात हो चुकी है। राजस्थान में इस तरह कोई एक्टिविटी नहीं हो रही है। उनका दावा है कि सब एकजुट होकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

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क्या कांग्रेस का यह दांव रोकेगा, पायलट को पार्टी गठन से

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान सियासी बवाल को थामना चाहती है। दूसरी ओर पायलट अपने मुद्दों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में आलाकमान की पूरी कोशिश है कि, पायलट को राजी किया जाए। इसके लिए एक फार्मूला तैयार किया गया है। जिसमें माना जा रहा है कि दिल्ली में हुई बैठक के बाद वेणुगोपाल ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही है। उसके पीछे कहीं ना कहीं पायलट को एक बार फिर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष का ताज पहनाने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस ने इसकी लगभग पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में चर्चा है कि यह दाव कांग्रेस में फैले बवाल और पायलट की नई पार्टी की घोषणा को रोकने से जोड़ा जा रहा है। इस लिहाज से 11 जून को राजेश पायलट की पुण्यतिथि का दिन सचिन पायलट और कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसी के आधार पर पायलट की अगली सियासत चाल का रुख का पता लग सकेगा।

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